खरीफ 2026: भारत में उर्वरक भंडार आवश्यकता से डेढ़ गुना अधिक, सरकार ने जारी किए आंकड़े

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खरीफ 2026: भारत में उर्वरक भंडार आवश्यकता से डेढ़ गुना अधिक, सरकार ने जारी किए आंकड़े

सारांश

खरीफ सीजन से पहले भारत सरकार ने राहत की खबर दी है — उर्वरक भंडार सामान्य से डेढ़ गुना अधिक है। यूरिया से लेकर एनपीके तक, हर श्रेणी में आपूर्ति आवश्यकता से कई गुना ज़्यादा है। वैश्विक संकट के बावजूद खुदरा कीमतें स्थिर रखी गई हैं — किसानों के लिए यह बड़ी राहत है।

Key Takeaways

कृषि मंत्रालय ने 30 अप्रैल 2026 को बताया कि खरीफ सीजन के लिए 193.38 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है — आवश्यकता का 50% , जबकि सामान्यतः केवल 33% रखा जाता है। यूरिया की उपलब्धता 73.81 लाख मीट्रिक टन , एनपीके की 54.04 लाख मीट्रिक टन — दोनों आवश्यकता से कई गुना अधिक। वैश्विक बाजारों में लागत बढ़ने के बावजूद प्रमुख उर्वरकों के खुदरा मूल्यों में कोई बदलाव नहीं । भारत ने फरवरी से अब तक वैश्विक निविदा के ज़रिए 38.07 लाख मीट्रिक टन यूरिया आयात किया। 24 अप्रैल को 12 लाख मीट्रिक टन डीएपी , 4 लाख मीट्रिक टन टीएसपी और 3 लाख मीट्रिक टन अमोनियम सल्फेट की खरीद के लिए संयुक्त वैश्विक निविदाएं जारी। सचिवों के अधिकृत समूह की अब तक 6 बैठकें हो चुकी हैं और अधिकांश आपूर्ति चुनौतियाँ हल।

कृषि मंत्रालय ने 30 अप्रैल 2026 को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा कि खरीफ 2026 सीजन के लिए भारत की उर्वरक सुरक्षा स्थिति मजबूत बनी हुई है और सभी प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता सामान्य मानक से काफी अधिक है। मंत्रालय के अनुसार, गुरुवार तक कुल 193.38 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है, जो खरीफ सीजन की अनुमानित आवश्यकता 390.54 लाख मीट्रिक टन का 50 प्रतिशत है — जबकि इस समय सामान्यतः केवल 33 प्रतिशत स्टॉक रखा जाता है।

उर्वरकवार उपलब्धता की स्थिति

1 से 30 अप्रैल की अवधि के दौरान राज्यों में आपूर्ति की स्थिति निम्नलिखित रही:

यूरिया की उपलब्धता 73.81 लाख मीट्रिक टन रही, जबकि आवश्यकता 22.91 लाख मीट्रिक टन थी। डीएपी की उपलब्धता 23.47 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले आवश्यकता 7.44 लाख मीट्रिक टन थी। एमओपी की उपलब्धता 8.54 लाख मीट्रिक टन रही, जबकि आवश्यकता 2.18 लाख मीट्रिक टन थी।

एनपीके की उपलब्धता 54.04 लाख मीट्रिक टन रही, जो 9.40 लाख मीट्रिक टन की आवश्यकता से कई गुना अधिक है। एसएसपी की उपलब्धता 26.20 लाख मीट्रिक टन रही, जबकि आवश्यकता 4.16 लाख मीट्रिक टन थी। बयान में कहा गया कि यह आँकड़े चालू खरीफ सीजन के लिए एक मजबूत शुरुआती स्थिति का संकेत देते हैं।

वैश्विक संकट के बावजूद स्थिर कीमतें

सरकार ने स्पष्ट किया कि वैश्विक बाजारों में लागत बढ़ने के बावजूद प्रमुख उर्वरकों के खुदरा मूल्यों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न आपूर्ति व्यवधान के बाद कुल 78 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की उपलब्धता में वृद्धि दर्ज की गई है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला दबाव में है और कई देशों में उर्वरक की कमी की खबरें आ रही हैं।

घरेलू उत्पादन और वैश्विक खरीद

इस वर्ष अप्रैल में यूरिया का घरेलू उत्पादन लगभग 20.8 से 21 लाख मीट्रिक टन रहा, जबकि पिछले वर्ष अप्रैल में यह 21.89 लाख मीट्रिक टन था। भारत ने फरवरी के अंत से अब तक वैश्विक निविदा के माध्यम से कुल 38.07 लाख मीट्रिक टन यूरिया प्राप्त किया है।

भारतीय उर्वरक कंपनियों ने 24 अप्रैल को संयुक्त वैश्विक निविदाएं जारी कीं, जिनमें 12 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 4 लाख मीट्रिक टन टीएसपी और 3 लाख मीट्रिक टन अमोनियम सल्फेट की खरीद शामिल है। इससे पीक सीजन के दौरान पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

निगरानी और समन्वय

उर्वरक विभाग द्वारा यूरिया और फास्फोरस एवं पोटेशियम उर्वरकों के उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता की नियमित समीक्षा की जा रही है। बयान के अनुसार, उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सचिवों के अधिकृत समूह की अब तक छह बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं और अधिकांश आपूर्ति चुनौतियों का समाधान कर लिया गया है। आगामी खरीफ सीजन में किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए सरकार की तैयारियाँ जारी हैं।

Point of View

लेकिन असली परीक्षा वितरण की अंतिम कड़ी — ज़िला और ब्लॉक स्तर — पर होगी, जहाँ अतीत में कृत्रिम कमी और कालाबाज़ारी की शिकायतें आती रही हैं। यह उल्लेखनीय है कि घरेलू यूरिया उत्पादन अप्रैल 2026 में पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ा कम रहा, जो आयात पर निर्भरता को रेखांकित करता है। पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अनिश्चितता बनी है — ऐसे में 38 लाख मीट्रिक टन से अधिक का आयात एक रणनीतिक कदम है, पर दीर्घकालिक घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाए बिना यह निर्भरता जोखिम भरी रह सकती है।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

खरीफ 2026 के लिए भारत में उर्वरक की क्या स्थिति है?
कृषि मंत्रालय के अनुसार, 30 अप्रैल 2026 तक 193.38 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है, जो खरीफ सीजन की कुल आवश्यकता 390.54 लाख मीट्रिक टन का 50 प्रतिशत है। सामान्यतः इस समय केवल 33 प्रतिशत स्टॉक रखा जाता है, इसलिए यह स्थिति बेहतर मानी जा रही है।
क्या वैश्विक संकट के कारण भारत में उर्वरक की कीमतें बढ़ी हैं?
नहीं, सरकारी बयान के अनुसार वैश्विक बाजारों में लागत बढ़ने के बावजूद प्रमुख उर्वरकों के खुदरा मूल्यों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद भी सरकार ने किसानों के लिए कीमतें स्थिर रखी हैं।
भारत ने इस साल कितना यूरिया आयात किया है?
फरवरी के अंत से अब तक भारत ने वैश्विक निविदा के माध्यम से कुल 38.07 लाख मीट्रिक टन यूरिया आयात किया है। इसके अलावा, 24 अप्रैल को 12 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 4 लाख मीट्रिक टन टीएसपी और 3 लाख मीट्रिक टन अमोनियम सल्फेट की खरीद के लिए भी निविदाएं जारी की गई हैं।
उर्वरक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?
उर्वरक विभाग कच्चे माल की उपलब्धता की नियमित समीक्षा कर रहा है और सचिवों के अधिकृत समूह की अब तक छह बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। अधिकांश आपूर्ति चुनौतियों का समाधान कर लिया गया है।
खरीफ 2026 सीजन में किसानों को किन उर्वरकों की सबसे अधिक आवश्यकता होगी?
खरीफ 2026 के लिए यूरिया की सर्वाधिक आवश्यकता 22.91 लाख मीट्रिक टन आंकी गई है, इसके बाद एनपीके 9.40 लाख मीट्रिक टन और एसएसपी 4.16 लाख मीट्रिक टन है। सभी श्रेणियों में वर्तमान उपलब्धता आवश्यकता से कई गुना अधिक है।
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