जापान PM ताकाइची 19 मई को दक्षिण कोरिया दौरे पर, राष्ट्रपति ली से होगी अहम वार्ता
सारांश
मुख्य बातें
जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची 19 मई को दो दिवसीय दौरे पर दक्षिण कोरिया रवाना होंगी, जहाँ उनकी मुलाकात दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग से होने की संभावना है। जापान के डिप्टी चीफ कैबिनेट सेक्रेटरी मासानाओ ओह-जाकी ने 14 मई को यह पुष्टि की। यह यात्रा दोनों देशों के बीच चल रही 'शटल डिप्लोमेसी' की कड़ी है, जो द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने का प्रयास है।
मुख्य घटनाक्रम
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों नेताओं की मुलाकात दक्षिण कोरिया के दक्षिण-पूर्वी शहर एंडोंग में हो सकती है, जो राष्ट्रपति ली का गृह नगर है। इस वर्ष जनवरी में राष्ट्रपति ली जापान गए थे और उन्होंने नारा प्रांत में ताकाइची के साथ शिखर वार्ता की थी — ताकाइची की यह यात्रा उसी पारस्परिक कूटनीतिक परंपरा का जवाबी कदम है।
एजेंडे में क्या है
दोनों नेताओं के बीच ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन और ईरान संघर्ष के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति में आ रही बाधाओं पर चर्चा होने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में अस्थिरता ने एशियाई देशों की ऊर्जा निर्भरता को लेकर चिंताएँ बढ़ा दी हैं।
एसीएसए समझौते पर विवाद
जापानी अखबार योमिउरी शिम्बुन के अनुसार, जापान दक्षिण कोरिया के साथ एक्विजिशन एंड क्रॉस-सर्विसिंग एग्रीमेंट (ACSA) पर आगे बढ़ना चाहता है। यह मुद्दा 7 मई को सोल में हुई दोनों देशों के रक्षा और विदेश उप मंत्रियों की 'टू-प्लस-टू' सुरक्षा बैठक में भी उठाया गया था।
ACSA एक ऐसा रक्षा समझौता है जिसके तहत आपात स्थिति में दोनों देश भोजन, ईंधन, परिवहन और अन्य लॉजिस्टिक सेवाएँ परस्पर साझा कर सकते हैं। हालाँकि, दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने 8 मई को स्पष्ट किया कि फिलहाल सोल इस तरह के किसी सैन्य लॉजिस्टिक समझौते पर विचार नहीं कर रहा।
दक्षिण कोरिया की स्थिति
दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, 'सरकार आपसी सम्मान और विश्वास के आधार पर जापान के साथ स्थिर और भविष्य उन्मुख रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाना चाहती है, लेकिन ACSA पर अभी कोई योजना नहीं है।' गौरतलब है कि यह बयान ताकाइची की यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग की सीमाओं को रेखांकित करता है।
क्या होगा आगे
ताकाइची की यह यात्रा जापान-दक्षिण कोरिया संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। ऊर्जा और सप्लाई चेन सहयोग पर बनने वाली सहमति आने वाले महीनों में दोनों देशों के आर्थिक और सुरक्षा संबंधों की दिशा तय करेगी।