राजनाथ सिंह: आत्मनिर्भरता और संयुक्तता से ही सुरक्षित होगा भारत का भविष्य
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 14 मई 2026 को स्पष्ट किया कि आने वाले दशकों में किसी भी राष्ट्र की सामरिक शक्ति इस बात पर निर्भर करेगी कि उसकी सेनाएं, रक्षा प्रयोगशालाएं और रक्षा उद्योग कितनी तीव्रता और एकजुटता के साथ कार्य करते हैं। उन्होंने आत्मनिर्भरता और संयुक्तता को भारत की रणनीतिक स्वायत्तता तथा उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए अपरिहार्य बताया।
कलाम एंड कवच 3.0 सम्मेलन में संदेश
नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में आयोजित 'कलाम एंड कवच 3.0' रक्षा रणनीतिक संवाद में रक्षा मंत्री ने वीडियो संदेश के माध्यम से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भविष्य का युद्धक्षेत्र उन देशों को निर्णायक बढ़त देगा जो किसी विचार को तेज़ी से प्रोटोटाइप में परिवर्तित कर कम समय में उसे सैन्य संचालन में उतार सकेंगे। इस सम्मेलन में नीति निर्माता, सैन्य नेतृत्व, रक्षा उद्योग, स्टार्टअप, वैज्ञानिक, शिक्षाविद, रणनीतिक विशेषज्ञ और विदेशी प्रतिनिधि सम्मिलित हुए।
आत्मनिर्भरता — आर्थिक लक्ष्य नहीं, रणनीतिक अनिवार्यता
राजनाथ सिंह ने रेखांकित किया कि वर्तमान भू-राजनीतिक तनाव, साइबर खतरे, सप्लाई चेन की कमज़ोरियां और हाइब्रिड युद्ध जैसी नई चुनौतियों के परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रीय सुरक्षा पुरानी अवधारणाओं पर टिकी नहीं रह सकती। उन्होंने कहा कि यदि कोई देश महत्वपूर्ण रक्षा क्षमताओं के लिए अत्यधिक रूप से बाहरी स्रोतों पर निर्भर रहता है, तो संकट की घड़ी में वह कमज़ोर साबित हो सकता है। भारत को अपने रक्षा तंत्र के भीतर ही प्रमुख प्रणालियों का डिज़ाइन, विकास, उत्पादन, रखरखाव और उन्नयन करना होगा — तभी देश अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को सुरक्षित रख सकेगा।
संयुक्तता: थल, जल, वायु से परे साइबर और अंतरिक्ष तक
रक्षा मंत्री ने आधुनिक युद्ध में सैन्य बलों की संयुक्तता की अनिवार्यता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि अब युद्ध केवल थल, जल और वायु क्षेत्र तक सीमित नहीं है — साइबर और अंतरिक्ष क्षेत्र भी उतने ही निर्णायक हो गए हैं। सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सेनाएं, रक्षा प्रयोगशालाएं, उद्योग, स्टार्टअप, नीति निर्माता और सैन्य संस्थान कितनी प्रभावी साझेदारी के साथ कार्य करते हैं।
रक्षा निर्यात और उत्पादन के रिकॉर्ड आंकड़े
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने सम्मेलन में बताया कि एक दशक पूर्व जहां रक्षा निर्यात मात्र ₹686 करोड़ था, वहीं आज यह बढ़कर रिकॉर्ड ₹38,424 करोड़ तक पहुंच गया है। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2025-26 में वार्षिक रक्षा उत्पादन ₹1.54 लाख करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचा है। उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' को नए भारत की सामरिक क्षमता का प्रत्यक्ष उदाहरण बताया।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित ने कहा कि भारत की रणनीतिक सुरक्षा के लिए स्वदेशी नवाचार अत्यंत महत्वपूर्ण है और देश की रक्षा क्षमता आत्मनिर्भरता तथा अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने की क्षमता पर आधारित होनी चाहिए। सम्मेलन में एआई आधारित युद्ध प्रणाली, स्वायत्त हथियार प्रणाली, हाइपरसोनिक तकनीक, क्वांटम आधारित प्रणाली, रक्षा विनिर्माण विस्तार, एयरोस्पेस प्रौद्योगिकी और रणनीतिक साझेदारी जैसे विषयों पर उच्चस्तरीय सत्र और पैनल चर्चा आयोजित की गईं। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 'कलाम एंड कवच' मंच को विचार और राष्ट्रीय उद्देश्य का संगम बताया, जहां 'कलाम' ज्ञान व नवाचार का और 'कवच' सुरक्षा व राष्ट्र रक्षा की जिम्मेदारी का प्रतीक है।
गौरतलब है कि यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हुआ जब भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है। आने वाले वर्षों में स्वदेशी तकनीक और अंतर-सेवा समन्वय भारत की सुरक्षा नीति की धुरी बनते दिख रहे हैं।