मुंबई एयरपोर्ट पर डीआरआई की बड़ी कार्रवाई: ₹5.70 करोड़ के 1,624 कैरेट हीरे जब्त, दो तस्कर गिरफ्तार

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मुंबई एयरपोर्ट पर डीआरआई की बड़ी कार्रवाई: ₹5.70 करोड़ के 1,624 कैरेट हीरे जब्त, दो तस्कर गिरफ्तार

सारांश

मुंबई हवाई अड्डे पर डीआरआई ने दो यात्रियों के शरीर के भीतर छिपे कैप्सूल से ₹5.70 करोड़ के 1,624 कैरेट हीरे बरामद किए — प्राकृतिक और लैब-निर्मित दोनों। यह कार्रवाई एक बड़े अंतर्राष्ट्रीय तस्करी सिंडिकेट की जाँच का हिस्सा है, जिसके मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।

मुख्य बातें

डीआरआई मुंबई ने 14 मई 2026 को CSMI हवाई अड्डे पर ₹5.70 करोड़ से अधिक मूल्य के 1,624 कैरेट हीरे जब्त किए।
दोनों यात्रियों ने शरीर के अंदर दो-दो कैप्सूल में हीरे छिपाए थे — इनमें प्राकृतिक और लैब-निर्मित हीरे शामिल थे।
हीरों को अवैध निर्यात के उद्देश्य से छिपाया गया था; दोनों आरोपियों को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत गिरफ्तार किया गया।
जाँचकर्ताओं के अनुसार इस नेटवर्क के अंतर्राष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े होने के संकेत हैं; सिंडिकेट की पड़ताल जारी है।
इससे पहले 20 अप्रैल को डीआरआई ने न्हावा शेवा बंदरगाह पर ₹139 करोड़ की प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी का भंडाफोड़ किया था।

राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई), मुंबई ने 14 मई 2026 को छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय (CSMI) हवाई अड्डे पर एक बड़े तस्करी-रोधी अभियान में ₹5.70 करोड़ से अधिक मूल्य के 1,624 कैरेट हीरे बरामद किए। विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर की गई इस कार्रवाई में दो यात्रियों को गिरफ्तार किया गया, जिन्होंने हीरे अपने शरीर के भीतर छिपाकर तस्करी करने की कोशिश की थी।

कैसे हुई बरामदगी

डीआरआई अधिकारियों के अनुसार, खास खुफिया सूचना मिलने पर संदिग्ध यात्रियों को हवाई अड्डे पर रोका गया। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने शरीर के अंदर दो-दो कैप्सूल छिपा रखे हैं। बाद में यात्रियों ने वे कैप्सूल बाहर निकाले, जिनमें से प्राकृतिक हीरे और लैब-निर्मित हीरे दोनों बरामद हुए।

अधिकारियों ने बताया कि इन हीरों को जान-बूझकर इस तरह छिपाया गया था ताकि इन्हें अवैध रूप से निर्यात किया जा सके। जब्त हीरों को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के संबंधित प्रावधानों के तहत सरकारी हिरासत में ले लिया गया।

अंतर्राष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग से संभावित कड़ी

डीआरआई ने संकेत दिया है कि यह मामला एक बड़े सिंडिकेट से जुड़ा हो सकता है। जाँचकर्ताओं के अनुसार, कथित तौर पर इस तस्करी नेटवर्क के अंतर्राष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। उस सिंडिकेट को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए आगे की जाँच जारी है।

यह ऐसे समय में आया है जब डीआरआई देशभर में तस्करी-रोधी अभियानों को तेज कर रहा है और संगठित तस्करी नेटवर्क पर शिकंजा कस रहा है।

डीआरआई की हालिया बड़ी कार्रवाइयाँ

गौरतलब है कि यह घटना डीआरआई मुंबई की हालिया कड़ी कार्रवाइयों की श्रृंखला में एक और कड़ी है। इससे पहले 20 अप्रैल को डीआरआई ने न्हावा शेवा बंदरगाह पर एक बड़े मामले का भंडाफोड़ किया था, जिसमें तंजानिया, सूडान और कनाडा से ₹139 करोड़ मूल्य की प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी का पर्दाफाश हुआ था।

