पाकिस्तान में प्रेस की आज़ादी पर संकट: PECA कानून से 129 उल्लंघन, 2 पत्रकारों की हत्या

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पाकिस्तान में प्रेस की आज़ादी पर संकट: PECA कानून से 129 उल्लंघन, 2 पत्रकारों की हत्या

सारांश

पाकिस्तान में PECA कानून पत्रकारों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है — फ्रीडम नेटवर्क की रिपोर्ट में एक साल में 129 उल्लंघन, 2 हत्याएँ और 58 कानूनी मामलों का खुलासा। विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले जारी यह रिपोर्ट पाकिस्तान में अभिव्यक्ति की आज़ादी की गंभीर होती स्थिति की तस्वीर पेश करती है।

Key Takeaways

फ्रीडम नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच पत्रकारों के खिलाफ 129 उल्लंघन दर्ज हुए। इनमें 2 हत्याएँ , हत्या की धमकी के 5 मामले , 58 कानूनी मामले (अधिकांश PECA के तहत), 16 हमले और 11 धमकियाँ शामिल हैं। संशोधित PECA कानून को वैध अभिव्यक्ति को अपराध बनाने और असहमति दबाने का प्रमुख माध्यम बताया गया। 60% से अधिक मामलों में सरकारी एजेंसियों की भूमिका संदिग्ध बताई गई है। पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक क्षेत्र रहे; सिंध और बलूचिस्तान में हत्याएँ भी दर्ज हुईं। महिला पत्रकारों को ऑनलाइन उत्पीड़न, डीपफेक और हिरासत जैसी अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

पाकिस्तान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर शिकंजा कसता जा रहा है। फ्रीडम नेटवर्क की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच पत्रकारों के खिलाफ कम से कम 129 उल्लंघन के मामले दर्ज हुए, जिनमें 2 हत्याएँ और 58 कानूनी मामले शामिल हैं — इनमें से अधिकांश संशोधित प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट (PECA) के तहत दर्ज किए गए। यह रिपोर्ट 3 मई को मनाए जाने वाले विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले जारी की गई है।

रिपोर्ट में क्या सामने आया

रिपोर्ट का पूरा शीर्षक है — 'रेगुलेटरी रिप्रेशन ऑफ फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन: लीगल कंट्रोल्स एंड PECA अंडरमाइन मीडिया एंड जर्नलिज्म इन पाकिस्तान'। इसमें कहा गया है कि कानूनी, नियामक और आर्थिक दबावों के तिहरे संयोजन ने पाकिस्तान में स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए जगह को बुरी तरह सीमित कर दिया है।

2025-26 के दौरान PECA का इस्तेमाल वैध अभिव्यक्ति को अपराध बनाने, असहमति दबाने और पत्रकारों, वकीलों तथा राजनीतिक टिप्पणीकारों को डराने के लिए किया गया। मानहानि के मामले, लाइसेंस निलंबन और इंटरनेट बंदी ने स्वतंत्र पत्रकारिता को और कमज़ोर किया।

PECA का 'हथियार की तरह इस्तेमाल'

फ्रीडम नेटवर्क के कार्यकारी निदेशक इक़बाल खटक ने कहा कि PECA का

Point of View

बल्कि संस्थागत है। महिला पत्रकारों पर डीपफेक और हिरासत जैसे नए हथियारों का इस्तेमाल दर्शाता है कि दबाव के तरीके तकनीक के साथ विकसित हो रहे हैं। विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले जारी यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि पाकिस्तान में पत्रकारिता की कीमत केवल आर्थिक नहीं, बल्कि जानलेवा भी हो सकती है।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

फ्रीडम नेटवर्क की रिपोर्ट में पाकिस्तान में पत्रकारों के खिलाफ कितने उल्लंघन दर्ज हुए?
रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच पत्रकारों के खिलाफ कम से कम 129 उल्लंघन के मामले सामने आए, जिनमें 2 हत्याएँ, 58 कानूनी मामले, 16 हमले और 11 धमकियाँ शामिल हैं।
PECA कानून पाकिस्तान में पत्रकारों को कैसे प्रभावित कर रहा है?
संशोधित PECA कानून का इस्तेमाल वैध अभिव्यक्ति को अपराध बनाने और पत्रकारों को कानूनी कार्रवाई के डर से स्व-सेंसरशिप के लिए मजबूर करने में किया जा रहा है। फ्रीडम नेटवर्क के कार्यकारी निदेशक इक़बाल खटक ने इसे 'हथियार की तरह इस्तेमाल' बताया है।
पाकिस्तान में पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक क्षेत्र कौन से हैं?
रिपोर्ट के अनुसार पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक क्षेत्र रहे, जबकि सिंध और बलूचिस्तान में हत्याओं ने जोखिम को और उजागर किया।
पाकिस्तान में महिला पत्रकारों को किन विशेष चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है?
महिला पत्रकारों को ऑनलाइन उत्पीड़न, भेदभाव, डीपफेक और हिरासत जैसी अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जो उनके लिए पत्रकारिता के माहौल को और कठिन बना रही हैं।
यह रिपोर्ट कब और क्यों जारी की गई?
यह रिपोर्ट 30 अप्रैल 2026 को 3 मई को मनाए जाने वाले विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस से पहले जारी की गई, ताकि पाकिस्तान में मीडिया की बिगड़ती स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया जा सके।
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