29 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पीएम मोदी की ईंधन बचत अपील पर सूरत के IT युवाओं का अमल, कारपूलिंग और WFH बना राष्ट्रसेवा का ज़रिया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पीएम मोदी की ईंधन बचत अपील पर सूरत के IT युवाओं का अमल, कारपूलिंग और WFH बना राष्ट्रसेवा का ज़रिया

सारांश

पीएम मोदी की ईंधन बचत की अपील सूरत के IT दफ्तरों में असली बदलाव बन गई है — बिज़ इनसाइट्स ने 70% स्टाफ को WFH दिया, युवा कर्मचारी कारपूलिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपना रहे हैं। छोटे शहरों से बड़े संदेश की यह मिसाल कॉर्पोरेट भारत के लिए एक नई कार्यसंस्कृति की शुरुआत हो सकती है।

मुख्य बातें

बिज़ इनसाइट्स के सीईओ कुणाल शाह ने 70% स्टाफ को वर्क फ्रॉम होम देकर ईंधन खपत में कमी की।
बारडोली से सूरत आने वाली जैस्मीन परमार सहित कई IT युवा कारपूलिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपना रहे हैं।
पहल से ट्रैफिक, प्रदूषण में कमी और कर्मचारियों का बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस सामने आया है।
कंपनी बेरोज़गार युवाओं को फ्रीलांसिंग के ज़रिए काम देकर आर्थिक गतिविधियाँ जारी रख रही है।
कई अन्य गुजरात की आईटी कंपनियाँ भी इस मॉडल को अपनाने की तैयारी में हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन संरक्षण और राष्ट्रसेवा की अपील को सूरत सहित गुजरात के आईटी क्षेत्र ने ज़मीनी स्तर पर लागू करना शुरू कर दिया है। 14 मई 2025 को सामने आई इस पहल में आईटी कंपनियों ने 'वर्क फ्रॉम होम' और 'कारपूलिंग' को राष्ट्रहित के व्यावहारिक उपकरण के रूप में अपनाया है। यह बदलाव न केवल ईंधन की खपत घटा रहा है, बल्कि शहरी यातायात और प्रदूषण में भी उल्लेखनीय कमी ला रहा है।

कंपनियों ने उठाए ठोस कदम

आईटी कंपनी बिज़ इनसाइट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कुणाल शाह ने बताया कि प्रधानमंत्री की अपील को गंभीरता से लेते हुए कंपनी ने बड़ा बदलाव किया है। उन्होंने कहा, 'हमने अपने लगभग 70 प्रतिशत स्टाफ को वर्क फ्रॉम होम दे दिया है। केवल क्रिटिकल प्रोजेक्ट्स पर काम करने वाले कर्मचारियों को ही ऑफिस बुलाया जा रहा है। इससे न सिर्फ कर्मचारियों का समय बच रहा है, बल्कि ईंधन की खपत में भी काफी कमी आई है।'

शाह ने यह भी बताया कि इस समय प्रतिस्पर्धा से ऊपर उठकर एक-दूसरे की मदद करने की ज़रूरत है। कंपनी उन युवाओं को फ्रीलांसिंग के ज़रिए काम दे रही है जिनके पास वर्तमान में रोज़गार नहीं है, ताकि आर्थिक गतिविधियाँ जारी रहें।

युवाओं की ज़मीनी भागीदारी

आईटी क्षेत्र में कार्यरत युवा भी इस मुहिम में पूरी ताकत से जुड़ गए हैं। बारडोली से सूरत ऑफिस आने-जाने वाली जैस्मीन परमार ने बताया, 'अब मैं पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करती हूँ या सहयोगियों के साथ कारपूलिंग करती हूँ। इससे पेट्रोल की बचत हो रही है।'

ध्रुवी ने बताया कि परिवार में अब यह चर्चा होती है कि अगर एक ही रूट पर जाना हो तो अलग-अलग गाड़ियों की बजाय एक ही गाड़ी का उपयोग किया जाए। उनके अनुसार, 'छोटे-छोटे बदलाव से देश के संसाधनों की बचत हो रही है।'

