पटना 'ब्लैकआउट' में व्यापारी की गोली मारकर हत्या, तेजस्वी यादव बोले — सरकार अपराधियों की सहयोगी
सारांश
मुख्य बातें
पटना के सुल्तानगंज थाना क्षेत्र में 15 मई 2026 की शाम राज्यव्यापी 'ब्लैकआउट' मॉक ड्रिल के दौरान अपराधियों ने एक व्यापारी की गोली मारकर हत्या कर दी। बिजली गुल होने के महज 5 मिनट के भीतर हुई इस वारदात के बाद अंधेरे का फायदा उठाकर सभी आरोपी फरार हो गए। इस घटना ने बिहार में कानून-व्यवस्था पर तीखी राजनीतिक बहस छेड़ दी है।
मॉक ड्रिल का विवरण और घटनाक्रम
आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारी के तहत बिहार के 6 जिलों — जिनमें पटना भी शामिल था — में गुरुवार शाम 7 बजे सायरन बजाकर बिजली आपूर्ति बंद की गई। 7 बजकर 15 मिनट पर बिजली बहाल कर दी गई। यह 15 मिनट का अंधकार ही अपराधियों के लिए 'सुनहरा मौका' बन गया।
जाँच में सामने आया कि अपराधियों ने पहले से घात लगाकर व्यापारी को निशाना बनाया था। वारदात के तुरंत बाद अंधेरे की आड़ में सभी आरोपी मौके से भाग निकले। घायल व्यापारी को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनकी मृत्यु हो गई। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच में जुटी है।
तेजस्वी यादव का सरकार पर हमला
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'बिहार में अधिकृत तौर पर सरकार अपराधियों की सहयोगी बन चुकी है। सरकार ने ब्लैकआउट किया और पटना में इस ब्लैकआउट को सुनहरे अवसर में परिवर्तित करते हुए अपराधियों ने एक व्यापारी को गोली मार दी।'
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता ने आगे सवाल उठाया, 'जिस सरकार को अपराध रोकने और अपराधियों को पकड़ने के लिए चुना गया था, वो सरकार अपराधियों की सहयोगी कैसे बन गई?' उन्होंने माँग की कि इस हत्याकांड की उच्चस्तरीय जाँच हो और यह भी जाँचा जाए कि अपराधियों व सरकार में बैठे लोगों के बीच कोई सांठगांठ तो नहीं थी।
उठाए गए गंभीर सवाल
तेजस्वी यादव ने अपनी एक्स पोस्ट में तीन मुख्य बिंदु रखे — पहला, अपराधियों ने ब्लैकआउट को साजिश के अवसर के रूप में कैसे चुना; दूसरा, इतनी कम समयावधि में हत्या को सफलतापूर्वक अंजाम कैसे दिया गया; और तीसरा, सरकार की इस 'चूक' की समीक्षा होनी चाहिए।
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में कानून-व्यवस्था का मुद्दा पहले से ही राजनीतिक केंद्र में है। गौरतलब है कि राज्य में ब्लैकआउट जैसी ड्रिल आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित की जाती है — लेकिन इस बार यह खुद सुरक्षा का सवाल बन गई।
सरकार की प्रतिक्रिया और जाँच की स्थिति
अब तक बिहार सरकार की ओर से इस हत्याकांड पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पुलिस ने पुष्टि की है कि घटना की जाँच जारी है, लेकिन किसी गिरफ्तारी की सूचना अभी तक नहीं मिली है।
आगे क्या होगा
विपक्ष की माँग है कि सरकार न केवल हत्यारों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करे, बल्कि ब्लैकआउट ड्रिल की सुरक्षा-खामियों की भी स्वतंत्र समीक्षा कराए। यदि जाँच में किसी प्रकार की प्रशासनिक लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है, तो यह मामला बिहार की राजनीति में और गहरा असर डाल सकता है।