गडकरी बस से निकले पुणे दौरे पर, बोले— 'पेट्रोल-डीजल बचाना आज की ज़रूरत'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार, 14 मई 2026 को पुणे में संत ज्ञानेश्वर मौली महाराज पालकी मार्ग का निरीक्षण किया। खास बात यह रही कि उन्होंने अपने सरकारी काफिले की जगह बस से यात्रा की — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत अपील के प्रति एकजुटता का यह एक सार्वजनिक संकेत था। गडकरी ने स्पष्ट किया कि यह कदम महज प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि एक सुविचारित नीतिगत प्रतिबद्धता है।
गडकरी का बयान और वैकल्पिक ऊर्जा पर ज़ोर
निरीक्षण के दौरान गडकरी ने कहा, 'हमारा लक्ष्य प्रदूषण को खत्म करना और देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है। यह सपना धीरे-धीरे साकार हो रहा है। लेकिन मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और वैश्विक संकट को देखते हुए हमें पेट्रोल और डीजल की बचत करनी चाहिए। इसी वजह से प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील की है।'
उन्होंने बताया कि वह वर्ष 2004 से इथेनॉल, मेथनॉल, बायोडीजल, एलएनजी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे वैकल्पिक ईंधनों पर काम कर रहे हैं। गडकरी के अनुसार, देश का पहला इलेक्ट्रिक स्कूटर, इलेक्ट्रिक कार, ट्रक और बस उनके नेतृत्व में लॉन्च हुई है। अब कृषि मशीनरी और ट्रैक्टर भी इस दायरे में लाए जा रहे हैं।
गडकरी ने दावा किया कि आने वाले समय में वैकल्पिक ऊर्जा क्षेत्र में लगभग ₹2 लाख करोड़ की नई अर्थव्यवस्था तैयार होगी, जिससे भारत ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता की ओर तेज़ी से बढ़ेगा।
पीएम मोदी की अपील की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य-पूर्व में जारी तनाव और वैश्विक ईंधन आपूर्ति पर पड़ रहे दबाव को देखते हुए देशवासियों से पेट्रोल-डीजल का विवेकपूर्ण उपयोग करने की अपील की थी। इसके साथ ही उन्होंने एक वर्ष तक सोना न खरीदने, खाने के तेल का कम उपयोग करने और अनावश्यक विदेश यात्राएँ टालने की सलाह भी दी थी।
रिपोर्टों के अनुसार, स्वयं प्रधानमंत्री ने अपने काफिले में शामिल गाड़ियों की संख्या लगभग आधी कर दी है और इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ाने पर ज़ोर दिया है। यह भी निर्देश दिए गए हैं कि नए वाहन खरीदने के बजाय मौजूदा संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जाए।
राज्यों और केंद्रीय मंत्रियों की पहल
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों ने अपने काफिलों में वाहनों की संख्या घटाने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय मंत्री सी. आर. पाटिल ने एस्कॉर्ट वाहन न लेने का फैसला किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी अपने काफिले में कटौती की है।
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व संकट के गहराने के बाद केंद्र सरकार के कई मंत्रालय ईंधन बचत से जुड़े उपायों पर अमल शुरू कर चुके हैं। सरकार का फोकस वैकल्पिक ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और कम ईंधन खपत वाले परिवहन साधनों को बढ़ावा देने पर केंद्रित हो गया है।
आम जनता पर असर और आगे की राह
गडकरी ने स्पष्ट किया कि ईंधन बचत केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी व्यवस्थाओं में कटौती की है और यही संदेश आम जनता तक पहुँचाना चाहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की यह प्रवृत्ति नीतिगत स्तर पर स्थायी रूप ले, तो इससे शहरी ईंधन खपत में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।