गुजरात में 300 नई बसें बिना उद्घाटन समारोह सीधे सड़कों पर, ईंधन बचत अभियान को मिला बल

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गुजरात में 300 नई बसें बिना उद्घाटन समारोह सीधे सड़कों पर, ईंधन बचत अभियान को मिला बल

सारांश

गुजरात सरकार ने PM मोदी की ईंधन बचत अपील पर अमल करते हुए 300 नई बसें बिना किसी उद्घाटन समारोह के सीधे सड़कों पर उतार दीं — कोई काफिला नहीं, कोई मंच नहीं, सिर्फ जनसेवा। यह प्रतीकात्मक कदम BJP शासित राज्यों में चल रहे व्यापक ईंधन संरक्षण अभियान का हिस्सा है।

मुख्य बातें

गुजरात सरकार ने 17 मई 2025 को 300 नई बसें बिना किसी भौतिक या आभासी उद्घाटन समारोह के सीधे जनसेवा में उतारीं।
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि केंद्रीकृत आयोजन से बचने से ईंधन, समय और सार्वजनिक धन की बचत होगी।
यह कदम PM नरेंद्र मोदी की उस अपील के बाद आया जिसमें उन्होंने सार्वजनिक परिवहन, कारपूलिंग और वर्चुअल बैठकों को प्राथमिकता देने को कहा था।
गुजरात में मंत्रियों के काफिले छोटे किए गए, पुलिस एस्कॉर्ट सीमित और वर्चुअल बैठकें बढ़ाई गईं।
अहमदाबाद-गांधीनगर मार्ग पर सरकारी अधिकारियों को कारपूलिंग अपनाने के निर्देश दिए गए।

गुजरात सरकार ने शनिवार, 17 मई 2025 को 300 नई सार्वजनिक बसें बिना किसी भौतिक या आभासी उद्घाटन समारोह के सीधे अपने निर्धारित केंद्रों से जनसेवा में उतार दीं। उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने शुक्रवार को पत्रकारों को बताया कि यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के अनुरूप लिया गया है जिसमें उन्होंने नागरिकों और सरकारों से अनावश्यक ईंधन खपत कम करने का आग्रह किया था। बसें सुबह 10 बजे IST से परिचालन में आ गईं।

बिना समारोह के तैनाती — क्या है योजना

उपमुख्यमंत्री संघवी ने स्पष्ट किया कि विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी केंद्रीकृत आयोजन नहीं होगा। उन्होंने कहा, 'विभाग को सूचित कर दिया गया है कि कोई भी भौतिक या आभासी कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा। जन परिवहन के लिए उपयोग की जाने वाली ये बसें सीधे जनसेवा के लिए खोल दी जाएंगी।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि 'बसें एक जगह इकट्ठा नहीं होंगी, बल्कि सीधे केंद्रों पर भेजी जाएंगी। इससे ईंधन, समय और धन की बचत होगी।'

संघवी ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा, '300 नई बसें सीधे गुजरात की जनता की सेवा में लगाई जाएंगी। कोई उद्घाटन नहीं, कोई समारोह नहीं, कोई ईंधन खर्च नहीं, क्योंकि पीएम मोदी ने देश से ईंधन की हर बूंद बचाने की अपील की है। 300 बसें। जीरो समारोह। जनता की 100% सेवा।'

PM मोदी की अपील और राज्यों की प्रतिक्रिया

यह कदम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा अनिश्चितता और तेल की बढ़ती कीमतों के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ दिन पहले ही नागरिकों और सरकारों से सार्वजनिक परिवहन, कारपूलिंग और वर्चुअल बैठकों को प्राथमिकता देने की अपील की थी। गौरतलब है कि इस अपील के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित कई राज्यों ने तत्परता से कदम उठाए हैं।

गुजरात में मंत्रियों ने अपने काफिले का आकार घटाया है, पुलिस एस्कॉर्ट वाहनों का उपयोग सीमित किया गया है और वर्चुअल बैठकों पर निर्भरता बढ़ाई गई है। राज्यपाल ने भी जहाँ संभव हो, ट्रेनों और राज्य परिवहन बसों से यात्रा को प्राथमिकता देने का संकेत दिया है। अहमदाबाद और गांधीनगर के बीच यात्रा करने वाले सरकारी अधिकारियों को कारपूलिंग और कार-शेयरिंग अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।

