पड़ोसी देशों में ईंधन 40% महंगा, भारत में केवल ₹3 की बढ़ोतरी: गुलाम अली खटाना
सारांश
मुख्य बातें
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सदस्य गुलाम अली खटाना ने 15 मई 2026 को कहा कि वैश्विक संकट और खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध के बावजूद भारत में ईंधन की कीमतें पड़ोसी देशों की तुलना में बहुत कम बढ़ी हैं। उनके अनुसार, यह केंद्र सरकार की सोची-समझी नीति का परिणाम है।
खटाना का तुलनात्मक तर्क
गुलाम अली खटाना ने कहा, 'कुछ देशों में कीमतें 25 प्रतिशत तक बढ़ी हैं, कहीं 40 प्रतिशत और कहीं 30 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है। यह सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बेहतर प्रबंधन क्षमता का परिणाम है कि भारत में जनता पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ने दिया गया।' उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और पूरी कैबिनेट, विशेषकर ऊर्जा मंत्रालय, लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
वैश्विक संदर्भ और भारत की स्थिति
BJP प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने भी इस मुद्दे पर कहा कि अमेरिका, ईरान, इज़रायल और खाड़ी क्षेत्र के संघर्षों के कारण दुनिया भर में तेल और गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। उन्होंने कहा, 'दुनिया के कई देशों में ईंधन और गैस की कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं, लेकिन भारत में केवल ₹3 की बढ़ोतरी हुई है। भारत सरकार की कोशिश है कि आम जनता पर कम से कम बोझ पड़े।'
एनडीए नेताओं की प्रतिक्रिया
राज्यसभा सदस्य मेधा कुलकर्णी ने प्रधानमंत्री मोदी की 'वर्क फ्रॉम होम' और ईंधन बचत की अपील का समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'यह केवल भारत की समस्या नहीं है। दुनिया के कई देश इस संकट से प्रभावित हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों से सहयोग की अपील की है।' उनके अनुसार, प्रधानमंत्री ने देशवासियों से सात महत्वपूर्ण अपीलें की हैं।
बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि सरकार ने बेहद मजबूरी और कठिन परिस्थितियों में यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा, 'पूरी दुनिया में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें बढ़ रही हैं और इसी वजह से महंगाई भी बढ़ रही है। खाड़ी क्षेत्र में युद्ध चल रहा है, जहाँ से तेल की आपूर्ति होती है — इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।'
भारत की वैश्विक स्थिति पर जोर
गुलाम अली खटाना ने कहा कि 2014 के बाद भारत ने दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनके अनुसार, भारत अब संकट से उबरकर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यूरोपीय संघ, अमेरिका, रूस और मध्य-पूर्व के देश अब भारत में निवेश करना चाहते हैं — जिसे उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति और नेतृत्व का परिणाम बताया।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं और खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं हैं। सरकार की ओर से फिलहाल यही संकेत मिल रहे हैं कि ईंधन कीमतों पर नजर रखी जाएगी और जनता पर अतिरिक्त बोझ न पड़े, इसके लिए प्रयास जारी रहेंगे।