मत्स्य निर्यात रिकॉर्ड ₹72,325 करोड़ पर: पीयूष गोयल और ललन सिंह ने बढ़ावे के उपायों पर की बैठक
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार, 14 मई 2026 को नई दिल्ली में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के साथ उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें भारत के मत्स्य निर्यात को और विस्तार देने की रणनीतियों पर केंद्रित चर्चा हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) के अस्थायी आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का समुद्री खाद्य निर्यात रिकॉर्ड ₹72,325.82 करोड़ तक पहुँच गया है।
बैठक में क्या हुई चर्चा
दोनों मंत्रियों ने सह-अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मछुआरों की आय बढ़ाने के ठोस उपायों पर विचार-विमर्श किया। गोयल ने बैठक के बाद कहा, 'हमने इस क्षेत्र में सतत विकास को बढ़ावा देने और नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए अपनी निरंतर प्रतिबद्धता भी दोहराई।' बैठक में बाज़ार और उत्पाद विविधीकरण, एंटीबायोटिक प्रतिबंधों के अनुपालन और ट्रेसबिलिटी प्रणाली को मज़बूत करने जैसे नियामकीय पहलुओं पर भी ज़ोर दिया गया।
रिकॉर्ड निर्यात: मुख्य आँकड़े
MPEDA के अस्थायी आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में निर्यात की कुल मात्रा 19.32 लाख मीट्रिक टन रही। इस वृद्धि की सबसे बड़ी धुरी फ्रोजन झींगा रहा, जिससे ₹47,973.13 करोड़ की कमाई हुई — यह कुल निर्यात आय के दो-तिहाई से अधिक है। मत्स्य पालन मंत्रालय के अनुसार, झींगा निर्यात की मात्रा में 4.6% और मूल्य में 6.35% की वृद्धि दर्ज की गई।
अमेरिकी बाज़ार में गिरावट, वैकल्पिक बाज़ारों से राहत
अमेरिका भारत के समुद्री उत्पादों का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बना रहा, जहाँ कुल आयात 2.32 अरब डॉलर रहा। हालाँकि, पारस्परिक शुल्कों के प्रभाव के कारण अमेरिका को होने वाले निर्यात में मात्रा के लिहाज़ से 19.8% और मूल्य के लिहाज़ से 14.5% की गिरावट दर्ज की गई। गौरतलब है कि इस गिरावट की भरपाई चीन, यूरोपीय संघ और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में मज़बूत वृद्धि से हुई।
भारत के दूसरे सबसे बड़े निर्यात गंतव्य चीन को निर्यात मूल्य में 22.7% और मात्रा में 20.1% की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई — जो बाज़ार विविधीकरण की रणनीति की सफलता को रेखांकित करती है।
आगे की दिशा
ललन सिंह ने पहले ही स्पष्ट किया था कि भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में यह मज़बूत वृद्धि अमेरिका के अलावा अन्य बाज़ारों में बेहतर प्रदर्शन के कारण संभव हुई है। आलोचकों का कहना है कि अमेरिकी बाज़ार में गिरावट एक दीर्घकालिक चुनौती बन सकती है यदि व्यापार शुल्क विवाद जल्द नहीं सुलझे। इस क्षेत्र में नवाचार, ट्रेसबिलिटी और नियामकीय अनुपालन को प्राथमिकता देना आने वाले वर्षों में निर्यात वृद्धि की स्थिरता के लिए निर्णायक होगा।