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भारत का मछली उत्पादन वित्त वर्ष 2025 में 106% की वृद्धि के साथ 197.75 लाख टन पर पहुंचा

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भारत का मछली उत्पादन वित्त वर्ष 2025 में 106% की वृद्धि के साथ 197.75 लाख टन पर पहुंचा

सारांश

भारत का मत्स्य पालन क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है, जिससे यह अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। केंद्रीय बजट में इस क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक वित्तीय सहायता की घोषणा की गई है, जो इसके विकास को और मजबूती प्रदान करेगी। जानें इसके प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं।

मुख्य बातें

भारत का मछली उत्पादन 106% बढ़कर 197.75 लाख टन हुआ।
केंद्रीय बजट 2026-27 में 2,761.80 करोड़ रुपए का आवंटन।
समुद्री खाद्य निर्यात 62,408 करोड़ रुपए तक पहुँचा।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से क्षेत्र को मिला बल।
मत्स्य पालन क्षेत्र में 74.66 लाख रोजगार के अवसर सृजित हुए।

नई दिल्ली, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत का मत्स्य पालन क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में तेजी से प्रगति कर रहा है, जिससे यह देश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गया है। केंद्रीय बजट 2026-27 में इस क्षेत्र के लिए 2,761.80 करोड़ रुपए की अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक बजटीय सहायता की पेशकश की गई है, जो इसकी बढ़ती महत्वपूर्णता को दर्शाती है। इस बजट में से 2,500 करोड़ रुपए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत आवंटित किए गए हैं, जो इस क्षेत्र के विकास में एक प्रमुख सहारा है।

एक आधिकारिक बयान में सरकार ने यह जानकारी दी कि भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश बन चुका है, जिसका वैश्विक उत्पादन में लगभग 8 प्रतिशत योगदान है। वित्त वर्ष 2013-14 में मछली उत्पादन 95.79 लाख टन था, जबकि 2024-25 में यह बढ़कर 197.75 लाख टन तक पहुँच गया है। इस अवधि में 106 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।

साथ ही, बयान में कहा गया है कि समुद्री खाद्य निर्यात भी तेजी से बढ़ा है और वित्त वर्ष 2024-25 में यह 62,408 करोड़ रुपए तक पहुँच गया। जमे हुए झींगे (फ्रोजन श्रिम्प) भारत के प्रमुख निर्यात उत्पाद बने हुए हैं, और अमेरिका और चीन इसके बड़े बाजार हैं।

सरकार के अनुसार, मत्स्य पालन क्षेत्र, विशेषकर तटीय और ग्रामीण क्षेत्रों में, रोज़गार, आय और खाद्य सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन चुका है। कृषि सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) में इसकी हिस्सेदारी लगभग 7.43 प्रतिशत तक पहुँच गई है, जो कृषि और संबंधित क्षेत्रों में सबसे अधिक है।

सरकारी योजनाओं के माध्यम से अब तक 4.39 लाख मछुआरों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) का लाभ मिला है, 33 लाख से अधिक लोगों को बीमा कवरेज प्राप्त हुआ है, और लगभग 7.44 लाख मछुआरा परिवारों को आजीविका सहायता प्रदान की गई है। इतना ही नहीं, वर्ष 2014-15 के बाद से इस क्षेत्र में लगभग 74.66 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए हैं।

सरकार द्वारा 2015 में शुरू की गई 'नीली क्रांति' ने इस क्षेत्र को नई दिशा दी, और इसके बाद 2020 में शुरू की गई प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) ने उत्पादन, बुनियादी ढांचे और मूल्य श्रृंखला विकास को नई गति दी।

इस योजना के अंतर्गत अब तक हजारों तालाब, जलाशय पिंजरे, परिवहन इकाइयां और कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। 5 मार्च 2026 तक पीएमएमएसवाई के तहत, 23,285 हेक्टेयर तालाब क्षेत्र, 52,058 जलाशय पिंजरे और 27,189 मछली परिवहन इकाइयों को स्वीकृति दी जा चुकी है।

इसके अलावा, 902.97 करोड़ रुपए के निवेश से 12,081 आरएएस इकाइयों और 523.30 करोड़ रुपए के निवेश से 4,205 बायो-फ्लॉक इकाइयों को अनुमति दी गई है, जो इस क्षेत्र में तकनीकी बदलाव का संकेत है।

मत्स्य पालन में अब आधुनिक तकनीकों का तेजी से उपयोग किया जा रहा है। सरकार बंदरगाह, लैंडिंग सेंटर, कोल्ड चेन, प्रोसेसिंग यूनिट और मार्केटिंग नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दे रही है। इससे न केवल उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि किसानों को बेहतर दाम भी मिलेंगे और निर्यात प्रतिस्पर्धा भी मजबूत होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह लाखों लोगों के लिए रोजगार और खाद्य सुरक्षा का भी स्रोत बन चुका है। यह समय की मांग है कि हम इस क्षेत्र के विकास पर ध्यान केंद्रित करें और इसे और मजबूत बनाएं।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का मछली उत्पादन कितना बढ़ा है?
भारत का मछली उत्पादन वित्त वर्ष 2024-25 में 106% की वृद्धि के साथ 197.75 लाख टन तक पहुँच गया है।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का क्या उद्देश्य है?
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का उद्देश्य मत्स्य पालन क्षेत्र के विकास, उत्पादन और मूल्य श्रृंखला को बढ़ावा देना है।
भारत में समुद्री खाद्य निर्यात की स्थिति क्या है?
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का समुद्री खाद्य निर्यात 62,408 करोड़ रुपए तक पहुँच गया है।
नीली क्रांति का क्या महत्व है?
नीली क्रांति ने भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र को नई दिशा दी और उत्पादन को बढ़ाने में मदद की।
किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ किसे मिला है?
अब तक 4.39 लाख मछुआरों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) का लाभ मिला है।
राष्ट्र प्रेस
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