12 जुलाई 2026
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बाबा रामदेव का दिल्ली विश्वविद्यालय में बयान: 'मजहब अलग, पर पूर्वज एक — मुसलमानों को कोई खतरा नहीं'

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बाबा रामदेव का दिल्ली विश्वविद्यालय में बयान: 'मजहब अलग, पर पूर्वज एक — मुसलमानों को कोई खतरा नहीं'

सारांश

दिल्ली विश्वविद्यालय में शंकराचार्य के 84वें प्राकट्य महोत्सव पर बाबा रामदेव ने कहा कि मजहब अलग होने के बावजूद सभी भारतीयों के पूर्वज एक हैं — और हिंदू राष्ट्र की राह में मुसलमानों को कोई खतरा नहीं। एकता का संदेश और संकल्प, एक ही मंच से।

मुख्य बातें

बाबा रामदेव ने 12 जुलाई 2026 को दिल्ली विश्वविद्यालय में कहा कि सभी भारतीयों के पूर्वज एक हैं, मजहब चाहे अलग हों।
उन्होंने मुसलमानों को स्पष्ट किया कि हिंदू राष्ट्र के नाम पर उन्हें कोई भय नहीं होना चाहिए।
कार्यक्रम जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज का 84वाँ प्राकट्य महोत्सव था, जिसे 'राष्ट्रोत्कर्ष दिवस' के रूप में मनाया गया।
रामदेव ने देश के 5 लाख से अधिक मंदिरों में से 500-1,000 मंदिरों को गुरुकुल और गौशाला चलाने का आह्वान किया।
समारोह में दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.
योगेश सिंह सहित संत-महात्मा, विद्वान और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

योग गुरु बाबा रामदेव ने 12 जुलाई 2026 को दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में आयोजित एक समारोह में कहा कि देश में मजहब चाहे अलग-अलग हों, लेकिन सभी भारतीयों के पूर्वज एक ही हैं। हिंदू राष्ट्र की अवधारणा पर चर्चा करते हुए उन्होंने मुसलमानों को स्पष्ट रूप से आश्वस्त किया कि उन्हें किसी प्रकार के भय की आवश्यकता नहीं है।

कार्यक्रम का संदर्भ

यह कार्यक्रम जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज का 84वाँ प्राकट्य महोत्सव था, जिसे 'राष्ट्रोत्कर्ष दिवस' के रूप में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। समारोह में दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह, आचार्य धर्मवीर, आदिशंकराचार्य सनातन सेवा संस्थानम् फाउंडेशन के संदीप गर्ग सहित विभिन्न धर्मसंघों, पीठ परिषदों, आदित्य वाहिनी और आनंद वाहिनी के पदाधिकारी, देश-विदेश से आए संत-महात्मा, विद्वान एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

रामदेव का मुख्य वक्तव्य

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बाबा रामदेव ने 2009 के एक कार्यक्रम का हवाला दिया और कहा, 'किसी भी मुसलमान को डरने की जरूरत नहीं है। हमारे मजहब अलग हो सकते हैं लेकिन हमारे पूर्वज एक ही हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रवेश द्वार पर भी यही संदेश अंकित है कि हिंदू राष्ट्र के नाम पर किसी को भयभीत होने की आवश्यकता नहीं।

रामदेव ने आगे कहा, 'मुसलमानों को डराया जाता है कि भारत हिंदू राष्ट्र बन गया तो वे कहाँ जाएँगे। मैं मुसलमानों से कहना चाहता हूँ कि वे अपने पूर्वजों की परंपरा को अपनाएँ। जो अपने पिता का नहीं हुआ, वह किसी का नहीं हो सकता। आप अपने पूर्वजों, ऋषि-मुनियों की बात को मानें। दाढ़ी रखें, मूँछ कटाएँ, जैसे भी वस्त्र पहनें लेकिन चरित्र अपने पूर्वजों जैसा रखें।'

