पेट्रोल-डीजल मूल्यवृद्धि पर राहुल गांधी का हमला: 'गलती सरकार की, कीमत जनता चुकाएगी'
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 15 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह आर्थिक बोझ सरकार की नीतिगत विफलताओं का परिणाम है, जिसकी कीमत आम जनता को चुकानी पड़ रही है। राहुल गांधी ने आगे भी तेल कीमतों में इज़ाफे की आशंका जताई।
राहुल गांधी का सीधा हमला
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'गलती सरकार की, कीमत जनता चुकाएगी। ₹3 का झटका आ चुका, बाकी वसूली किस्तों में की जाएगी।' उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी, क्योंकि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें पहले से ही दबाव में हैं।
खड़गे का आर्थिक संकट पर बड़ा आरोप
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी एक्स पर पोस्ट कर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा, 'ये संकट सरकार की ओर से लाया गया संकट है, जिसका खामियाजा देश की जनता को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी पर अपनी जेब से भरना पड़ रहा है। जब डीजल के दाम बढ़ते हैं तो पूरे देश में महंगाई का असर पड़ता है। उद्योगों से लेकर घरेलू बजट व किसानों तक सब पर बुरा असर पड़ता है।'
खड़गे ने वैश्विक ईंधन संकट के साथ-साथ सरकार में 'नेतृत्व संकट और दूरदर्शी सोच के अभाव' को भारत की आर्थिक कठिनाइयों की बड़ी वजह बताया।
रूसी तेल और संप्रभुता का सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने मार्च में रूसी तेल खरीद पर मिली 30 दिन की छूट का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि सरकार उस छूट का विस्तार चाहती है — और पूछा कि देश को 'अनुमति' माँगने की स्थिति में क्यों पहुँचाया गया। खड़गे ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया और कांग्रेस के सवालों को नकारा गया।
गौरतलब है कि अमेरिकी प्रतिबंध-व्यवस्था के तहत रूसी तेल खरीद की अनुमति का विषय भारत की ऊर्जा कूटनीति में संवेदनशील बिंदु बना हुआ है।
टैक्स और महंगाई पर विपक्ष का सवाल
खड़गे ने यह भी आरोप लगाया कि जब अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम कम थे, तब सरकार ने आम जनता को राहत देने की बजाय ईंधन करों से 10 वर्षों में ₹43 लाख करोड़ की कमाई की। उन्होंने पूछा कि इतनी बड़ी वसूली के बावजूद अब महंगाई का बोझ जनता पर क्यों डाला जा रहा है।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान सरकार 'सब सामान्य है' का भाव दिखाती है, लेकिन जब संकट गहराता है तो 'ईंधन बचाने' की अपील की जाती है — जो आलोचकों के अनुसार ठोस नीतिगत कार्रवाई का विकल्प नहीं है।
आगे क्या
विपक्ष की यह आक्रामक मुद्रा संसद के आगामी सत्र में ईंधन मूल्यवृद्धि को केंद्रीय मुद्दा बना सकती है। राहुल गांधी के अनुसार आने वाले समय में तेल कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है, जो घरेलू बजट और कृषि लागत दोनों को प्रभावित कर सकती है।