16 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नागांव उपचुनाव: एआईयूडीएफ ने बदरुद्दीन अजमल को उतारा, BJP-कांग्रेस से त्रिकोणीय मुकाबला

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नागांव उपचुनाव: एआईयूडीएफ ने बदरुद्दीन अजमल को उतारा, BJP-कांग्रेस से त्रिकोणीय मुकाबला

सारांश

नागांव उपचुनाव में अब सीधा तीन-दलीय टकराव तय है। एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल का मैदान में उतरना भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए समीकरण बदल सकता है। 6 अक्टूबर का नतीजा 2029 से पहले मध्य असम की राजनीतिक दिशा का अहम पैमाना होगा।

मुख्य बातें

एआईयूडीएफ ने 15 सितंबर 2026 को पार्टी प्रमुख बदरुद्दीन अजमल को नागांव लोकसभा उपचुनाव का उम्मीदवार घोषित किया।
मुकाबला अब भाजपा (देबाशीष शर्मा), कांग्रेस (शिबमोनी बोरा) और एआईयूडीएफ (बदरुद्दीन अजमल) के बीच त्रिकोणीय है।
नामांकन की अंतिम तिथि 16 सितंबर , वापसी की अंतिम तिथि 19 सितंबर ।
मतदान 6 अक्टूबर और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।
यह सीट कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के भाजपा में शामिल होने के बाद रिक्त हुई थी।
नतीजे 2029 के आम चुनाव से पहले मध्य असम की राजनीतिक दिशा का संकेत देंगे।

ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को पार्टी प्रमुख और बिन्नाकांडी के विधायक बदरुद्दीन अजमल को 6 अक्टूबर को होने वाले नागांव लोकसभा उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया। इस ऐलान के साथ ही यह उपचुनाव भारतीय जनता पार्टी (BJP), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच एक करारे त्रिकोणीय मुकाबले में तब्दील हो गया है।

उम्मीदवारी का ऐलान और नामांकन की समयसीमा

अजमल की उम्मीदवारी की घोषणा नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि — 16 सितंबर — से ठीक एक दिन पहले की गई, जिससे पार्टी की पसंद को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया। एआईयूडीएफ ने शुरू में संकेत दिया था कि रेजौल करीम सरकार उम्मीदवार हो सकते हैं, लेकिन अंततः पार्टी ने अपने सुप्रीमो को ही सीधे मैदान में उतारने का फैसला किया। उम्मीदवार 19 सितंबर तक नामांकन वापस ले सकते हैं।

तीनों मुख्य उम्मीदवार

भाजपा ने पूर्व आईएएस अधिकारी देबाशीष शर्मा को प्रत्याशी बनाया है, जिन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद 8 सितंबर को भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। प्रशासनिक अनुभव और नागांव क्षेत्र से उनकी परिचितता उनके प्रचार अभियान का मुख्य आधार हो सकती है।

कांग्रेस ने बटाद्रोबा की पूर्व विधायक शिबमोनी बोरा को उम्मीदवार घोषित किया है। बोरा की उम्मीदवारी का उद्देश्य नागांव-बटाद्रोबा क्षेत्र में पार्टी को एक परिचित राजनीतिक चेहरा देना है।

उपचुनाव की पृष्ठभूमि

यह उपचुनाव इसलिए आवश्यक हुआ क्योंकि कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने नागांव लोकसभा सीट छोड़ दी और बाद में 2026 के असम विधानसभा चुनाव लड़ने से पहले भाजपा में शामिल हो गए। गौरतलब है कि कांग्रेस ने यह सीट पिछले दो लोकसभा चुनावों में जीती थी, जिससे यह उसके लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न भी है।

यह ऐसे समय में आया है जब असम की राजनीति में एआईयूडीएफ और कांग्रेस दोनों के वोट बैंक के आपस में उलझने की ऐतिहासिक प्रवृत्ति रही है — और अजमल का मैदान में उतरना इस समीकरण को और जटिल बना देता है।

राजनीतिक समीकरण और असर

अजमल की उम्मीदवारी असम के कुछ मतदाता वर्गों के बीच एआईयूडीएफ की मज़बूत उपस्थिति को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस, दोनों के चुनावी गणित को बदल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार मुकाबले का रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि मतदाता एकजुट होते हैं या पारंपरिक विपक्षी वोट बंट जाता है।

भाजपा इस सीट पर अपना प्रभाव बढ़ाना चाहती है, जहाँ कांग्रेस की ऐतिहासिक पकड़ रही है। वहीं, कांग्रेस के लिए अजमल का प्रवेश एक अतिरिक्त चुनौती है जो उसके वोटों में सेंध लगा सकती है।

आगे क्या होगा

मतदान 6 अक्टूबर को होगा और मतगणना 9 अक्टूबर को की जाएगी। इस उपचुनाव के नतीजे 2029 के आम चुनाव से पहले मध्य असम के राजनीतिक मिज़ाज का एक अहम संकेत माने जाएंगे। तीनों दलों की रणनीति और वोटों के ध्रुवीकरण की दिशा ही यह तय करेगी कि नागांव में अगली बार कौन-सा झंडा लहराएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एआईयूडीएफ की अस्तित्व की लड़ाई भी है — पार्टी हाल के वर्षों में असम में सिकुड़ती राजनीतिक जगह को बचाने की कोशिश में है। असली पेच यह है कि अजमल की मौजूदगी कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक को बाँट सकती है, जो अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा के लिए फायदेमंद हो सकता है — ठीक वैसे ही जैसा 2016 और 2021 के असम विधानसभा चुनावों में देखा गया था। कांग्रेस के लिए यह सीट महज़ एक उपचुनाव नहीं, बल्कि पार्टी के पुनर्जीवन की परीक्षा भी है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि नागांव का नतीजा वास्तव में यह बताएगा कि असम में विपक्षी गठबंधन की रणनीति 2029 तक काम करेगी या नहीं।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नागांव लोकसभा उपचुनाव 2026 में कौन-कौन से उम्मीदवार मैदान में हैं?
तीन प्रमुख उम्मीदवार हैं — एआईयूडीएफ से बदरुद्दीन अजमल, भाजपा से पूर्व आईएएस अधिकारी देबाशीष शर्मा, और कांग्रेस से बटाद्रोबा की पूर्व विधायक शिबमोनी बोरा। इन तीनों के मैदान में होने से यह त्रिकोणीय मुकाबला बन गया है।
नागांव उपचुनाव क्यों हो रहा है?
यह उपचुनाव इसलिए ज़रूरी हुआ क्योंकि कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने नागांव लोकसभा सीट खाली कर दी और 2026 के असम विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हो गए।
नागांव उपचुनाव में मतदान और मतगणना कब होगी?
मतदान 6 अक्टूबर 2026 को होगा और मतगणना 9 अक्टूबर को की जाएगी। नामांकन की अंतिम तिथि 16 सितंबर और नामांकन वापसी की अंतिम तिथि 19 सितंबर है।
बदरुद्दीन अजमल का नागांव उपचुनाव में उतरना क्यों अहम है?
बदरुद्दीन अजमल एआईयूडीएफ के राष्ट्रीय प्रमुख और बिन्नाकांडी के विधायक हैं, जिनकी असम के कुछ मतदाता वर्गों में मज़बूत पकड़ है। उनकी उम्मीदवारी भाजपा और कांग्रेस दोनों के चुनावी समीकरण बदल सकती है, खासकर अगर मुकाबला ध्रुवीकरण की ओर जाता है।
इस उपचुनाव के नतीजे का असम की राजनीति पर क्या असर होगा?
विश्लेषकों के अनुसार यह नतीजा 2029 के आम चुनाव से पहले मध्य असम के राजनीतिक मिज़ाज का अहम संकेत देगा। यह यह भी तय करेगा कि असम में तीन-दलीय मुकाबले में वोटों का बिखराव किस दिशा में जाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. कल
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 5 महीने पहले