असम चुनाव में 'फर्जीवाड़ा टूलकिट': मंत्री पियूष हजारिका का कांग्रेस पर बड़ा हमला, सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा की जमानत पर फैसला सुरक्षित रखा

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असम चुनाव में 'फर्जीवाड़ा टूलकिट': मंत्री पियूष हजारिका का कांग्रेस पर बड़ा हमला, सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा की जमानत पर फैसला सुरक्षित रखा

सारांश

असम मंत्री पियूष हजारिका ने कांग्रेस पर 2026 विधानसभा चुनाव में 'फर्जीवाड़ा टूलकिट' इस्तेमाल का आरोप लगाया और पवन खेड़ा की जालसाजी की बात कही। इसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा — यह मामला मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी की शिकायत से जुड़ा है।

Key Takeaways

असम मंत्री पियूष हजारिका ने 30 अप्रैल 2026 को कांग्रेस पर 2026 असम विधानसभा चुनाव में फर्जी दस्तावेजों के जरिए हस्तक्षेप का आरोप लगाया। सर्वोच्च न्यायालय ने पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा। मामला मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा की गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में दर्ज शिकायत से जुड़ा है। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराएँ — जालसाजी, धोखाधड़ी, मानहानि, चुनावी झूठे बयान — शामिल हैं। गुवाहाटी उच्च न्यायालय पहले ही खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुका है और हिरासत में पूछताछ को जरूरी बताया था।

असम सरकार के कैबिनेट मंत्री पियूष हजारिका ने गुरुवार, 30 अप्रैल 2026 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए 2026 असम विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने की साजिश रची। यह टिप्पणी ऐसे समय आई जब सर्वोच्च न्यायालय ने उसी दिन कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

मंत्री हजारिका के आरोप

सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए हजारिका ने कहा कि नागरिकों को अदालत में हुई बहस का ट्रांसक्रिप्ट पढ़ना चाहिए, ताकि यह समझ सकें कि यह असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से उस चुनाव को प्रभावित करने की कथित साजिश थी, जिसे वह हारने जा रही थी। उन्होंने इस पूरे मामले को

Point of View

बल्कि 2026 के असम चुनाव से पहले सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव का प्रतीक है। हजारिका का 'टूलकिट' वाला आरोप उसी भाषा को दोहराता है जो भाजपा 2021 से विपक्ष के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल करती रही है — लेकिन इस बार इसे अदालती कार्यवाही से जोड़ा गया है, जो आरोपों को अधिक ठोस रूप देता है। गुवाहाटी उच्च न्यायालय का यह कहना कि 'दस्तावेजों के स्रोत का पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है', संकेत देता है कि जाँच एजेंसियाँ इसे सतही राजनीतिक विवाद से अधिक मान रही हैं। सर्वोच्च न्यायालय का फैसला न केवल खेड़ा की स्वतंत्रता, बल्कि चुनावी दुष्प्रचार के मामलों में कानूनी मानदंड भी तय करेगा।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

पवन खेड़ा के खिलाफ असम में एफआईआर क्यों दर्ज हुई?
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा की शिकायत पर गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत में आरोप है कि खेड़ा ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि सरमा के पास कई विदेशी पासपोर्ट हैं और विदेशों में वित्तीय हित जुड़े हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा की जमानत पर क्या किया?
सर्वोच्च न्यायालय ने 30 अप्रैल 2026 को खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। इससे पहले गुवाहाटी उच्च न्यायालय उनकी याचिका खारिज कर चुका था।
मंत्री पियूष हजारिका ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
हजारिका ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने 2026 असम विधानसभा चुनाव प्रभावित करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और यह वही 'टूलकिट' है जो कथित तौर पर 2024 लोकसभा चुनाव में भी अपनाई गई थी। उन्होंने कहा कि यह साजिश कुछ ही घंटों में बेनकाब हो गई।
खेड़ा के खिलाफ एफआईआर में कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराएँ शामिल हैं — चुनाव से जुड़े झूठे बयान, धोखाधड़ी, जालसाजी, सार्वजनिक रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा, फर्जी दस्तावेजों का उपयोग, अपमान और मानहानि।
गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने खेड़ा की जमानत याचिका क्यों खारिज की?
गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने कहा कि यह मामला केवल मानहानि तक सीमित नहीं है और फर्जी दस्तावेजों के स्रोत का पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। इसी आधार पर याचिका खारिज की गई।
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