इंटर्न कार्तिक ने कहा कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट या कारपूलिंग से न सिर्फ व्यक्तिगत खर्च कम होता है, बल्कि देश का ईंधन भी बचता है। उन्होंने बताया कि अब ऑफिस के अलावा वॉटर पार्क जैसी निजी यात्राओं के लिए भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता दी जा रही है।

आम जनता और पर्यावरण पर असर

आईटी कंपनियों का यह बदलाव केवल ईंधन बचत तक सीमित नहीं है। इससे शहर में यातायात का दबाव कम हो रहा है, वायु प्रदूषण में भी कमी दर्ज की जा रही है और कर्मचारियों का वर्क-लाइफ बैलेंस बेहतर हो रहा है। गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब देश में ऊर्जा संरक्षण को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता अभियान चल रहे हैं।

क्या होगा आगे

कई अन्य आईटी कंपनियाँ भी इस मॉडल को अपनाने की तैयारी में हैं। यदि यह प्रवृत्ति व्यापक होती है, तो यह कॉर्पोरेट भारत में ईंधन संरक्षण की एक दीर्घकालिक कार्यसंस्कृति की नींव रख सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि WFH और कारपूलिंग का संयोजन शहरी भारत में कार्बन उत्सर्जन घटाने का एक सस्ता और प्रभावी तरीका साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी देखना होगा कि यह बदलाव नीति-संचालित है या केवल जनभावना की लहर पर सवार। WFH और कारपूलिंग की क्षमता तो सिद्ध है — अंतरराष्ट्रीय अध्ययन बताते हैं कि ये शहरी ईंधन खपत में 15-30% तक कमी ला सकते हैं — लेकिन बिना संस्थागत ढाँचे के यह उत्साह अल्पकालिक रह सकता है। असली परीक्षा यह है कि क्या कंपनियाँ इसे स्थायी नीति बनाती हैं या यह केवल राष्ट्रीय संकट के दौर की अस्थायी प्रतिक्रिया है।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरत के IT सेक्टर ने पीएम मोदी की ईंधन बचत अपील पर क्या कदम उठाए?
सूरत की आईटी कंपनियों ने 70% स्टाफ को वर्क फ्रॉम होम देकर और कारपूलिंग को बढ़ावा देकर ईंधन खपत घटाई है। बिज़ इनसाइट्स जैसी कंपनियों ने केवल क्रिटिकल प्रोजेक्ट वाले कर्मचारियों को ही ऑफिस बुलाने का फैसला किया है।
कारपूलिंग और WFH से ईंधन बचत के अलावा और क्या फायदे हो रहे हैं?
इन उपायों से शहर में यातायात का दबाव कम हुआ है, वायु प्रदूषण में कमी आई है और कर्मचारियों का वर्क-लाइफ बैलेंस बेहतर हुआ है। व्यक्तिगत खर्च में भी बचत हो रही है।
बिज़ इनसाइट्स ने बेरोज़गार युवाओं के लिए क्या किया?
कंपनी के सीईओ कुणाल शाह के अनुसार, बिज़ इनसाइट्स उन युवाओं को फ्रीलांसिंग के ज़रिए काम दे रही है जिनके पास वर्तमान में रोज़गार नहीं है, ताकि आर्थिक गतिविधियाँ जारी रहें।
क्या अन्य गुजरात की IT कंपनियाँ भी यह मॉडल अपनाएँगी?
रिपोर्टों के अनुसार, कई अन्य आईटी कंपनियाँ भी WFH और कारपूलिंग मॉडल को अपनाने की तैयारी में हैं। यह पहल गुजरात के IT हब में एक व्यापक कार्यसंस्कृति बदलाव की शुरुआत हो सकती है।
पीएम मोदी ने ईंधन बचत की अपील क्यों की?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रसेवा और ऊर्जा संरक्षण के संदर्भ में नागरिकों और कंपनियों से ईंधन की खपत कम करने की अपील की थी। यह अपील राष्ट्रीय संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की व्यापक नीतिगत दिशा का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले