साधना सरगम की संगीत यात्रा: मजेदार किस्से और कल्याणजी-आनंदजी का योगदान
सारांश
Key Takeaways
- साधना सरगम का असली नाम साधना घाणेकर है।
- उनकी पहली रिकॉर्डिंग 5 साल की उम्र में हुई थी।
- कल्याणजी-आनंदजी ने उनके नाम में 'सरगम' जोड़ने का सुझाव दिया था।
- लता मंगेशकर, आशा भोसले जैसे कलाकारों से उन्हें प्रेरणा मिली।
- संगीत की साधना में निरंतरता और मेहनत जरूरी है।
नई दिल्ली, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। संगीत जगत में कई प्रतिभावान गायकों ने अपनी साधना के माध्यम से अद्वितीय पहचान बनाई है। उनमें से एक हैं साधना सरगम, जिनकी आवाज़ ने कई पीढ़ियों का दिल जीता है। हालांकि, उनके नाम से जुड़ी कुछ मजेदार कहानियाँ बहुत कम लोग जानते हैं।
प्लेबैक सिंगर साधना सरगम का नाम भारतीय फिल्म संगीत में विशेष स्थान रखता है। एक पुराने साक्षात्कार में, उन्होंने अपने संगीत सफर, नाम की उत्पत्ति, और शुरुआती चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने साझा किया कि उनका नाम “साधना सरगम” माता-पिता की दूरदर्शिता और कल्याणजी-आनंदजी के सुझाव पर रखा गया था।
साधना ने बताया, “मेरा असली नाम साधना घाणेकर है। मेरे माता-पिता ने साधना नाम इसलिए रखा ताकि मुझे यह याद रहे कि संगीत की साधना कभी खत्म नहीं होनी चाहिए। जब मैं कल्याणजी-आनंदजी के पास शिमला प्रोग्राम के लिए गई, तो उन्होंने कहा कि साधना घाणेकर नाम अच्छा है, लेकिन म्यूजिकल नहीं। उन्होंने सुझाव दिया कि सरगम जोड़ लें, और मैंने तुरंत सहमति दे दी।”
उन्होंने कहा, “मेरे जीवन में गुरुजनों का बहुत बड़ा स्थान है। मैंने सबसे पहले अपनी मां नीला घाणेकर से संगीत सीखा और फिर पंडित जसराज से शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण प्राप्त किया। पंडित जसराज से सीखना मेरे लिए गर्व की बात है।”
साधना ने बताया कि बचपन से ही संगीत उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा। चार साल की उम्र से गाना शुरू किया था। घर में शास्त्रीय संगीत का माहौल था। उन्होंने शुरुआत में सोचा था कि वे केवल शास्त्रीय गायिका बनेंगी, लेकिन बाद में प्लेबैक सिंगिंग की ओर मुड़ गईं।
उनकी पहली रिकॉर्डिंग महज 5 साल की उम्र में हुई थी, जिसमें उन्होंने एक मराठी कविता पर आधारित गीत गाया। साधना ने फिल्म 'गुड्डी' के गाने “हमको मन की शक्ति देना” के बारे में भी बताया, क्योंकि उसी गाने ने उन्हें पहला मौका दिलाया था।
प्रेरणा के स्रोत के रूप में, साधना सरगम ने लता मंगेशकर, आशा भोसले, किशोर कुमार, मुकेश और मोहम्मद रफी का नाम लिया। उन्होंने कहा, “इनकी आवाज सुनकर गाने की ऊंचाई का अनुभव होता है। मैं उनके गानों को बार-बार सुनती हूं और उनसे सीखती हूं।”
साधना सरगम ने यह भी बताया कि मराठी परिवार से होने के बावजूद, उन्होंने हिंदी-उर्दू उच्चारण सुधारने के लिए मौलवी सैय्यद अहमद सैय्यद से उर्दू पढ़ी। इससे उन्हें फिल्म 'कलिंगा' जैसे प्रोजेक्ट्स में दिलीप कुमार के सामने गाने का आत्मविश्वास मिला।
साधना ने कहा कि उनके करियर में बड़ी समस्याएं नहीं आईं, क्योंकि उन्हें सही मार्गदर्शन मिला, लेकिन वे स्वयं से असंतुष्ट रहती हैं कि प्रगति और तेज होनी चाहिए थी। उनका लक्ष्य है कि उनका गाना सुनकर लोग शांति महसूस करें।
साधना कहती हैं, “मैं एक अच्छे सिंगर से ज्यादा एक अच्छा इंसान बनना चाहती हूं और संगीत के माध्यम से दूसरों की मदद करना चाहती हूं।” उन्होंने बताया कि वे आज भी रोज रियाज करती हैं और संगीत की साधना को कभी कम नहीं होने देतीं।