EU की संशोधित सूची में भारत शामिल, सितंबर 2026 के बाद भी जारी रहेगा मत्स्य उत्पादों का निर्यात
सारांश
मुख्य बातें
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 14 मई 2026 को घोषणा की कि यूरोपीय संघ (EU) ने अपनी संशोधित मसौदा सूची में भारत को शामिल कर लिया है, जिससे देश EU बाज़ार में जलीय कृषि और मत्स्य उत्पादों का निर्यात निर्बाध रूप से जारी रख सकेगा। यह कदम सितंबर 2026 के बाद भी भारतीय समुद्री खाद्य निर्यात की निरंतरता सुनिश्चित करने की दिशा में निर्णायक माना जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
4 अक्टूबर 2024 को जारी यूरोपीय संघ के कार्यान्वयन विनियमन में एक चूक हो गई थी — भारत उन तृतीय देशों की सूची में शामिल नहीं था जिन्हें सितंबर 2026 के बाद मानव उपभोग के लिए पशु मूल के उत्पाद निर्यात करने की अनुमति दी गई थी। इस संशोधित मसौदे के ज़रिये उसी चूक को दूर किया गया है।
यूरोपीय आयोग ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया कि संशोधित सूची में केवल उन्हीं देशों को जगह मिली है जिन्होंने खाद्य उत्पादन में उपयोग होने वाले जानवरों पर रोगाणुरोधी (antimicrobial) उपयोग का यूरोपीय प्रतिबंध प्रभावी ढंग से लागू किया है और आवश्यक गारंटी तथा भरोसेमंद आश्वासन प्रदान किए हैं।
भारत के समुद्री खाद्य निर्यात पर असर
EU भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण गंतव्य है। वर्ष 2025-26 में यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा समुद्री खाद्य निर्यात बाज़ार रहा, जिसमें कुल निर्यात मूल्य 1.593 अरब अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया और EU की हिस्सेदारी 18.94 प्रतिशत रही।
वर्ष 2024-25 की तुलना में EU को निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई — निर्यात मूल्य में 41.45 प्रतिशत और निर्यात मात्रा में 38.29 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इस निर्यात में फार्म में पाली गई झींगा मछलियों की हिस्सेदारी सर्वाधिक रही।
नियामक अनुपालन की भूमिका
मंत्रालय ने इस घटनाक्रम को वाणिज्य विभाग, समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) और निर्यात निरीक्षण परिषद (EIC) के लगातार प्रयासों की स्वीकृति के रूप में देखा। इन संस्थाओं ने नियामक अनुपालन को सुदृढ़ करने और जिम्मेदार मत्स्यपालन नियमों को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई है।
गौरतलब है कि यह समावेश यह भी दर्शाता है कि EU ने भारत की खाद्य सुरक्षा प्रणालियों, निगरानी तंत्रों और नियामक ढाँचे पर विश्वास जताया है — जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारत की साख के लिए सकारात्मक संकेत है।
आगे क्या होगा
यूरोपीय आयोग द्वारा इस संशोधित विनियमन को औपचारिक रूप से अपनाए जाने के बाद, सितंबर 2026 के बाद भी भारतीय मत्स्य उत्पादों का EU बाज़ार में निर्बाध निर्यात सुनिश्चित होने की उम्मीद है। यह कदम भारत के समुद्री खाद्य निर्यात क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक स्थिरता और बाज़ार पहुँच की गारंटी देता है।