ईंधन महंगाई पर एनडीए नेताओं का बयान: वैश्विक संकट जिम्मेदार, PM मोदी ने हटाया विशेष उत्पाद शुल्क
सारांश
मुख्य बातें
पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के वरिष्ठ नेताओं ने 15 मई को स्पष्ट किया कि यह वृद्धि वैश्विक कच्चे तेल बाजार में आई अस्थिरता का परिणाम है। नेताओं के अनुसार, सरकार आम जनता पर पड़ने वाले बोझ को कम करने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठा रही है, जिसमें विशेष उत्पाद शुल्क हटाना और ईंधन खपत में कटौती की अपील शामिल है।
मंत्री का बयान: भंडार पर नजर, राहत के प्रयास जारी
केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा, 'मौजूदा वैश्विक हालात की वजह से ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। सरकार और संबंधित एजेंसियाँ जनता को राहत देने की कोशिश कर रही हैं। हालाँकि संकट है और लोगों पर इसका कुछ असर पड़ना लाजिमी है, लेकिन भारत के पास पेट्रोलियम भंडार हैं, जिन पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। हालात को संभालने के लिए जरूरी कदम उठाने पर भी विचार किया जा रहा है।'
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष: उत्पाद शुल्क हटाया, खपत घटाने की अपील
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि पिछले कई महीनों से वैश्विक संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने बताया, 'पेट्रोलियम उत्पादों पर पड़ने वाला बोझ अभी तक बहुत ज्यादा नहीं बढ़ा है। इसी के चलते प्रधानमंत्री ने विशेष उत्पाद शुल्क हटा दिया है और पूरे देश के लोगों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने की अपील की है।' सरावगी ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री ने खुद अपने सरकारी काफिले में वाहनों का इस्तेमाल कम कर दिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर सरकार पहले ही एक सर्वदलीय बैठक बुला चुकी है, जिसमें सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। उनके अनुसार, 'यह वैश्विक संकट पिछले कई महीनों से जारी है। भारत ने इस मामले में सहयोग और समझदारी दिखाई।'
उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष: ईरान-अमेरिका तनाव बना कारण
उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि खासकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार प्रभावित हुआ है और इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ा है। उन्होंने कहा, 'अमेरिका जैसे विकसित देशों में भी कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ी हैं। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सोच का ही नतीजा है कि इन वैश्विक दबावों के बावजूद भारत में ईंधन की कीमतें उतनी तेजी से नहीं बढ़ी हैं, जितनी दूसरी जगहों पर बढ़ी हैं।'
महाना ने यह भी याद दिलाया कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें पहले भी एक ही साल में तेजी से बढ़ चुकी हैं। उन्होंने इसे 'राष्ट्र प्रथम' का मामला बताते हुए कहा कि यह किसी पार्टी या सरकार का विषय नहीं है।
आम जनता पर असर और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊँची बनी हुई हैं और ईंधन महंगाई का सीधा असर परिवहन लागत, किराने के सामान की कीमतों और आम घरेलू बजट पर पड़ रहा है। गौरतलब है कि सरकार द्वारा विशेष उत्पाद शुल्क हटाना एक तात्कालिक राहत उपाय है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए वैश्विक तेल कीमतों में स्थिरता जरूरी होगी। आने वाले हफ्तों में सरकार की ओर से और राहत उपायों की घोषणा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।