12 जुलाई 2026
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रामदेव के 'हिंदू राष्ट्र' बयान पर मुस्लिम समुदाय का पलटवार: 'देश संविधान से चलेगा, हम नहीं डरते'

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रामदेव के 'हिंदू राष्ट्र' बयान पर मुस्लिम समुदाय का पलटवार: 'देश संविधान से चलेगा, हम नहीं डरते'

सारांश

बाबा रामदेव के दिल्ली विश्वविद्यालय में दिए 'हिंदू राष्ट्र' और 'साझे पूर्वज' वाले बयान पर तेलंगाना के मुस्लिम संगठनों ने कड़ा जवाब दिया। मौलाना सिराज खान ने कहा — यह देश संविधान से चलेगा, किसी के बयानों से नहीं।

मुख्य बातें

बाबा रामदेव ने 12 जुलाई को दिल्ली विश्वविद्यालय में कहा कि मुसलमानों को हिंदू राष्ट्र से डरने की ज़रूरत नहीं, सभी के पूर्वज एक हैं।
रामदेव ने दावा किया कि मुसलमान भी सनातनी हैं और देश की असल कौम द्रविड़ियन है।
तहरीक मुस्लिम शब्बान, तेलंगाना के अध्यक्ष मौलाना मुस्ताक मलिक ने रामदेव को 'विभाजनकारी' बताते हुए बयान को पूरी तरह खारिज किया।
मौलाना सिराज खान ने कहा — यह देश डॉ.
अंबेडकर के संविधान से चलेगा, न कि किसी के उपदेश से।
मौलाना अरशद मदनी के हवाले से इस्लामी मान्यता के आधार पर रामदेव के 'साझे पूर्वज' तर्क को अस्वीकार किया गया।

योग गुरु बाबा रामदेव ने रविवार, 12 जुलाई को दिल्ली विश्वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि मुसलमानों को हिंदू राष्ट्र से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि अलग-अलग मज़हब होने के बावजूद सभी के पूर्वज एक ही हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि मुसलमान भी सनातनी हैं और उनके पूर्वज सनातन धर्म का पालन करते थे। इस बयान पर तेलंगाना सहित विभिन्न मुस्लिम संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

रामदेव का बयान और उसकी पृष्ठभूमि

दिल्ली विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में बाबा रामदेव ने कहा कि भारत की असल कौम द्रविड़ियन है और बाहर से आए लोगों को अपने मूल से जुड़ना चाहिए। उनके अनुसार, धर्म के आधार पर भेद होने के बावजूद पूर्वजों की साझा विरासत एकता की नींव है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में सांप्रदायिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों पर बहस तेज़ है।

मुस्लिम संगठनों की प्रतिक्रिया

तहरीक मुस्लिम शब्बान, तेलंगाना के अध्यक्ष मौलाना मुस्ताक मलिक ने रामदेव के बयान को सिरे से खारिज करते हुए कहा, 'हम बाबा रामदेव जैसे विभाजनकारी व्यक्ति को पूरी तरह से नकारते हैं। हम देश में भाईचारे और प्रेम का संदेश देते हैं, लेकिन इस तरह के बयान नफरत फैलाने का काम करते हैं। यह देश को प्रगति की नहीं, विनाश की ओर ले जाएगा।'

मौलाना सिराज खान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुसलमान किसी से नहीं डरते। उन्होंने कहा, 'यह देश डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान के अनुसार चलेगा — किसी व्यक्ति विशेष के बयानों से नहीं। जिन पर खुद कानूनी आरोप और मामले हों, उन्हें दूसरों को उपदेश देने का नैतिक अधिकार नहीं है।'

इस्लामी मान्यता का संदर्भ

मौलाना सिराज खान ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के हवाले से कहा कि इस्लामी मान्यता के अनुसार पैगंबर पृथ्वी पर पहले इंसान थे और उन्हें पूरी मानवता का पूर्वज माना जाता है। इस धार्मिक आधार पर उन्होंने रामदेव के 'साझे पूर्वज' वाले तर्क को अस्वीकार किया।

आगे क्या

यह विवाद संविधान, धार्मिक पहचान और राष्ट्रीय एकता जैसे बुनियादी सवालों को एक बार फिर केंद्र में ले आया है। गौरतलब है कि इस तरह के बयान और उन पर होने वाली प्रतिक्रियाएँ देश के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित करती रही हैं। फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक कानूनी कदम उठाने की सूचना नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एकतरफा धार्मिक ढाँचे में दूसरे समुदाय की पहचान को परिभाषित करने की कोशिश है — जो स्वयं विवादास्पद है। मुस्लिम संगठनों का संविधान की ओर लौटना एक सुचिंतित राजनीतिक प्रतिक्रिया है, जो बहस को धर्म से कानून की ज़मीन पर ले आती है। असली सवाल यह है कि क्या इस तरह के सार्वजनिक बयान राष्ट्रीय एकता को मज़बूत करते हैं या सामाजिक विभाजन को और गहरा करते हैं — और मुख्यधारा की कवरेज इस फ़र्क को अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाबा रामदेव ने दिल्ली विश्वविद्यालय में क्या कहा?
बाबा रामदेव ने 12 जुलाई को दिल्ली विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में कहा कि मुसलमानों को हिंदू राष्ट्र से डरने की ज़रूरत नहीं क्योंकि सभी के पूर्वज एक हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि मुसलमान भी सनातनी हैं और देश की असल कौम द्रविड़ियन है।
मुस्लिम समुदाय ने रामदेव के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
तेलंगाना के मौलाना मुस्ताक मलिक ने रामदेव को 'विभाजनकारी' बताते हुए उनके बयान को पूरी तरह खारिज किया। मौलाना सिराज खान ने कहा कि मुसलमान नहीं डरते और यह देश संविधान से चलेगा, किसी के उपदेश से नहीं।
मौलाना सिराज खान ने संविधान का ज़िक्र क्यों किया?
मौलाना सिराज खान ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र है और किसी व्यक्ति विशेष के बयान देश की दिशा तय नहीं करते। उन्होंने रामदेव पर खुद कानूनी आरोपों का भी उल्लेख किया।
इस्लामी मान्यता के अनुसार 'साझे पूर्वज' के दावे पर क्या कहा गया?
मौलाना अरशद मदनी के हवाले से बताया गया कि इस्लामी मान्यता के अनुसार पैगंबर पृथ्वी पर पहले इंसान थे और उन्हें पूरी मानवता का पूर्वज माना जाता है। इस आधार पर रामदेव के 'सनातन पूर्वज' वाले तर्क को अस्वीकार किया गया।
यह विवाद किस व्यापक बहस से जुड़ा है?
यह विवाद भारत में धार्मिक पहचान, संवैधानिक मूल्यों और सांप्रदायिक सौहार्द पर चल रही बहस का हिस्सा है। विभिन्न समुदायों के बीच 'हिंदू राष्ट्र' की अवधारणा को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण हैं और यह मुद्दा राजनीतिक व सामाजिक दोनों स्तरों पर संवेदनशील बना हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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