एयर इंडिया ने सभी पायलटों के लिए अनिवार्य ड्रग स्क्रीनिंग शुरू की, फुकेट-दिल्ली फ्लाइट हादसे के बाद बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
एयर इंडिया ने 13 अगस्त 2026 से अपने समूह के सभी पायलटों के लिए अनिवार्य ड्रग और प्रतिबंधित दवाओं की स्क्रीनिंग लागू कर दी है — यह कदम फुकेट से नई दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक उड़ान में गंभीर टर्बुलेंस और अचानक ऊँचाई में गिरावट की घटना के बाद उठाया गया है। सूत्रों के अनुसार, उस उड़ान के पायलट-इन-कमांड के बारे में जानकारी मिली थी कि वे नींद संबंधी समस्या के लिए दवा ले रहे थे, जिसके बाद यह मामला विमानन सुरक्षा के दायरे में आ गया।
स्क्रीनिंग कार्यक्रम की मुख्य बातें
टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया ने पायलटों को संबोधित एक आधिकारिक पत्र में स्पष्ट किया है कि यह स्क्रीनिंग एयर इंडिया समूह के सभी पायलटों पर लागू होगी — बिना किसी अपवाद के। पत्र में कहा गया है, 'हमने यह निर्णय लिया है कि समूह के सभी पायलटों की उन दवाओं और पदार्थों के लिए पूर्ण स्क्रीनिंग की जाए, जिनकी अनुमति वर्तमान विमानन नियमों के अंतर्गत नहीं है।'
यह परीक्षण तीन प्रमुख स्थानों पर आयोजित किया जाएगा — गुरुग्राम स्थित प्रशिक्षण अकादमी में प्रशिक्षण सत्रों के दौरान, उड़ानों के बाद फ्लाइट ब्रीफिंग सेंटरों व एयर इंडिया कार्यालयों में, तथा विभिन्न परिचालन बेस पर निर्धारित स्थानों पर।
फुकेट-दिल्ली घटना की पृष्ठभूमि
सूत्रों के अनुसार, पिछले सप्ताह फुकेट से नई दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान के दौरान विमान को अचानक ऊँचाई में गिरावट का सामना करना पड़ा। इस घटना के बाद यह जानकारी सामने आई कि संबंधित पायलट-इन-कमांड नींद की समस्या के लिए दवा ले रहे थे — एक ऐसा तथ्य जिसने विमानन सुरक्षा विशेषज्ञों और नियामकों का ध्यान खींचा। गौरतलब है कि विमानन नियमों के तहत कई नींद की दवाएँ उड़ान से पहले और दौरान प्रतिबंधित होती हैं।
नियामकीय अनुपालन से आगे का कदम
एयर इंडिया ने स्पष्ट किया है कि वह पहले से ही नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा निर्धारित सभी मानकों का पालन करती है, जो यूरोप और अमेरिका जैसे प्रमुख विमानन बाज़ारों की प्रक्रियाओं के अनुरूप हैं। हालाँकि, एयरलाइन ने इस बार मौजूदा नियामकीय आवश्यकताओं से आगे बढ़कर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाने का निर्णय लिया है।
कंपनी के संचार में यह भी उल्लेख किया गया है कि हाल के दिनों में कई पायलटों ने स्वयं सुरक्षा और पेशेवर मानकों को लेकर अपनी चिंताएँ और सुझाव साझा किए हैं — जो इस पहल के पीछे एक आंतरिक दबाव का भी संकेत देता है।
यात्री विश्वास और कंपनी की प्राथमिकता
एयर इंडिया ने इस पहल को केवल नियामकीय अनुपालन तक सीमित नहीं बताया। कंपनी का कहना है कि वर्षों से उसने अपने पायलटों और कर्मचारियों की पेशेवर क्षमता और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता के दम पर अपनी पहचान बनाई है। यात्रियों, निवेशकों और अन्य हितधारकों का भरोसा बनाए रखना कंपनी की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
पायलटों को यह भी बताया गया है कि स्क्रीनिंग कार्यक्रम से जुड़े किसी भी प्रश्न या स्पष्टीकरण के लिए वे अपने चीफ पायलट या बेस मैनेजर से संपर्क कर सकते हैं।
आगे क्या होगा
यह स्क्रीनिंग कार्यक्रम तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका है और भारतीय नागर विमानन क्षेत्र में पायलट स्वास्थ्य निगरानी के संदर्भ में एक नई मिसाल कायम कर सकता है। विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर एयरलाइनें पायलट फिटनेस प्रोटोकॉल को कड़ा कर रही हैं। DGCA की आगे की प्रतिक्रिया और संभावित नियामकीय निर्देशों पर उद्योग की नज़र बनी हुई है।