नेतन्याहू का ऐलान: समझौता हो या न हो, ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे; ₹116 अरब डॉलर का रक्षा विस्तार
सारांश
मुख्य बातें
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार, 9 जुलाई को स्पष्ट शब्दों में कहा कि इजरायल किसी भी परिस्थिति में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा — चाहे कोई कूटनीतिक समझौता हो या न हो। यह बयान वायु सेना के पायलटों के ग्रेजुएशन समारोह में दिया गया, जो ऐसे समय आया है जब अमेरिका-ईरान तनाव एक बार फिर चरम पर है।
नेतन्याहू का सख्त रुख
समारोह में नेतन्याहू ने कहा, 'हमारी नीति बिल्कुल साफ है। समझौता हो या न हो, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे।' उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यदि अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले नहीं किए होते, तो ईरान अब तक खुद को परमाणु हथियारों से लैस कर चुका होता।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि तेहरान के साथ किसी समझौते की संभावना अब समाप्त हो चुकी है। अमेरिका और ईरान के बीच हाल में फिर से सैन्य टकराव की खबरें सामने आई हैं।
रक्षा बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
नेतन्याहू ने घोषणा की कि अगले दस वर्षों में इजरायल का रक्षा बजट 350 अरब शेकेल (लगभग 116 अरब अमेरिकी डॉलर) बढ़ाया जाएगा। इस राशि का बड़ा हिस्सा वायु सेना के आधुनिकीकरण पर खर्च होगा। साथ ही, इजरायल घरेलू स्तर पर हथियार और गोला-बारूद उत्पादन उद्योग विकसित करेगा, जिससे विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता घटेगी।
गौरतलब है कि इजरायल पहले से ही दुनिया के प्रमुख हथियार निर्यातकों में शामिल है, लेकिन हालिया संघर्षों ने घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने की ज़रूरत को रेखांकित किया है।
सेना प्रमुख और रक्षा मंत्री की चेतावनी
इजरायल के सेना प्रमुख एयाल जमीर ने कहा कि इजरायल ईरान और लेबनान की स्थिति पर लगातार नज़र रखे हुए है और ज़रूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है।
रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने भी स्पष्ट किया कि सेना पूरी तरह सतर्क है और अभियान दोबारा शुरू करने की स्थिति में है। उन्होंने अपने कार्यालय से जारी बयान में कहा, 'लेबनान में प्रवेश करने के लिए हमने किसी से अनुमति नहीं माँगी थी और वहाँ बने रहने के लिए भी हमें किसी की अनुमति की ज़रूरत नहीं है।'
लेबनान में इजरायली सेना की मौजूदगी
रक्षा मंत्री काट्ज ने स्पष्ट किया कि जब तक हिज़्बुल्लाह पूरी तरह निशस्त्र नहीं हो जाता, इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान में बनी रहेगी। उनके अनुसार, इजरायल ने लेबनान में एक मज़बूत सुरक्षा क्षेत्र स्थापित किया है जो पश्चिम में भूमध्य सागर से लेकर ब्यूफोर्ट किले (अरनून के पास) तक और पूर्व में माउंट हरमोन के आसपास के क्षेत्रों तक फैला हुआ है।
इजरायली सैनिक दक्षिणी लेबनान में तब तक तैनात रहेंगे जब तक पूरे लेबनान में हिज़्बुल्लाह को पूरी तरह निशस्त्र नहीं किया जाता — यह रुख इजरायल की दीर्घकालिक उत्तरी सीमा रणनीति को दर्शाता है।
क्या होगा आगे
अमेरिका-ईरान वार्ता के टूटने और इजरायल के आक्रामक रक्षा विस्तार के बीच, मध्य-पूर्व में तनाव और गहराने की आशंका है। नेतन्याहू के इस बयान को क्षेत्रीय विश्लेषक ईरान के परमाणु कार्यक्रम के विरुद्ध संभावित सैन्य विकल्पों को खुला रखने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।