करण जौहर ने सोशल मीडिया से पहले के दिनों को किया याद, लिखा भावुक नोट
सारांश
मुख्य बातें
फिल्म निर्माता करण जौहर ने 15 मई 2026 को अपनी सोशल मीडिया स्टोरी पर एक भावुक संदेश साझा कर उस दौर को याद किया, जब डिजिटल दुनिया का अस्तित्व नहीं था। इस पोस्ट में उन्होंने सोशल मीडिया से पहले की ज़िंदगी की सादगी और उसकी गर्माहट को शब्दों में पिरोया।
क्या लिखा करण ने अपनी पोस्ट में
करण जौहर ने अपनी स्टोरी में लिखा, 'कभी-कभी मैं सोशल मीडिया से पहले के उन दिनों को प्यार और चाहत के साथ याद करता हूं... जब पोस्ट करने का मतलब पत्र-पेटी में चिट्ठी डालना होता था, जब स्क्रॉल करने का मतलब कोई किताब या नोटबुक पढ़ना होता था, जब फॉलोअर्स किसी नेक काम या किसी गुरु के लिए होते थे, जब 'लाइक्स' का मतलब सच्ची तारीफ होती थी, जब 'ग्राम' सिर्फ वजन की एक इकाई होती थी, कोई बोझ नहीं। क्या दिन थे वो...' यह संदेश सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गया और लाखों लोगों ने इससे खुद को जोड़ा।
करण जौहर का सफ़रनामा
बॉलीवुड में करण जौहर को सबसे प्रभावशाली फिल्म निर्माताओं, निर्देशकों और टॉक शो होस्ट में गिना जाता है। उन्होंने अपने दिवंगत पिता यश जौहर द्वारा स्थापित धर्मा प्रोडक्शंस को भारतीय मनोरंजन जगत के सबसे बड़े बैनरों में से एक के रूप में विकसित किया।
निर्देशन की दुनिया में उनका पहला कदम 'कुछ कुछ होता है' से हुआ, जिसके बाद 'कभी खुशी कभी गम', 'कभी अलविदा ना कहना', 'माय नेम इज खान' और 'रॉकी और रानी की प्रेम कहानी' जैसी कई बड़ी फिल्में उनके नाम दर्ज हैं। इससे पहले उन्होंने आदित्य चोपड़ा की सुपरहिट 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' में सहायक निर्देशक के रूप में काम किया था और इस फिल्म में एक छोटी भूमिका भी निभाई थी।
धर्मा प्रोडक्शंस की विरासत
करण के पिता यश जौहर ने 'दोस्ताना', 'अग्निपथ', 'डुप्लीकेट' और 'कल हो ना हो' जैसी यादगार फिल्मों का निर्माण किया। यश जौहर की दूरदृष्टि और सिनेमा के प्रति जुनून ने ही धर्मा प्रोडक्शंस की नींव रखी, जिसे करण ने आगे बढ़ाकर एक बड़ा साम्राज्य खड़ा किया।
कॉफी विद करण और निजी जीवन
फिल्मों के अलावा करण जौहर लगभग दो दशकों से अपने मशहूर सेलिब्रिटी चैट शो 'कॉफी विद करण' के ज़रिए दर्शकों के दिलों में घर किए हुए हैं। निजी जीवन में वे अपने जुड़वा बच्चों यश और रूही जौहर के गौरवान्वित पिता हैं।
यह भावुक पोस्ट इस बात की याद दिलाती है कि डिजिटल युग की चकाचौंध में भी अनेक लोग उस सरल दौर को मिस करते हैं जब ज़िंदगी स्क्रीन से परे थी।