1 अगस्त 2026
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ईरान-अमेरिका परमाणु समझौते पर इजरायल नाराज, नेतन्याहू और ट्रंप में नए मतभेद

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ईरान-अमेरिका परमाणु समझौते पर इजरायल नाराज, नेतन्याहू और ट्रंप में नए मतभेद

सारांश

अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते ने करीबी सहयोगियों के बीच दरार खोल दी है। इजरायल के सभी दलों में चिंता है कि एनरिच्ड यूरेनियम और दीर्घकालिक पाबंदियों पर फैसला टाल दिया गया। ट्रंप ने नेतन्याहू को 'काफी मुश्किल' बताया — यह तनाव जी-7 में और उभरेगा।

मुख्य बातें

इजरायल के लगभग सभी राजनीतिक दलों ने अमेरिका-ईरान समझौते की कड़ी आलोचना की है।
इजरायली अधिकारियों की मुख्य चिंता: ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम भंडार और दीर्घकालिक परमाणु पाबंदियों पर निर्णय भविष्य के लिए टाला गया।
राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू को 'काफी मुश्किल व्यक्ति' बताया; दोनों के बीच नए मतभेद सामने आए।
कुछ इजरायली नेताओं ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने ईरान से मज़बूत गारंटी लिए बिना समझौते में जल्दबाज़ी की।
समझौते के प्रभावों पर फ्रांस में होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में चर्चा होने की तैयारी है।

इजरायल के राजनीतिक नेताओं ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए परमाणु समझौते की कड़ी आलोचना की है। इजरायली नेताओं का कहना है कि यह समझौता सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों को पूरी तरह हल नहीं करता, जबकि वॉशिंगटन इसे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में पेश कर रहा है। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब समझौते की पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

इजरायल की मुख्य आपत्तियाँ

रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल के लगभग सभी राजनीतिक दलों में इस समझौते को लेकर गहरी चिंता है। इजरायली अधिकारियों को डर है कि इससे ईरान की सरकार और उसके परमाणु कार्यक्रम का एक हिस्सा यथावत बना रह सकता है।

इजरायली अधिकारियों की विशेष चिंता यह है कि समझौते में कई विवादित मुद्दों पर निर्णय भविष्य के लिए टाल दिया गया है। इनमें ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम के भंडार का भविष्य और उसके परमाणु कार्यक्रम पर दीर्घकालिक पाबंदियाँ प्रमुख रूप से शामिल हैं।

ट्रंप और नेतन्याहू में मतभेद

इस मुद्दे ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच नए मतभेद उजागर कर दिए हैं — दोनों नेताओं के बीच अब तक काफी करीबी संबंध रहे हैं। एक इंटरव्यू में ट्रंप ने नेतन्याहू को 'काफी मुश्किल व्यक्ति' बताया और कहा कि कुछ मौकों पर इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों ने ईरान के साथ चल रही बातचीत को और जटिल बना दिया था।

अमेरिका पर इजरायल के आरोप

कुछ इजरायली नेताओं ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने ईरान से मज़बूत और स्पष्ट गारंटी लिए बिना ही समझौते की दिशा में बहुत तेज़ी दिखाई। इन नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ईरान भविष्य में अपने वादों का पालन करेगा और उन्होंने ईरान पर सैन्य तथा आर्थिक दबाव बनाए रखने की माँग की।

ट्रंप का पक्ष

ट्रंप ने दावा किया कि उनकी सरकार की सैन्य कार्रवाई और नौसैनिक नाकाबंदी की वजह से ही ईरान दोबारा बातचीत की मेज पर आया। उनका कहना था कि इस समझौते से पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति बेहतर होगी।

जी-7 में चर्चा की तैयारी

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया के प्रमुख नेता फ्रांस में होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में इस समझौते के व्यापक प्रभावों पर चर्चा करने की तैयारी कर रहे हैं। गौरतलब है कि समझौते का पूरा ब्यौरा अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिससे अनिश्चितता और बढ़ी है। आने वाले दिनों में जी-7 मंच पर इस समझौते की विस्तृत समीक्षा होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह समझौता भी उसी राह पर जाने का जोखिम उठाता है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान-अमेरिका समझौते पर इजरायल को क्या आपत्ति है?
इजरायल का कहना है कि यह समझौता सुरक्षा के अहम मुद्दों को पूरी तरह हल नहीं करता। विशेष रूप से, ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम भंडार के भविष्य और दीर्घकालिक परमाणु पाबंदियों पर निर्णय आगे के लिए टाल दिया गया है, जिससे इजरायली अधिकारी चिंतित हैं।
ट्रंप और नेतन्याहू के बीच मतभेद क्यों उभरे?
ट्रंप ने एक इंटरव्यू में नेतन्याहू को 'काफी मुश्किल व्यक्ति' बताया और कहा कि इजरायल की कुछ सैन्य कार्रवाइयों ने ईरान के साथ चल रही बातचीत को जटिल बनाया। दूसरी ओर, इजरायल का मानना है कि अमेरिका ने ईरान से पर्याप्त गारंटी लिए बिना समझौते में जल्दबाज़ी की।
इस समझौते पर जी-7 में क्या होगा?
फ्रांस में होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में दुनिया के प्रमुख नेता इस समझौते के व्यापक प्रभावों पर चर्चा करने की तैयारी में हैं। चूँकि समझौते का पूरा ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है, इसलिए यह बैठक इसकी विस्तृत समीक्षा का पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच होगी।
ट्रंप प्रशासन इस समझौते को कैसे देखता है?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया है। उनका दावा है कि उनकी सरकार की सैन्य कार्रवाई और नौसैनिक नाकाबंदी के कारण ही ईरान दोबारा बातचीत की मेज पर आया और यह समझौता क्षेत्रीय सुरक्षा को बेहतर बनाएगा।
क्या इजरायल में सभी दल इस समझौते के खिलाफ हैं?
रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल के लगभग सभी राजनीतिक दलों में इस समझौते को लेकर चिंता है। यह असामान्य राजनीतिक एकजुटता दर्शाती है कि इजरायल में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा चिंताएँ कितनी गहरी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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