बिहार विधान परिषद उपचुनाव: भाजपा के अरविंद शर्मा ने 30 अप्रैल को नामांकन दाखिल किया, CM सम्राट चौधरी रहे मौजूद
सारांश
Key Takeaways
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 30 अप्रैल 2025 को बिहार विधान परिषद की रिक्त सीट के लिए अपने उम्मीदवार अरविंद शर्मा का नामांकन पत्र दाखिल कराया। नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। इस अवसर पर भाजपा ने संगठनात्मक शक्ति प्रदर्शन भी किया।
सीट क्यों हुई रिक्त
यह सीट मंगल पांडेय के बिहार विधान परिषद सदस्य (MLC) पद से इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। पांडेय विधायक (MLA) चुने गए, जिसके बाद इस सीट पर उपचुनाव अनिवार्य हो गया। भाजपा ने नामांकन से एक दिन पहले ही अरविंद शर्मा को अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित कर दिया था।
अरविंद शर्मा: संगठन के अनुभवी नेता
अरविंद शर्मा फिलहाल भाजपा के बिहार प्रदेश मुख्यालय के प्रभारी हैं और करीब चार दशकों से पार्टी संगठन से जुड़े हुए हैं। पार्टी के भीतर उन्हें अनुशासित, लक्ष्योन्मुखी और धैर्यवान नेता के रूप में देखा जाता है। संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ को उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक पूँजी माना जाता है।
अरविंद शर्मा को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का करीबी भी बताया जाता है। कहा जाता है कि संगठन में उनकी मौजूदा जिम्मेदारी दिलाने में चौधरी की अहम भूमिका रही है। इसके अलावा, उनके भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन समेत कई वरिष्ठ नेताओं से घनिष्ठ संबंध बताए जाते हैं। उन्होंने नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के साथ भी काम किया है, जिससे संगठन में उनकी स्थिति और सुदृढ़ हुई।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से भी उनकी निकटता बताई जाती है, जिससे राज्य और केंद्र — दोनों स्तरों पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
चुनाव कार्यक्रम
इस सीट के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल थी। नामांकन पत्रों की जाँच 2 मई तक होगी और नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 4 मई है। 12 मई को मतदान होगा और उसी दिन परिणाम भी घोषित किए जाएंगे। इस सीट का कार्यकाल 6 मई 2030 तक रहेगा।
निर्विरोध जीत की संभावना
मजबूत संगठनात्मक समर्थन और शीर्ष नेतृत्व के भरोसे को देखते हुए अरविंद शर्मा का इस सीट पर निर्विरोध निर्वाचन लगभग तय माना जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में NDA अपनी संगठनात्मक पकड़ को और मजबूत करने में जुटा है। आने वाले दिनों में नाम वापसी की प्रक्रिया यह स्पष्ट कर देगी कि चुनाव मुकाबले का रूप लेगा या नहीं।