नागांव उपचुनाव: एआईयूडीएफ ने बदरुद्दीन अजमल को उतारा, BJP-कांग्रेस से त्रिकोणीय मुकाबला
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को पार्टी प्रमुख और बिन्नाकांडी के विधायक बदरुद्दीन अजमल को 6 अक्टूबर को होने वाले नागांव लोकसभा उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया। इस ऐलान के साथ ही यह उपचुनाव भारतीय जनता पार्टी (BJP), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच एक करारे त्रिकोणीय मुकाबले में तब्दील हो गया है।
उम्मीदवारी का ऐलान और नामांकन की समयसीमा
अजमल की उम्मीदवारी की घोषणा नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि — 16 सितंबर — से ठीक एक दिन पहले की गई, जिससे पार्टी की पसंद को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया। एआईयूडीएफ ने शुरू में संकेत दिया था कि रेजौल करीम सरकार उम्मीदवार हो सकते हैं, लेकिन अंततः पार्टी ने अपने सुप्रीमो को ही सीधे मैदान में उतारने का फैसला किया। उम्मीदवार 19 सितंबर तक नामांकन वापस ले सकते हैं।
तीनों मुख्य उम्मीदवार
भाजपा ने पूर्व आईएएस अधिकारी देबाशीष शर्मा को प्रत्याशी बनाया है, जिन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद 8 सितंबर को भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। प्रशासनिक अनुभव और नागांव क्षेत्र से उनकी परिचितता उनके प्रचार अभियान का मुख्य आधार हो सकती है।
कांग्रेस ने बटाद्रोबा की पूर्व विधायक शिबमोनी बोरा को उम्मीदवार घोषित किया है। बोरा की उम्मीदवारी का उद्देश्य नागांव-बटाद्रोबा क्षेत्र में पार्टी को एक परिचित राजनीतिक चेहरा देना है।
उपचुनाव की पृष्ठभूमि
यह उपचुनाव इसलिए आवश्यक हुआ क्योंकि कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने नागांव लोकसभा सीट छोड़ दी और बाद में 2026 के असम विधानसभा चुनाव लड़ने से पहले भाजपा में शामिल हो गए। गौरतलब है कि कांग्रेस ने यह सीट पिछले दो लोकसभा चुनावों में जीती थी, जिससे यह उसके लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न भी है।
यह ऐसे समय में आया है जब असम की राजनीति में एआईयूडीएफ और कांग्रेस दोनों के वोट बैंक के आपस में उलझने की ऐतिहासिक प्रवृत्ति रही है — और अजमल का मैदान में उतरना इस समीकरण को और जटिल बना देता है।
राजनीतिक समीकरण और असर
अजमल की उम्मीदवारी असम के कुछ मतदाता वर्गों के बीच एआईयूडीएफ की मज़बूत उपस्थिति को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस, दोनों के चुनावी गणित को बदल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार मुकाबले का रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि मतदाता एकजुट होते हैं या पारंपरिक विपक्षी वोट बंट जाता है।
भाजपा इस सीट पर अपना प्रभाव बढ़ाना चाहती है, जहाँ कांग्रेस की ऐतिहासिक पकड़ रही है। वहीं, कांग्रेस के लिए अजमल का प्रवेश एक अतिरिक्त चुनौती है जो उसके वोटों में सेंध लगा सकती है।
आगे क्या होगा
मतदान 6 अक्टूबर को होगा और मतगणना 9 अक्टूबर को की जाएगी। इस उपचुनाव के नतीजे 2029 के आम चुनाव से पहले मध्य असम के राजनीतिक मिज़ाज का एक अहम संकेत माने जाएंगे। तीनों दलों की रणनीति और वोटों के ध्रुवीकरण की दिशा ही यह तय करेगी कि नागांव में अगली बार कौन-सा झंडा लहराएगा।