गुरुकुल और सनातन संस्कृति पर जोर

बाबा रामदेव ने गुरुकुल व्यवस्था को पुनर्जीवित करने पर बल देते हुए कहा कि हर घर एक गुरुकुल होना चाहिए। उनके अनुसार अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को ऐसे संस्कार दें जिससे वे धर्म के मार्ग से कभी न भटकें। उन्होंने बताया कि देश में 5 लाख से अधिक मंदिर हैं, जिनमें से 500 से 1,000 मंदिर गुरुकुल और गौशाला दोनों संचालित कर सकते हैं। राम मंदिर, काशी विश्वनाथ, वैष्णो देवी, बाँके बिहारी और सिद्धि विनायक जैसे प्रमुख मंदिरों को इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया।

हिंदू राष्ट्र निर्माण का संकल्प

रामदेव ने समारोह में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा, 'हम सभी यहाँ एकजुट हुए हैं, इसलिए गुरुदेव का जो भी आदेश होगा, उसे मानना होगा। हम भारत को भव्य हिंदू राष्ट्र बनाएँगे, इसी संकल्प के साथ आगे बढ़ना है।' कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने सनातन संस्कृति के संरक्षण और हिंदू राष्ट्र निर्माण के संकल्प को दोहराया। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब देश में सांप्रदायिक सौहार्द और राष्ट्रीय पहचान को लेकर सार्वजनिक विमर्श तेज़ हो रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक अंतर्निहित असहजता है — यह मुसलमानों को उनकी धार्मिक पहचान की जगह एक निर्धारित सांस्कृतिक पहचान में समाहित करने की शर्त पर आश्वासन देता है। 'दाढ़ी रखें, चरित्र पूर्वजों जैसा रखें' जैसी बातें एकता का निमंत्रण कम और एक सांस्कृतिक अपेक्षा अधिक लगती हैं। मुख्यधारा की कवरेज प्रायः इस बारीकी को नज़रअंदाज़ कर देती है। असली सवाल यह है कि क्या यह संवाद बराबरी के आधार पर है, या एक पक्ष की शर्तों पर।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाबा रामदेव ने दिल्ली विश्वविद्यालय में क्या कहा?
बाबा रामदेव ने 12 जुलाई 2026 को दिल्ली विश्वविद्यालय में कहा कि सभी भारतीयों के मजहब अलग हो सकते हैं लेकिन उनके पूर्वज एक ही हैं। उन्होंने मुसलमानों को आश्वस्त किया कि हिंदू राष्ट्र के नाम पर उन्हें किसी प्रकार का भय नहीं होना चाहिए।
यह कार्यक्रम किस अवसर पर आयोजित हुआ था?
यह कार्यक्रम जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज का 84वाँ प्राकट्य महोत्सव था, जिसे 'राष्ट्रोत्कर्ष दिवस' के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में मनाया गया।
रामदेव ने मुसलमानों से क्या अपील की?
रामदेव ने मुसलमानों से अपील की कि वे अपने पूर्वजों की परंपरा अपनाएँ और ऋषि-मुनियों की शिक्षाओं का अनुसरण करें। उन्होंने कहा कि वेशभूषा चाहे जो हो, चरित्र पूर्वजों जैसा होना चाहिए।
बाबा रामदेव ने गुरुकुल और मंदिरों के बारे में क्या कहा?
रामदेव ने कहा कि हर घर एक गुरुकुल होना चाहिए और देश के 5 लाख से अधिक मंदिरों में से 500 से 1,000 मंदिर गुरुकुल व गौशाला दोनों चला सकते हैं। राम मंदिर, काशी विश्वनाथ और वैष्णो देवी जैसे प्रमुख मंदिरों को इस दिशा में आगे आना चाहिए।
इस समारोह में कौन-कौन उपस्थित थे?
समारोह में दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह, आचार्य धर्मवीर, संदीप गर्ग (आदिशंकराचार्य सनातन सेवा संस्थानम् फाउंडेशन), विभिन्न धर्मसंघों व पीठ परिषदों के पदाधिकारी, देश-विदेश से आए संत-महात्मा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
राष्ट्र प्रेस
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