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पेट्रोल-डीजल ₹3 महंगा: विशेषज्ञों ने कहा — नवीकरणीय ऊर्जा और EV में निवेश को मिलेगी रफ्तार

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पेट्रोल-डीजल ₹3 महंगा: विशेषज्ञों ने कहा — नवीकरणीय ऊर्जा और EV में निवेश को मिलेगी रफ्तार

सारांश

पेट्रोल-डीजल में ₹3 की बढ़ोतरी सिर्फ महंगाई की खबर नहीं — यह भारत की ऊर्जा रणनीति के लिए एक निर्णायक मोड़ है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह दबाव नवीकरणीय ऊर्जा और EV की ओर बदलाव को तेज कर सकता है, जबकि 85% कच्चे तेल के आयात पर निर्भर भारत के लिए विदेशी मुद्रा और महंगाई का जोखिम बरकरार है।

मुख्य बातें

15 मई से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी लागू हुई।
दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपए और CNG 79.09 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई।
वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें फिलहाल 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास, फरवरी में 69 डॉलर से बढ़कर 120 डॉलर तक पहुँची थीं।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह मूल्यवृद्धि नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा संरक्षण और EV अपनाने की रफ्तार बढ़ा सकती है।

नई दिल्ली में शुक्रवार, 15 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद आर्थिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इससे महंगाई और परिवहन लागत पर दबाव बढ़ेगा। साथ ही, विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यह मूल्यवृद्धि नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा संरक्षण और विविध आपूर्ति शृंखलाओं में निवेश को गति दे सकती है। दिल्ली में पेट्रोल अब 97.77 रुपए प्रति लीटर और सीएनजी 79.09 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुँच गई है।

मुख्य घटनाक्रम

शुक्रवार से लागू नई दरों के अनुसार दिल्ली में पेट्रोल 3.14 रुपए प्रति लीटर बढ़कर 97.77 रुपए और डीजल 3.11 रुपए प्रति लीटर महंगा हुआ है। इसके अतिरिक्त, पश्चिम एशिया संकट के बीच तेल कंपनियों ने संपीड़ित प्राकृतिक गैस (CNG) की कीमतों में भी 2 रुपए प्रति किलोग्राम की वृद्धि की है, जिसके बाद दिल्ली में CNG की नई कीमत 79.09 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई है।

विशेषज्ञों की राय: महंगाई और रणनीतिक चुनौती

इंफोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. मनोरंजन शर्मा ने कहा कि ईंधन की बढ़ी कीमतें परिवहन और उत्पादन लागत को ऊपर धकेलेंगी, जिससे आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने कहा, 'तेल आयात करने वाले देशों की आर्थिक वृद्धि धीमी पड़ सकती है, औद्योगिक उत्पादन कमजोर हो सकता है और लोगों की खरीद क्षमता पर असर पड़ सकता है। हालांकि, इससे नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा संरक्षण और विविध आपूर्ति शृंखलाओं में निवेश तेज हो सकता है। इस कारण यह संकट आर्थिक के साथ-साथ रणनीतिक चुनौती भी बन गया है।'

शर्मा ने यह भी रेखांकित किया कि यह संकट ऊर्जा आपूर्ति के लिए राजनीतिक रूप से अस्थिर क्षेत्रों पर अत्यधिक निर्भरता के जोखिम को उजागर करता है। गौरतलब है कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिसका सीधा असर विदेशी मुद्रा भंडार और वित्तीय स्थिरता पर पड़ता है। रुपए में कमजोरी आने से आयात खर्च और बढ़ने की आशंका भी बनी रहती है।

EV अपनाने की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद

एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी विभाग के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी ने कहा कि इस तरह के मूल्य संशोधन लंबे समय में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाने और आयातित ईंधन पर निर्भरता घटाने की दिशा में तेजी ला सकते हैं। उनके अनुसार, 'ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी से कुछ समय के लिए महंगाई बढ़ सकती है और परिवहन व उपभोग लागत पर असर पड़ सकता है। लेकिन यह भी दिखाता है कि सरकार वैश्विक अनिश्चितता के बीच ईंधन सब्सिडी को नियंत्रित करने और विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा पर ध्यान दे रही है।'

वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें और तेल कंपनियों पर दबाव

रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के रिसर्च विभाग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजीत मित्रा ने बताया कि फिलहाल ईंधन की उपलब्धता स्थिर बनी हुई है, लेकिन कीमतों में बढ़ोतरी से अर्थव्यवस्था में महंगाई का दबाव और गहरा हो सकता है। उन्होंने कहा, 'वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें फरवरी में करीब 69 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुँच गई थीं और फिलहाल 107 डॉलर के आसपास बनी हुई हैं। इससे तेल विपणन कंपनियों पर लागत बढ़ने और मुनाफा घटने का दबाव बढ़ गया था।' यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों को अस्थिर किए हुए है।

आगे की राह

आलोचकों का कहना है कि बिना ठोस नीतिगत रोडमैप के ईंधन मूल्यवृद्धि का बोझ सीधे आम उपभोक्ता पर पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सरकार इस अवसर का उपयोग नवीकरणीय ऊर्जा नीति को मजबूत करने और EV अवसंरचना में निवेश बढ़ाने के लिए करती है, तो मध्यम अवधि में ऊर्जा आयात निर्भरता में कमी आ सकती है। आने वाले हफ्तों में वैश्विक कच्चे तेल की दिशा और रुपए की चाल यह तय करेगी कि घरेलू ईंधन कीमतों पर और दबाव बनेगा या राहत मिलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी EV चार्जिंग नेटवर्क और सौर क्षमता का विस्तार अपेक्षित गति से नहीं हुआ। असली सवाल यह है कि क्या यह मूल्यवृद्धि महज राजकोषीय मजबूरी है या दीर्घकालिक ऊर्जा नीति का हिस्सा — और इसका जवाब सरकार की अगली बजटीय प्राथमिकताओं से मिलेगा।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

15 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई?
15 मई को पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। दिल्ली में पेट्रोल 3.14 रुपए बढ़कर 97.77 रुपए और डीजल 3.11 रुपए महंगा हुआ।
CNG की नई कीमत क्या है?
पश्चिम एशिया संकट के बीच तेल कंपनियों ने CNG में भी 2 रुपए प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की है। दिल्ली में CNG की नई कीमत 79.09 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई है।
ईंधन महंगा होने से आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ने से आवश्यक वस्तुओं की कीमतें ऊपर जा सकती हैं और लोगों की खरीद क्षमता प्रभावित हो सकती है। महंगाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका भी जताई गई है।
क्या ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी से नवीकरणीय ऊर्जा को फायदा होगा?
इंफोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. मनोरंजन शर्मा और एलकेपी सिक्योरिटीज के जतीन त्रिवेदी के अनुसार, बढ़ती ईंधन लागत नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा संरक्षण और EV अपनाने की रफ्तार को तेज कर सकती है। हालांकि यह दीर्घकालिक लाभ है और तत्काल राहत सीमित है।
भारत कितना कच्चा तेल आयात करता है और इसका क्या असर है?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बनता है और रुपए में कमजोरी आने पर आयात खर्च और बढ़ सकता है, जो वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिम है।
राष्ट्र प्रेस
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