स्टील्थ फ्रिगेट 'महेंद्रगिरि' नौसेना को सौंपा गया, परियोजना 17ए के तहत मझगांव डॉक की चौथी उपलब्धि
सारांश
Key Takeaways
मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने 30 अप्रैल 2025 को मुंबई स्थित अपने शिपयार्ड में परियोजना 17ए के तहत निर्मित चौथे स्टील्थ फ्रिगेट 'महेंद्रगिरि' को औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना को सौंप दिया। यह युद्धपोत आगे चलकर 'आईएनएस महेंद्रगिरि' के रूप में समुद्री बेड़े में शामिल किया जाएगा। स्वदेशी निर्माण की यह उपलब्धि 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' पहल को ठोस आधार देती है।
सौंपने का समारोह और हस्ताक्षर
स्वीकृति समारोह मझगांव डॉक परिसर में आयोजित हुआ, जहाँ कंपनी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कैप्टन जगमोहन (सेवानिवृत्त) और पूर्वी नौसैनिक कमान के चीफ स्टाफ ऑफिसर (तकनीकी) रियर एडमिरल गौतम मारवाहा ने स्वीकृति दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर मझगांव डॉक, युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो, नौसेना की निगरानी टीम और भारतीय नौसेना के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
कैप्टन जगमोहन का बयान
इस मौके पर कैप्टन जगमोहन ने कहा कि 'महेंद्रगिरि' की डिलीवरी भारत के समुद्री जहाज निर्माण क्षेत्र में एक अहम पड़ाव है। उन्होंने इसे टीमवर्क, समर्पण और पेशेवर उत्कृष्टता का बेहतरीन उदाहरण बताया और विश्वास जताया कि यह जहाज अपने कमांडिंग अधिकारी और चालक दल के लिए गर्व का कारण बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि 'महेंद्रगिरि' केवल एक अत्याधुनिक युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता का सशक्त प्रतीक भी है।
परियोजना 17ए की पूर्णता
'महेंद्रगिरि' की डिलीवरी के साथ ही परियोजना 17ए के तहत मझगांव डॉक में बनने वाले सभी जहाजों का निर्माण पूरा हो गया है। गौरतलब है कि इस परियोजना के तहत निर्मित जहाजों में आधुनिक युद्धक क्षमताएँ शामिल हैं, जो इन्हें समुद्र में बेहद सक्षम बनाती हैं। यह उपलब्धि भारतीय नौसेना की दूरदर्शिता, रक्षा मंत्रालय के सहयोग और देश के जहाज निर्माण तंत्र की दक्षता का प्रमाण है।
भारत-इटली समुद्री सहयोग बैठक
30 अप्रैल को ही भारतीय तटरक्षक बल और इटली की एक प्रमुख जहाज निर्माण कंपनी के बीच नई दिल्ली स्थित तटरक्षक मुख्यालय में महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें इटली से आए उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया। दोनों पक्षों ने भविष्य की परियोजनाओं के लिए भारतीय शिपयार्ड्स के साथ मिलकर काम करने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
आधुनिक तकनीकों पर विमर्श
बैठक में डायनामिक पोजिशनिंग सिस्टम, AI आधारित प्रणाली, ड्रोन-रोधी तकनीक, हाइब्रिड एवं इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन, उन्नत अग्निशमन प्रणाली और अगली पीढ़ी के हरित प्रोपल्शन समाधानों पर विचार-विमर्श हुआ। मॉड्यूलर शिप डिजाइन की अवधारणा पर भी चर्चा हुई, जिससे एक ही प्लेटफॉर्म को विभिन्न प्रकार के अभियानों के लिए अनुकूलित किया जा सके। यह संवाद भारत की समुद्री सुरक्षा और स्वदेशी क्षमता निर्माण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।