नागांव उपचुनाव: कांग्रेस का आरोप — एआईयूडीएफ असम में भाजपा की 'बी टीम' बनकर काम कर रही है
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रिपुन बोरा ने 25 अगस्त को गुवाहाटी में आरोप लगाया कि ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) असम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की 'बी टीम' के रूप में काम कर रही है। उनके अनुसार, नागांव लोकसभा उपचुनाव से पहले एआईयूडीएफ द्वारा अपने उम्मीदवार की जल्द घोषणा का उद्देश्य विपक्षी वोटों को बाँटना और अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच कांग्रेस के पारंपरिक समर्थन आधार को कमज़ोर करना था।
बोरा का सीधा आरोप
बोरा ने गुवाहाटी में स्पष्ट शब्दों में कहा, 'यह जगजाहिर है कि असम में एआईयूडीएफ भाजपा की बी टीम है। भाजपा की सलाह पर एआईयूडीएफ ने इतनी जल्दी उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। यह उनकी रणनीति का हिस्सा है, ताकि अल्पसंख्यक वोटों को एआईयूडीएफ के पक्ष में एकजुट किया जा सके और अल्पसंख्यकों के बीच कांग्रेस के समर्थन आधार को तोड़ा जा सके।' उन्होंने यह भी कहा कि एआईयूडीएफ का यह कदम एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है, जो कथित तौर पर भाजपा को लाभ पहुँचाने के लिए बनाई गई है।
एआईयूडीएफ का उम्मीदवार और गठबंधन से इनकार
एआईयूडीएफ अध्यक्ष बदरुद्दीन अजमल ने पूर्व ऑल असम माइनॉरिटीज स्टूडेंट्स यूनियन के नेता रेजाउल करीम सरकार को नागांव लोकसभा उपचुनाव के लिए पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया है। इसके साथ ही एआईयूडीएफ ने उपचुनाव के लिए कांग्रेस के गठबंधन के प्रस्ताव को भी सिरे से खारिज कर दिया है। इस निर्णय से अब यह स्थिति बन गई है कि विपक्षी वोट दोनों दलों के बीच विभाजित हो सकते हैं, जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिलने की संभावना है।
नागांव सीट क्यों खाली हुई
नागांव लोकसभा सीट तब रिक्त हुई जब कांग्रेस के मौजूदा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने संसद से इस्तीफा दे दिया और बाद में भाजपा में शामिल हो गए। गौरतलब है कि यह सीट अल्पसंख्यक मतदाताओं की महत्वपूर्ण उपस्थिति के कारण राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील मानी जाती है।
असम की राजनीति पर असर
यह उपचुनाव असम में विपक्षी एकता की असली परीक्षा बनता जा रहा है। एआईयूडीएफ के अलग चुनाव लड़ने के फैसले के बाद कांग्रेस के अपना अभियान तेज़ करने की उम्मीद है। आलोचकों का कहना है कि खंडित विपक्ष की यह स्थिति भाजपा के लिए अनुकूल साबित हो सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब असम में कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच अल्पसंख्यक वोटों के वितरण को लेकर पहले से ही राजनीतिक मतभेद गहरे हो रहे हैं।
आगे क्या होगा
नागांव उपचुनाव पर सभी राजनीतिक दलों की नज़रें टिकी हैं। इसका परिणाम न केवल इस सीट का भविष्य तय करेगा, बल्कि असम में कांग्रेस-एआईयूडीएफ विभाजन के चुनावी प्रभाव और विपक्षी गोलबंदी की क्षमता को भी उजागर करेगा। भाजपा इस उपचुनाव में अपनी स्थिति और मज़बूत करने की कोशिश में है।