एयर इंडिया ने 300 से अधिक पायलटों के ड्रग टेस्ट किए, नियामक सीमा से आगे बढ़कर सुरक्षा अभियान
सारांश
मुख्य बातें
एयर इंडिया ने 18 अगस्त 2026 को घोषणा की कि उसने स्वेच्छा से एक व्यापक पायलट ड्रग टेस्टिंग प्रोग्राम शुरू किया है, जो भारतीय नागरिक उड्डयन नियामक की अनिवार्य आवश्यकताओं से कहीं अधिक है। टाटा ग्रुप की इस एयरलाइन ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि यह कदम यात्री सुरक्षा और व्यावसायिकता के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता का हिस्सा है। रिपोर्टों के अनुसार, अब तक 300 से अधिक पायलटों की जाँच की जा चुकी है।
मुख्य घटनाक्रम
एयरलाइन ने अपने बयान में कहा, "सुरक्षा और प्रोफेशनलिज्म के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता के तहत, एयर इंडिया ने नियामक जरूरतों से आगे बढ़कर सभी पायलटों के लिए स्वेच्छा से एक टेस्टिंग प्रोग्राम शुरू किया है।" एयरलाइन ने सभी पक्षों से अनुरोध किया कि प्रक्रिया पूरी होने और तथ्यों की पुष्टि से पहले किसी भी अपुष्ट जानकारी के आधार पर अटकलें न लगाई जाएँ।
फुकेत-दिल्ली फ्लाइट घटना की पृष्ठभूमि
यह अभियान तब शुरू हुआ जब फुकेत-दिल्ली फ्लाइट के पायलट-इन-कमांड के विमान लैंड करने के बाद कराए गए दो यूरिन टेस्ट में विफल होने की बात सामने आई। रिपोर्टों के अनुसार, उनके शरीर में मारिजुआना भी कथित तौर पर पाया गया। इस घटना के बाद टाटा ग्रुप की एयरलाइन ने एक नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत सभी पायलटों के लिए ड्रग टेस्ट अनिवार्य कर दिए।
दो और पायलट प्रारंभिक जाँच में विफल
सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्टों के अनुसार, इस सप्ताह के शुरू में एयर इंडिया के दो और पायलट एयरलाइन द्वारा किए गए प्रारंभिक ड्रग टेस्ट में विफल हो गए। हालाँकि, अंतिम परिणामों की पुष्टि अभी बाकी है। सूत्रों के अनुसार, पुष्टि होने तक दोनों पायलटों को ड्यूटी से हटा दिया गया है। गौरतलब है कि ड्रग टेस्ट के अंतिम परिणाम आने में सामान्यतः 24 से 48 घंटे का समय लगता है।
एयर इंडिया की अपील
एयरलाइन ने मीडिया और अन्य संबंधित पक्षों से स्पष्ट रूप से कहा कि "बिना पुष्टि वाली या बिना आधार वाली जानकारी के आधार पर कोई अटकलें न लगाई जाएँ और न ही कोई रिपोर्टिंग की जाए।" एयरलाइन ने यह भी कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले पूरी प्रक्रिया और तथ्यों की पुष्टि का इंतजार करना उचित होगा।
आगे क्या होगा
परीक्षण प्रक्रिया अभी जारी है और शेष पायलटों की जाँच के परिणाम आने बाकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे अभियान के नतीजे भारतीय विमानन क्षेत्र में पायलट स्क्रीनिंग के मानकों को नए सिरे से परिभाषित कर सकते हैं।