बिहार राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त, 4 मई से लौटेंगे काम पर; 2 महीने में मांगें पूरी न हुईं तो फिर हड़ताल
सारांश
Key Takeaways
बिहार राजस्व सेवा संयुक्त महासंघ ने 30 अप्रैल 2026 को पटना में घोषणा की कि 9 मार्च से जारी राजस्व कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल आधिकारिक रूप से वापस ले ली गई है। सभी राजस्व कर्मचारी 4 मई 2026 से अपनी-अपनी पोस्टिंग पर ड्यूटी पर लौटेंगे। इस फैसले से पूरे बिहार में प्रशासनिक कामकाज के सामान्य होने की उम्मीद जगी है।
हड़ताल वापसी का निर्णय कैसे हुआ
यह निर्णय विभागीय सचिव जय कुमार सिंह और महासंघ के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत के बाद लिया गया। संयुक्त मोर्चे के महासचिव रजनीश कांत ने कहा कि हड़ताल वापस लेने का फैसला जनता को होने वाली परेशानी को ध्यान में रखते हुए और शासन में निरंतरता बनाए रखने के लिए किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में महासंघ के भरोसे को दर्शाता है।
11-सूत्रीय मांगों पर दो महीने की समयसीमा
महासंघ ने राज्य सरकार को 5 मार्च को सौंपे गए 11-सूत्रीय मांगों के चार्टर पर कार्रवाई करने के लिए दो महीने का समय दिया है। प्रमुख मांगों में डिप्टी कलेक्टर (भूमि सुधार) के पद को पूरी तरह राजस्व विभाग के प्रशासनिक और कार्यात्मक नियंत्रण में लाना शामिल है। इसके साथ ही बिहार राजस्व सेवा के अधिकारियों की सभी कैडर-निर्धारित पदों पर उचित नियुक्ति या प्रभार का आवंटन सुनिश्चित करने की भी माँग है।
आम जनता पर असर
यह हड़ताल सामूहिक छुट्टी के रूप में की गई थी और इसने सार्वजनिक सेवाओं तथा रोज़मर्रा के प्रशासनिक कामों पर गहरा असर डाला था। 9 मार्च से 30 अप्रैल तक लगभग 52 दिनों तक चली इस हड़ताल के दौरान भूमि-संबंधी दस्तावेज़ीकरण, राजस्व वसूली और अन्य प्रशासनिक कार्य बाधित रहे। हड़ताल समाप्त होने से राज्य के लाखों नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
चेतावनी: मांगें न मानी तो फिर हड़ताल
संयुक्त मोर्चे ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को दो महीने की तय समयसीमा के भीतर पूरा नहीं किया गया, तो वे एक बार फिर लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से सामूहिक छुट्टी यानी हड़ताल का सहारा लेंगे। रजनीश कांत ने बातचीत और सहयोग के ज़रिए समाधान निकालने की महासंघ की इच्छा पर जोर दिया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार के पास अब दो महीने का समय है कि वह राजस्व सेवा कैडर को मज़बूत और सुव्यवस्थित करने के लिए ठोस कदम उठाए। महासंघ को उम्मीद है कि सरकार राज्य सेवा के हितों की रक्षा करते हुए लंबित मांगों को तेज़ी से हल करेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार समयसीमा के भीतर ठोस कार्रवाई करती है या फिर बिहार में एक और प्रशासनिक संकट उत्पन्न होता है।