एआईयूडीएफ का बड़ा आरोप: कांग्रेस विधायक बेबी बेगम ने वित्तीय सहायता लेकर पार्टी से विश्वासघात किया
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) ने 12 जुलाई को धुबरी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर आरोप लगाए कि धुबरी निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस विधायक बेबी बेगम एआईयूडीएफ के कथित वित्तीय समर्थन से चुनाव जीती थीं और बाद में पार्टी के हितों के साथ विश्वासघात किया। पार्टी ने अपने दावों के समर्थन में व्हाट्सएप बातचीत और फोनपे लेनदेन रिकॉर्ड समेत दस्तावेज़ी साक्ष्य प्रस्तुत करने का दावा किया।
मुख्य आरोप क्या हैं
एआईयूडीएफ की बिलासिपारा कार्यकारी अध्यक्ष एवं महिला विंग की अध्यक्ष सबाना अख्तर ने मीडिया के सामने आरोप लगाया कि बेबी बेगम ने जिला परिषद सदस्य रहते हुए एआईयूडीएफ से बड़ी रकम की वित्तीय सहायता मांगी थी। यह सहायता कथित तौर पर जिला परिषद अध्यक्ष के चुनाव में एआईयूडीएफ को समर्थन देने के बदले में ली गई थी।
सबाना अख्तर के अनुसार, बेबी बेगम ने जिला परिषद अध्यक्ष के चुनाव के संबंध में उनसे कई बार संपर्क किया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि वे स्वयं बेबी बेगम और उनके पति ऐनल हक के साथ धुबरी से तत्कालीन एआईयूडीएफ विधायक नजरुल हक से मिलने गई थीं।
साक्ष्य का दावा
एआईयूडीएफ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में व्हाट्सएप संदेशों और फोनपे लेनदेन के रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने का दावा किया, जिन्हें पार्टी ने वित्तीय लेन-देन का प्रमाण बताया। गौरतलब है कि ये आरोप अभी तक न्यायिक जाँच के दायरे में नहीं आए हैं और बेबी बेगम की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब असम में एआईयूडीएफ और कांग्रेस के बीच राजनीतिक संबंध पहले से ही जटिल रहे हैं। दोनों दल अल्पसंख्यक-बहुल क्षेत्रों में एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी रहे हैं, और इस तरह के आरोप गठबंधन की राजनीति में दरार की ओर इशारा करते हैं। धुबरी जिला परिषद अध्यक्ष चुनाव इस विवाद का केंद्र बिंदु है।
आगे क्या होगा
एआईयूडीएफ ने संकेत दिया है कि वह इस मामले को आगे उठाएगी। बेबी बेगम की प्रतिक्रिया और कांग्रेस का आधिकारिक रुख इस विवाद की दिशा तय करेगा। यदि प्रस्तुत साक्ष्य सत्यापित होते हैं, तो यह मामला असम की क्षेत्रीय राजनीति में व्यापक हलचल पैदा कर सकता है।