उस मामले में 132 कंटेनरों में लगभग 3,029 मीट्रिक टन माल को गलत तरीके से 'तूर दाल/अरहर दाल' घोषित किया गया था। विस्तृत जाँच में सामने आया कि वास्तव में उनमें तंजानिया और सूडान से 2,710 मीट्रिक टन तरबूज के बीज और कनाडा से 319 मीट्रिक टन हरे मटर थे — दोनों पर सरकार ने घरेलू किसानों की सुरक्षा के लिए कड़ी आयात पाबंदियाँ लगाई हैं। उस मामले में आयातक फर्म के मालिक को गिरफ्तार किया गया था।

आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर

डीआरआई के अनुसार, ये कार्रवाइयाँ देश के आर्थिक हितों की रक्षा करने और घरेलू उत्पादकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं। हीरा उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर के भीतर कैप्सूल में हीरे छिपाकर तस्करी करना एक पुराना लेकिन जोखिम भरा तरीका है, जो आमतौर पर संगठित अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क द्वारा अपनाया जाता है।

आगे क्या होगा

दोनों गिरफ्तार आरोपियों के विरुद्ध सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत कार्रवाई की जा रही है। डीआरआई ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधित और निषिद्ध वस्तुओं की तस्करी के खिलाफ खुफिया जानकारी पर आधारित अभियान आगे भी जारी रहेंगे। अंतर्राष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग कड़ियों की पड़ताल के लिए जाँच का दायरा बढ़ाया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ₹5.70 करोड़ की यह बरामदगी और उसके पीछे कथित अंतर्राष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की संभावना यह सवाल उठाती है कि भारत के हीरा व्यापार की निगरानी प्रणाली में कितनी खामियाँ हैं। डीआरआई की हालिया कार्रवाइयाँ — अप्रैल में ₹139 करोड़ की खेप और अब यह मामला — दिखाती हैं कि संगठित तस्करी नेटवर्क एक साथ कई मोर्चों पर सक्रिय हैं। असली परीक्षा यह है कि क्या जाँच एजेंसियाँ केवल निचले स्तर के वाहकों को पकड़ने से आगे बढ़कर उन अंतर्राष्ट्रीय सिंडिकेट के सरगनाओं तक पहुँच पाती हैं जो इन नेटवर्क को संचालित करते हैं।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीआरआई ने मुंबई एयरपोर्ट पर कितने मूल्य के हीरे जब्त किए?
राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने CSMI हवाई अड्डे पर ₹5.70 करोड़ से अधिक मूल्य के 1,624 कैरेट हीरे जब्त किए। इनमें प्राकृतिक और लैब-निर्मित दोनों प्रकार के हीरे शामिल थे।
तस्करों ने हीरे कैसे छिपाए थे?
दोनों आरोपियों ने अपने शरीर के अंदर दो-दो कैप्सूल में हीरे छिपाए थे। पूछताछ के दौरान उन्होंने इसे स्वीकार किया और बाद में कैप्सूल बाहर निकाले, जिनसे हीरे बरामद हुए।
गिरफ्तार आरोपियों पर क्या कार्रवाई होगी?
दोनों आरोपियों को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के संबंधित प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया है। जाँच जारी है और उस सिंडिकेट को ध्वस्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं जिससे ये आरोपी कथित तौर पर जुड़े हैं।
क्या इस तस्करी का अंतर्राष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग से संबंध है?
जाँचकर्ताओं के अनुसार इस तस्करी नेटवर्क के अंतर्राष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। इस कड़ी की पड़ताल के लिए आगे की जाँच जारी है।
डीआरआई मुंबई की हाल की अन्य बड़ी कार्रवाइयाँ कौन-सी हैं?
20 अप्रैल को डीआरआई मुंबई ने न्हावा शेवा बंदरगाह पर ₹139 करोड़ की प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी पकड़ी थी, जिसमें 132 कंटेनरों में तंजानिया, सूडान और कनाडा से तरबूज के बीज और हरे मटर को 'तूर दाल' बताकर आयात किया गया था। उस मामले में आयातक फर्म के मालिक को गिरफ्तार किया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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