क्या दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली ने जापान के साथ परस्पर लाभकारी संबंधों पर जोर दिया?

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क्या दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली ने जापान के साथ परस्पर लाभकारी संबंधों पर जोर दिया?

सारांश

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यांग ने जापान के साथ द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने पर जोर दिया है। उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न क्षेत्रों की पहचान करने की बात की। यह बैठक जापान यात्रा के दौरान हुई, जिसमें दोनों नेताओं ने भविष्य के लिए सहयोग को मजबूती देने की रणनीतियों पर चर्चा की।

Key Takeaways

  • सियोल और टोक्यो के बीच द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की आवश्यकता है।
  • राष्ट्रपति ली जे-म्यांग ने परस्पर लाभकारी संबंधों की दिशा में कदम बढ़ाने का आग्रह किया।
  • दोनों नेताओं ने भविष्य-उन्मुख सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
  • शिखर वार्ता के बाद सोल-टोक्यो संबंधों में बड़ा सुधार की संभावना है।
  • समुद्री खाद्य उत्पादों के आयात पर चर्चा की गई।

सियोल, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यांग ने शुक्रवार को कहा कि सियोल और टोक्यो को द्विपक्षीय संबंधों में सुधार कर परस्पर लाभकारी रिश्तों की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

पूर्व जापानी प्रधानमंत्री तारो आसो के साथ बैठक में राष्ट्रपति ली ने कहा कि दक्षिण कोरिया और जापान पड़ोसी देश हैं और “एक ही आंगन” साझा करते हैं। योनहाप समाचार एजेंसी के अनुसार, उन्होंने कहा, “यह वांछनीय है कि दोनों देश अधिक से अधिक ऐसे क्षेत्रों की पहचान करें, जहां सहयोग संभव हो, ताकि परस्पर लाभकारी संबंध स्थापित किए जा सकें।”

राष्ट्रपति ली की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब वह इसी सप्ताह जापान यात्रा पर गए थे। इस दौरान उन्होंने जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची से बीजिंग और टोक्यो के बीच बढ़ते तनाव के बीच द्विपक्षीय सहयोग को और व्यापक व गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की।

ली ने ताकाइची से उनकी गृह नगरी नारा में मुलाकात की। यह उनका जापान का दूसरा दौरा और जून में पद संभालने के बाद किसी जापानी प्रधानमंत्री के साथ पांचवां शिखर सम्मेलन था। इससे पहले दोनों नेताओं की पहली मुलाकात अक्टूबर के अंत में दक्षिण कोरिया के ग्योंगजू में हुई थी।

मंगलवार को हुई वार्ता में दोनों नेताओं ने ‘शटल कूटनीति’ के तहत एक-दूसरे के देशों की नियमित यात्रा करते हुए ‘भविष्य-उन्मुख सहयोग’ को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।

राष्ट्रपति ली ने कहा कि शिखर वार्ता के तुरंत बाद तारो आसो से हुई उनकी बैठक से कोरियाई जनता को यह संकेत मिल रहा है कि सोल-टोक्यो संबंधों में अचानक बड़ा सुधार हो सकता है।

वहीं, तारो आसो ने कहा कि तीन महीने से भी कम समय में जापान और दक्षिण कोरिया के नेताओं के बीच दूसरी शिखर बैठक बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “जापान और दक्षिण कोरिया के आसपास की अंतरराष्ट्रीय स्थिति बदल रही है और करीबी सहयोग दोनों देशों के लिए लाभकारी है।”

14 जनवरी को राष्ट्रपति ली जे-म्यांग दो दिवसीय जापान यात्रा पूरी कर स्वदेश लौटे। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री ताकाइची से द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही राष्ट्रपति ली ने उत्तर-पूर्व एशिया में सहयोग के लिए सोल, टोक्यो और बीजिंग के बीच साझा आधार खोजने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

शिखर वार्ता में संवेदनशील मुद्दों पर भी चर्चा हुई, जिनमें जापानी समुद्री खाद्य उत्पादों के आयात पर दक्षिण कोरिया का प्रतिबंध शामिल है। यह मुद्दा ऐसे समय उठा है, जब सोल जापान के नेतृत्व वाले 12 सदस्यीय ‘कम्प्रीहेंसिव एंड प्रोग्रेसिव एग्रीमेंट फॉर ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप’ (सीपीटीपीपी) में शामिल होने का प्रयास कर रहा है। दोनों पक्षों ने इस पर आगे कार्यस्तरीय वार्ता की जरूरत बताई।

Point of View

बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है। राष्ट्रपति ली की पहल से न केवल द्विपक्षीय सहयोग मजबूत होगा बल्कि यह क्षेत्रीय स्थिरता में भी योगदान करेगा।
NationPress
17/01/2026

Frequently Asked Questions

दक्षिण कोरिया और जापान के संबंधों में सुधार के प्रयास क्यों महत्वपूर्ण हैं?
दक्षिण कोरिया और जापान के बीच संबंधों में सुधार से न केवल आर्थिक सहयोग बढ़ेगा बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता में भी सुधार होगा।
राष्ट्रपति ली की जापान यात्रा के दौरान क्या प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई?
राष्ट्रपति ली ने जापान के साथ द्विपक्षीय सहयोग, परमाणु निरस्त्रीकरण और समुद्री खाद्य उत्पादों के आयात जैसे मुद्दों पर चर्चा की।
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