ओवैसी के 'हिंदुत्व राष्ट्रवाद' बयान पर तेलंगाना भाजपा का पलटवार, रामचंदर राव बोले— राष्ट्रविरोधी विचारधारा
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने 4 जुलाई 2026 को हैदराबाद में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के 'हिंदुत्व राष्ट्रवाद' संबंधी बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि ओवैसी के वक्तव्य राजनीतिक प्रेरणा से प्रभावित हैं और राष्ट्रविरोधी विचारधारा को बढ़ावा देते हैं। यह विवाद छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के उस फैसले के बाद उभरा है, जिसमें सरकारी स्कूलों में छात्रों को किसी विशेष धार्मिक प्रार्थना के लिए बाध्य न करने का निर्देश दिया गया था।
विवाद की पृष्ठभूमि
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सरकारी स्कूलों में किसी भी छात्र को किसी विशेष धार्मिक प्रार्थना में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। इस फैसले के बाद ओवैसी ने 'हिंदुत्व राष्ट्रवाद' की अवधारणा पर सवाल उठाते हुए इसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और संघ परिवार के 'सांस्कृतिक राष्ट्रवाद' का हिस्सा बताया। उन्होंने दावा किया कि यह विचारधारा भारतीय राष्ट्रवाद की मूल भावना के विरुद्ध है।
भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया
रामचंदर राव ने ओवैसी के तर्क को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि भारत केवल किसी एक विचारधारा या धर्म का देश नहीं है, बल्कि यहाँ सभी धर्मों और संस्कृतियों को समान सम्मान दिया जाता है। उनके अनुसार, भारत की परंपरा सदा से सहिष्णुता और समावेशिता की रही है, जहाँ विभिन्न धर्मों को पनपने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि 'हिंदू राष्ट्र' और 'सांस्कृतिक राष्ट्रवाद' की अवधारणाओं को जानबूझकर गलत रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
रामचंदर राव ने यह भी कहा कि भारत की सांस्कृतिक जड़ें अत्यंत प्राचीन और सुदृढ़ हैं। उनके अनुसार, हिंदू धर्म ने हमेशा अन्य धर्मों को स्थान और स्वतंत्रता देने की परंपरा निभाई है, इसीलिए भारत को एक समावेशी और बहुलतावादी समाज के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा में धर्मनिरपेक्षता और सहअस्तित्व दोनों समाहित हैं।
न्यायालय के फैसले पर भाजपा का रुख
रामचंदर राव ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के आदेश को सही संदर्भ में समझे जाने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्कूलों में किसी भी प्रकार की धार्मिक बाध्यता उचित नहीं है और न्यायालय ने इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय सुनाया है। उनके अनुसार, ऐसे संवेदनशील मुद्दों को राजनीतिक रंग देने से बचना चाहिए।
मनरेगा विवाद पर भी बोले रामचंदर राव
इसी दौरान रामचंदर राव ने तेलंगाना सरकार द्वारा ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम 'वीबी-जी राम' के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय जाने के फैसले पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अदालत का रुख करना राज्य सरकार का अधिकार है, किंतु यह भी स्मरण रहे कि यह कार्यक्रम नागरिकों का अधिकार है। उन्होंने दावा किया कि इस योजना में काम के दिनों की संख्या और मेहनताना बढ़ाने सहित कई सुधार किए गए हैं तथा कार्यों का दायरा भी विस्तारित किया गया है।
रामचंदर राव ने आरोप लगाया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के नेतृत्व वाली तेलंगाना सरकार केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) को इस योजना का श्रेय नहीं देना चाहती, इसीलिए एक ओर वह अदालत का दरवाजा खटखटा रही है, जबकि दूसरी ओर उसकी कैबिनेट इसे लागू करने का निर्णय ले चुकी है। यह विरोधाभास, उनके अनुसार, राजनीतिक दोहरेपन का उदाहरण है।
आगे क्या
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देश में धार्मिक शिक्षा और राष्ट्रवाद की परिभाषा को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो रही है। ओवैसी और भाजपा के बीच यह वैचारिक टकराव आने वाले समय में और गहरा हो सकता है, विशेषकर जब तेलंगाना में विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में दोनों दल अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं।