सीएनजी ₹3 प्रति किलो महंगी: दो दिन में दूसरी बढ़ोतरी, कांग्रेस ने सरकार पर बोला हमला
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 17 मई 2026 को सीएनजी की कीमतों में ₹1 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई — महज दो दिनों में यह दूसरी वृद्धि है। इससे पहले 15 मई को ₹2 प्रति किलोग्राम का इजाफा हो चुका था, जिससे कुल बढ़ोतरी ₹3 प्रति किलोग्राम हो गई है। नई दरों के अनुसार दिल्ली में सीएनजी अब ₹80.09 प्रति किलोग्राम पर बिक रही है, जबकि नोएडा और गाजियाबाद में यह ₹88.70 प्रति किलोग्राम पर पहुँच गई है।
मुख्य घटनाक्रम
15 मई 2026 (शुक्रवार) को सीएनजी की दर ₹2 प्रति किलोग्राम बढ़ाकर दिल्ली में ₹79.09 प्रति किलोग्राम कर दी गई थी। उसी दिन राष्ट्रीय राजधानी में पेट्रोल की कीमत भी लगभग ₹3 प्रति लीटर बढ़कर ₹97.77 प्रति लीटर और डीजल ₹3 प्रति लीटर बढ़कर ₹90.67 प्रति लीटर हो गया था। दो दिन बाद 17 मई को एक बार फिर सीएनजी में ₹1 प्रति किलोग्राम की वृद्धि कर दी गई।
वैश्विक कारण: होर्मुज स्ट्रेट का संकट
ईंधन की कीमतों में यह उछाल पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज स्ट्रेट की लगातार नाकेबंदी के बीच आया है। वैश्विक तेल और गैस व्यापार का लगभग पाँचवाँ हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। आपूर्ति में रुकावट के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें तेज़ी से बढ़ी हैं, जिसका सीधा असर घरेलू ईंधन दरों पर पड़ रहा है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने एक्स पर पोस्ट कर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने लिखा, 'महंगाई मैन' मोदी का चाबुक फिर चला — 15 मई को ₹2 और 17 मई को ₹1 की बढ़ोतरी। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि चुनाव समाप्त होते ही सरकार की 'वसूली' शुरू हो गई है।
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने एक्स पर व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा, 'राष्ट्रहित में सीएनजी के दाम बढ़ाए गए। सीएनजी पिछले 3 दिनों में ₹3 महंगी की गई है। बस ऐसे ही हौले-हौले झटके दिए जाएंगे।'
आम जनता पर असर
सीएनजी-चालित वाहनों पर निर्भर ऑटो-रिक्शा चालक, टैक्सी ऑपरेटर और छोटे परिवहन व्यवसाय सीधे प्रभावित हो रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब शहरी उपभोक्ता पहले से पेट्रोल और डीजल की बढ़ी दरों का बोझ उठा रहे हैं। गौरतलब है कि सीएनजी को पेट्रोल-डीजल के सस्ते और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प के रूप में बढ़ावा दिया जाता रहा है।
आगे की स्थिति
होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव यदि जारी रहा तो अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल की आशंका है, जो भविष्य में घरेलू ईंधन दरों पर और दबाव बना सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार सरकार की मूल्य-नीति वैश्विक बाज़ार के उतार-चढ़ाव से गहरी तरह जुड़ी है और निकट भविष्य में राहत की संभावना सीमित दिखती है।