सार्वजनिक परिवहन को मज़बूत करने का उद्देश्य

संघवी के अनुसार, 300 बसें जोड़ने का निर्णय केवल ईंधन बचत तक सीमित नहीं है — इसका व्यापक उद्देश्य नागरिकों को निजी वाहनों के विकल्प के रूप में एक सुलभ और किफायती सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराना है। विभागों को शहरों और जिलों में यात्रियों के लिए सेवा में सुधार के निर्देश दिए गए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं हाल की यात्राओं में अपने काफिले का आकार कम किया है। कई केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने भी इसी तरह के उपाय अपनाए हैं, जो इस राष्ट्रव्यापी ईंधन संरक्षण अभियान का हिस्सा बताए जा रहे हैं।

आगे क्या

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के प्रतीकात्मक कदम दीर्घकालिक नीतिगत बदलावों में तब्दील हों — जैसे कि सार्वजनिक परिवहन बेड़े का व्यवस्थित विस्तार और ईंधन-दक्ष वाहनों की खरीद — तो ये अभियान वास्तविक असर दिखा सकते हैं। फिलहाल, गुजरात का यह कदम देश के अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह अभियान महज़ राजनीतिक संदेश तक सीमित रहेगा या दीर्घकालिक नीति में बदलेगा। भारत के सार्वजनिक परिवहन बेड़े में वर्षों से निवेश की कमी रही है और एक बार की बस-तैनाती से संरचनात्मक बदलाव नहीं आता। यदि ईंधन संरक्षण वास्तव में प्राथमिकता है, तो राज्यों को इलेक्ट्रिक बस खरीद, रूट-युक्तिकरण और यात्री सुविधाओं में निरंतर निवेश का रोडमैप पेश करना होगा। अभी के लिए, यह कदम अच्छी नीयत का संकेत है — पर्याप्त नीति का नहीं।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात में 300 नई बसें बिना उद्घाटन के क्यों उतारी गईं?
PM मोदी की ईंधन बचत अपील के बाद गुजरात सरकार ने तय किया कि बसों को एक स्थान पर इकट्ठा कर औपचारिक समारोह करने की बजाय सीधे उनके निर्धारित केंद्रों से जनसेवा में लगाया जाए। उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के अनुसार, इससे ईंधन, समय और सार्वजनिक धन तीनों की बचत होती है।
PM मोदी ने ईंधन बचत की अपील क्यों की?
वैश्विक ऊर्जा अनिश्चितता और तेल की बढ़ती कीमतों के बीच PM मोदी ने नागरिकों और सरकारों से अनावश्यक ईंधन खपत कम करने का आग्रह किया। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन, कारपूलिंग, वर्चुअल बैठकों और गैर-जरूरी यात्रा में संयम बरतने पर ज़ोर दिया।
गुजरात में ईंधन बचत अभियान के तहत और क्या कदम उठाए गए हैं?
गुजरात में मंत्रियों ने काफिले का आकार कम किया है, पुलिस एस्कॉर्ट वाहनों का उपयोग सीमित किया गया है और वर्चुअल बैठकों पर निर्भरता बढ़ाई गई है। अहमदाबाद-गांधीनगर मार्ग पर अधिकारियों को कारपूलिंग अपनाने के निर्देश दिए गए हैं और राज्यपाल ने भी ट्रेन व राज्य बसों से यात्रा को प्राथमिकता देने का संकेत दिया है।
300 नई बसें किन शहरों या मार्गों पर चलाई जाएंगी?
उपमुख्यमंत्री संघवी के अनुसार बसें सीधे उनके निर्धारित केंद्रों पर भेजी गई हैं और विभागों को शहरों व जिलों में यात्री सेवा सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। विशिष्ट मार्गों का आधिकारिक विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
क्या अन्य BJP शासित राज्य भी ऐसे कदम उठा रहे हैं?
हाँ, रिपोर्टों के अनुसार PM मोदी की अपील के बाद गुजरात सहित अन्य BJP शासित राज्यों में भी इसी तरह के उपाय किए गए हैं। कई केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने काफिले का आकार घटाने और वर्चुअल बैठकें बढ़ाने जैसे कदम उठाए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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