भारत में रक्षा उद्योग को सशक्त बनाने और निर्यात को प्रोत्साहित करने की दिशा में कदम: राजनाथ सिंह
सारांश
Key Takeaways
नई दिल्ली, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्र सरकार का मानना है कि भारत का रक्षा उद्योग और भी सशक्त होना चाहिए। आवश्यकतानुसार हथियार और सैन्य उपकरण देश में ही निर्मित किए जाने चाहिए। इसके साथ ही, इन्हें अन्य देशों में भी निर्यात किया जाना चाहिए।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के नए अधिकारियों के साथ बातचीत करते हुए कहा कि यह सब ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में किया जा रहा है। उन्होंने बुधवार को साउथ ब्लॉक में आईएफएस-२०२५ बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों से संवाद किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य यह है कि भारत का स्वदेशी रक्षा उद्योग इतना मजबूत हो कि देश की सभी आवश्यकताएँ यहीं पूरी हों और साथ ही दूसरे देशों को भी भारतीय रक्षा उपकरणों का निर्यात किया जा सके।
रक्षा मंत्री ने बताया कि पहले भारत विश्व के प्रमुख रक्षा आयातकों में था, लेकिन अब यह स्थिति बदल रही है। सरकार ने नई तकनीकों को अपनाने, निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के सहयोग और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। आज भारत भूमि, समुद्र, आकाश और अंतरिक्ष के सभी क्षेत्रों में अपने मंच विकसित कर रहा है।
उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन रातों-रात नहीं हुआ है, बल्कि यह लगातार नीति सुधार और तकनीकी विकास का परिणाम है। राजनाथ सिंह ने प्रशिक्षु अधिकारियों को बताया कि विदेशों में तैनात भारतीय राजनयिक केवल राजनीतिक या आर्थिक संबंध नहीं संभालते, बल्कि रक्षा सहयोग और निर्यात के लिए भी रास्ते खोलते हैं। जब भारत किसी देश के साथ रक्षा समझौता करता है या सैन्य उपकरण बेचता है, तो उसमें दूतावासों और राजनयिकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
उन्होंने कहा कि राजनयिक विश्वास बनाते हैं, बातचीत को आगे बढ़ाते हैं और देश की छवि को सुदृढ़ करते हैं। इसलिए आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य को पूरा करने में आईएफएस अधिकारियों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जब वे विदेश में कार्यरत हों तो हमेशा याद रखें कि वे १.४ अरब भारतीयों की आशाओं का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनका आचरण, उनके निर्णय और उनकी भाषा सब कुछ भारत की छवि का निर्माण करते हैं।
रक्षा मंत्री ने ईमानदारी, निष्ठा और पारदर्शिता को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया। साथ ही, उन्होंने अधिकारियों को नई सोच अपनाने, विभिन्न संस्कृतियों को समझने और भारत की सभ्यता और मूल्यों को गर्व से दुनिया के समक्ष प्रस्तुत करने का भी आग्रह किया।
इस बैठक के पहले, प्रशिक्षु अधिकारियों को रक्षा मंत्रालय के विभिन्न विभागों द्वारा रक्षा कूटनीति, रक्षा बजट, तीनों सेनाओं के एकीकरण और रक्षा खरीद प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। इससे उन्हें यह समझने में मदद मिली कि भारत किस प्रकार अपनी सैन्य क्षमता को आधुनिक और आत्मनिर्भर बना रहा है। इस बैच में कुल ५५ प्रशिक्षु अधिकारी थे, जिनमें ५३ भारत से और २ भूटान से थे।