जेडी वेंस का दावा: अमेरिका-ईरान डील में आगे चलकर शामिल होगा इजरायल
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 16 जून 2025 को कहा कि इजरायल अंततः अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते का हिस्सा बनेगा — भले ही अभी इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से इस समझौते से खुद को अलग कर लिया है। वेंस ने यह बयान एक अमेरिकी मीडिया संस्थान को दिए साक्षात्कार में दिया।
वेंस का बयान और समझौते पर रुख
अमेरिकी मीडिया चैनल NBC न्यूज़ को दिए साक्षात्कार में वेंस ने कहा, 'जो हम जानते हैं वह यह है कि यह समझौता इजरायल को ज़्यादा सुरक्षित बनाएगा और पूरे क्षेत्र को भी अधिक सुरक्षित करेगा।' उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी और इजरायली मीडिया में इस समझौते को लेकर बड़े पैमाने पर गलत जानकारी फैलाई जा रही है।
वेंस ने आगे कहा, 'हम पूरी तरह मानते हैं कि जब इजरायल की जनता को इस समझौते की पूरी जानकारी समझ में आएगी, तो वे इसे मध्य पूर्व में एक नए दौर की शुरुआत के रूप में देखेंगे, जहाँ शांति और समृद्धि का रास्ता खुलेगा। हमें भरोसा है कि समय के साथ इजरायल भी इससे सहमत होगा।'
नेतन्याहू का इनकार और ट्रंप की आलोचना
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि वे इस एमओयू का हिस्सा नहीं हैं और उन्हें इसकी पूर्व जानकारी भी नहीं दी गई थी। यह बयान वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच बढ़ते तनाव का संकेत माना जा रहा है।
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में नेतन्याहू को 'बेहद कठिन शख्स' करार दिया था। ट्रंप ने यह भी कहा कि नेतन्याहू को अमेरिका का आभारी होना चाहिए, क्योंकि अमेरिकी पहल ने क्षेत्र को एक बड़े संकट से बचाया है।
इस पर वेंस ने कहा, 'इजरायल अक्सर एक अच्छा साझेदार है, हमारे हित कई बार मिलते हैं, लेकिन कभी-कभी मुद्दों पर मतभेद भी होते हैं। यह पूरी तरह सामान्य है — चाहे वह यूनाइटेड किंगडम हो या इजरायल, सभी करीबी सहयोगियों के साथ कभी-कभी असहमति होती है।'
समझौते की औपचारिक प्रक्रिया
वेंस के अनुसार, अमेरिका और ईरान के नेताओं ने इस समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षर कर दिए हैं। औपचारिक और प्रत्यक्ष (इन-पर्सन) हस्ताक्षर प्रक्रिया शुक्रवार को होने की उम्मीद है। वेंस ने फॉक्स न्यूज़ से बातचीत में यह भी संकेत दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप शुक्रवार से पहले ही इस समझौते को सार्वजनिक करने का फैसला कर सकते हैं।
क्षेत्रीय असर और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है और अमेरिका-इजरायल संबंधों में दरारें सार्वजनिक रूप से उभर रही हैं। आलोचकों का कहना है कि इजरायल को विश्वास में लिए बिना किया गया कोई भी क्षेत्रीय समझौता दीर्घकालिक स्थिरता नहीं ला सकता। वेंस के बयान से स्पष्ट है कि वाशिंगटन इजरायल को धीरे-धीरे इस ढाँचे में शामिल करने की रणनीति पर काम कर रहा है।