मोदी की ईंधन बचत अपील का गुजरात में असर, दो दिनों में पायलट वाहन कॉल्स में 126 की कमी
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन संरक्षण और सरकारी यात्राएँ सीमित करने की अपील का गुजरात में ठोस असर दिखा है। 15 मई 2026 को गांधीनगर में राज्य सरकार ने पुष्टि की कि बीते दो दिनों में गृह विभाग को पायलट वाहन के लिए आने वाली कॉल्स में 126 की कमी दर्ज की गई है। यह गिरावट मोदी की उस सार्वजनिक अपील के बाद सामने आई है जिसमें उन्होंने नागरिकों और प्रशासनिक तंत्र से पेट्रोल-डीजल की खपत घटाने का आग्रह किया था।
मुख्य घटनाक्रम
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने शुक्रवार को कैबिनेट बैठक से पूर्व मीडिया को बताया कि पायलट वाहनों की संख्या घटाने से ईंधन उपयोग और मैनपावर दोनों में उल्लेखनीय बचत हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने अनावश्यक आवाजाही पर रोक के प्रयास भी तेज कर दिए हैं।
संघवी ने कहा, 'कुल मिलाकर दो दिनों में 126 कॉल्स की कमी आई है।' उनके अनुसार यदि प्रति कॉल औसतन 25 से 50 किलोमीटर की दूरी मानी जाए, तो यह कमी कम से कम 5,000 किलोमीटर के बराबर पेट्रोल और डीजल की बचत में तब्दील होती है।
बचत का आकलन और रिपोर्ट
संघवी ने बताया कि इस बचत का विस्तृत विश्लेषण करते हुए एक औपचारिक रिपोर्ट तैयार की जा रही है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि हर पायलट वाहन की तैनाती में कई कर्मचारी संलग्न होते हैं — अब उन्हें अन्य उत्पादक कार्यों में लगाया जा सकता है, जिससे मानव-संसाधन का बेहतर उपयोग संभव होगा।
सरकार की प्रतिक्रिया और बदलाव
मोदी की अपील के बाद गुजरात के प्रशासनिक ढाँचे में कई बदलाव लागू किए गए हैं। मंत्रियों ने अपने काफिले का आकार घटाया है और विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि जहाँ व्यावहारिक हो, वे वर्चुअल बैठकें आयोजित करें। संघवी के शब्दों में, 'दूर के शहरों से गांधीनगर तक की अनावश्यक यात्रा करने से लोगों को रोका गया है।'
PM मोदी की मूल अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में नागरिकों और सरकारी तंत्र से आग्रह किया था कि वे पेट्रोल-डीजल की खपत कम करें, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाएँ, कारपूलिंग अपनाएँ और जहाँ संभव हो, बैठकें ऑनलाइन माध्यम से करें। यह अपील ऐसे समय में आई जब ईंधन की वैश्विक कीमतों और आयात-निर्भरता को लेकर नीतिगत चर्चाएँ तेज हो रही हैं।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि गुजरात सरकार की यह पहल एक व्यापक राष्ट्रीय ऊर्जा-संरक्षण संदेश का हिस्सा है। बचत पर तैयार होने वाली औपचारिक रिपोर्ट अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है। प्रशासनिक सुधारों की यह श्रृंखला आगे भी जारी रहने की उम्मीद है।