26 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नागांव उपचुनाव: कांग्रेस का आरोप — एआईयूडीएफ असम में भाजपा की 'बी टीम' बनकर काम कर रही है

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नागांव उपचुनाव: कांग्रेस का आरोप — एआईयूडीएफ असम में भाजपा की 'बी टीम' बनकर काम कर रही है

सारांश

नागांव उपचुनाव से पहले असम की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस नेता रिपुन बोरा ने एआईयूडीएफ पर भाजपा की 'बी टीम' होने का सीधा आरोप लगाया है। एआईयूडीएफ के गठबंधन से इनकार और जल्द उम्मीदवार घोषणा से विपक्षी वोट बँट सकते हैं — और इसका सबसे बड़ा फायदा भाजपा को मिलने की आशंका है।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता रिपुन बोरा ने 25 अगस्त को गुवाहाटी में एआईयूडीएफ को असम में भाजपा की 'बी टीम' करार दिया।
एआईयूडीएफ अध्यक्ष बदरुद्दीन अजमल ने रेजाउल करीम सरकार को नागांव लोकसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित किया।
एआईयूडीएफ ने कांग्रेस के गठबंधन प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिससे विपक्षी वोट विभाजन की आशंका बढ़ी।
नागांव सीट कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे और भाजपा में शामिल होने के बाद रिक्त हुई।
खंडित विपक्ष से भाजपा को चुनावी लाभ मिलने की संभावना, उपचुनाव असम में विपक्षी एकता की परीक्षा बनेगा।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रिपुन बोरा ने 25 अगस्त को गुवाहाटी में आरोप लगाया कि ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) असम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की 'बी टीम' के रूप में काम कर रही है। उनके अनुसार, नागांव लोकसभा उपचुनाव से पहले एआईयूडीएफ द्वारा अपने उम्मीदवार की जल्द घोषणा का उद्देश्य विपक्षी वोटों को बाँटना और अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच कांग्रेस के पारंपरिक समर्थन आधार को कमज़ोर करना था।

बोरा का सीधा आरोप

बोरा ने गुवाहाटी में स्पष्ट शब्दों में कहा, 'यह जगजाहिर है कि असम में एआईयूडीएफ भाजपा की बी टीम है। भाजपा की सलाह पर एआईयूडीएफ ने इतनी जल्दी उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। यह उनकी रणनीति का हिस्सा है, ताकि अल्पसंख्यक वोटों को एआईयूडीएफ के पक्ष में एकजुट किया जा सके और अल्पसंख्यकों के बीच कांग्रेस के समर्थन आधार को तोड़ा जा सके।' उन्होंने यह भी कहा कि एआईयूडीएफ का यह कदम एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है, जो कथित तौर पर भाजपा को लाभ पहुँचाने के लिए बनाई गई है।

एआईयूडीएफ का उम्मीदवार और गठबंधन से इनकार

एआईयूडीएफ अध्यक्ष बदरुद्दीन अजमल ने पूर्व ऑल असम माइनॉरिटीज स्टूडेंट्स यूनियन के नेता रेजाउल करीम सरकार को नागांव लोकसभा उपचुनाव के लिए पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया है। इसके साथ ही एआईयूडीएफ ने उपचुनाव के लिए कांग्रेस के गठबंधन के प्रस्ताव को भी सिरे से खारिज कर दिया है। इस निर्णय से अब यह स्थिति बन गई है कि विपक्षी वोट दोनों दलों के बीच विभाजित हो सकते हैं, जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिलने की संभावना है।

नागांव सीट क्यों खाली हुई

नागांव लोकसभा सीट तब रिक्त हुई जब कांग्रेस के मौजूदा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने संसद से इस्तीफा दे दिया और बाद में भाजपा में शामिल हो गए। गौरतलब है कि यह सीट अल्पसंख्यक मतदाताओं की महत्वपूर्ण उपस्थिति के कारण राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील मानी जाती है।

असम की राजनीति पर असर

यह उपचुनाव असम में विपक्षी एकता की असली परीक्षा बनता जा रहा है। एआईयूडीएफ के अलग चुनाव लड़ने के फैसले के बाद कांग्रेस के अपना अभियान तेज़ करने की उम्मीद है। आलोचकों का कहना है कि खंडित विपक्ष की यह स्थिति भाजपा के लिए अनुकूल साबित हो सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब असम में कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच अल्पसंख्यक वोटों के वितरण को लेकर पहले से ही राजनीतिक मतभेद गहरे हो रहे हैं।

आगे क्या होगा

नागांव उपचुनाव पर सभी राजनीतिक दलों की नज़रें टिकी हैं। इसका परिणाम न केवल इस सीट का भविष्य तय करेगा, बल्कि असम में कांग्रेस-एआईयूडीएफ विभाजन के चुनावी प्रभाव और विपक्षी गोलबंदी की क्षमता को भी उजागर करेगा। भाजपा इस उपचुनाव में अपनी स्थिति और मज़बूत करने की कोशिश में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह एआईयूडीएफ की अपनी राजनीतिक ज़मीन बचाने की कोशिश है। नागांव जैसी अल्पसंख्यक-बहुल सीट पर विपक्ष का बिखराव भाजपा के लिए बिना प्रयास के जीत का रास्ता खोल सकता है — और यह पैटर्न असम में पहले भी देखा जा चुका है। मुख्यधारा की कवरेज जो बात चूक जाती है, वह यह है कि कांग्रेस खुद भी इस सीट पर अल्पसंख्यक मतदाताओं का भरोसा दोबारा जीतने में संघर्ष कर रही है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस ने एआईयूडीएफ को भाजपा की 'बी टीम' क्यों कहा?
कांग्रेस नेता रिपुन बोरा का आरोप है कि एआईयूडीएफ ने नागांव उपचुनाव के लिए भाजपा की सलाह पर जल्दी उम्मीदवार घोषित किया, ताकि अल्पसंख्यक वोट बँट जाएँ और कांग्रेस कमज़ोर हो। उनके अनुसार, यह रणनीति अंततः भाजपा को फायदा पहुँचाती है।
नागांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव क्यों हो रहा है?
नागांव सीट तब रिक्त हुई जब कांग्रेस के सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने संसद से इस्तीफा दिया और भाजपा में शामिल हो गए। इसी के बाद इस सीट पर उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई।
एआईयूडीएफ ने नागांव से किसे उम्मीदवार बनाया है?
एआईयूडीएफ अध्यक्ष बदरुद्दीन अजमल ने पूर्व ऑल असम माइनॉरिटीज स्टूडेंट्स यूनियन के नेता रेजाउल करीम सरकार को नागांव लोकसभा उपचुनाव के लिए पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया है।
एआईयूडीएफ ने कांग्रेस के गठबंधन प्रस्ताव को क्यों ठुकराया?
एआईयूडीएफ ने उपचुनाव के लिए कांग्रेस के गठबंधन के आह्वान को खारिज कर दिया और अलग से चुनाव लड़ने का फैसला किया। इस निर्णय के पीछे की वजह एआईयूडीएफ ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं की है।
नागांव उपचुनाव असम की राजनीति के लिए क्यों अहम है?
यह उपचुनाव असम में विपक्षी एकता की परीक्षा है। यदि कांग्रेस और एआईयूडीएफ अलग-अलग लड़ते हैं, तो अल्पसंख्यक वोट बँट सकते हैं और भाजपा को फायदा मिल सकता है। इसका नतीजा असम में भविष्य की राजनीतिक गोलबंदी की दिशा तय करेगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले