पायलट डोप टेस्ट: सभी पायलटों के लिए वार्षिक जाँच अनिवार्य करने पर विचार, नायडू ने दिए संकेत
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने मंगलवार, 25 अगस्त को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार देश के सभी पायलटों के लिए वार्षिक डोप टेस्ट अनिवार्य करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। फिलहाल पूरे पायलट नेटवर्क में केवल 10 प्रतिशत पायलटों का वार्षिक डोप परीक्षण अनिवार्य है।
मौजूदा नियम और प्रस्तावित बदलाव
नायडू ने स्पष्ट किया कि नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) सभी पक्षकारों के साथ मिलकर हर पायलट का साल में एक बार डोप टेस्ट कराने की व्यवहार्यता पर विचार-विमर्श कर रहा है। उन्होंने कहा, 'अभी नियम के मुताबिक पूरे पायलट नेटवर्क में 10 प्रतिशत का प्रावधान है।' रेगुलेटर परीक्षण का दायरा बढ़ाने से होने वाले सुरक्षा संबंधी फायदों और परिचालन पर पड़ने वाले असर — दोनों पहलुओं की समीक्षा कर रहा है। अंतिम निर्णय लेने से पहले यह व्यापक मूल्यांकन ज़रूरी माना जा रहा है।
एयर इंडिया फ्लाइट घटना की पृष्ठभूमि
यह प्रस्ताव 4 अगस्त को हुई एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 (फुकेत-दिल्ली) की घटना के बाद सामने आया है। उस दिन हाइड्रोलिक फेलियर के कारण विमान की ऊँचाई अचानक लगभग 300 फीट कम हो गई थी, हालाँकि बाद में विमान स्थिर हो गया और सुरक्षित रूप से नई दिल्ली में उतरा। इस घटना में केबिन क्रू सदस्यों समेत कम से कम 17 लोग घायल हुए थे।
चिंताएँ तब और गहरी हो गईं जब उस उड़ान के पायलट-इन-कमांड का कन्फर्मेटरी ड्रग टेस्ट मारिजुआना के लिए पॉज़िटिव पाया गया। इसके बाद एयर इंडिया ने अपने सभी पायलटों के लिए ड्रग स्क्रीनिंग का दायरा बढ़ा दिया और अब तक लगभग 400 पायलटों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।
जाँच की स्थिति और अतिरिक्त मामले
नायडू ने बताया कि एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और विमान के अन्य सिस्टम की जाँच कर रहा है। उन्होंने कहा कि जल्द ही एक प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की जा सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नियम सुदृढ़ करने पर चल रही बातचीत और घटना की जाँच को अलग-अलग रखा जा रहा है। इसके अलावा, विस्तारित स्क्रीनिंग प्रक्रिया में दो और पायलट शुरुआती ड्रग टेस्ट में फेल पाए गए हैं और कन्फर्मेटरी टेस्ट के नतीजों का इंतज़ार करते हुए उन्हें एहतियातन फ्लाइट ड्यूटी से हटा दिया गया है।
पायलट संगठन की माँग
इस बीच, फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने DGCA से अपील की है कि वह ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों में प्रचलित ओरल-फ्लुइड (लार-आधारित) ड्रग टेस्टिंग पद्धतियों पर विचार करे। संगठन का तर्क है कि ये तरीके अधिक सटीक और कम आक्रामक हैं।
आगे क्या होगा
DGCA की समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अनिवार्य वार्षिक डोप टेस्ट पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यह कदम भारतीय विमानन क्षेत्र में यात्री सुरक्षा के मानकों को और मज़बूत करने की दिशा में निर्णायक साबित हो सकता है।