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कराची के जेपीएमसी अस्पताल में शौचालय में हुआ प्रसव, पाकिस्तान की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था कटघरे में

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कराची के जेपीएमसी अस्पताल में शौचालय में हुआ प्रसव, पाकिस्तान की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था कटघरे में

सारांश

कराची के जेपीएमसी में एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के दौरान 'चलने-फिरने' को कह दिया गया — और उसने शौचालय में बच्चे को जन्म दिया। यह घटना पाकिस्तान की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की उस गहरी खाई को उजागर करती है जहाँ भीड़, स्टाफ की कमी और जवाबदेही का अभाव मिलकर जानलेवा लापरवाही को जन्म देते हैं।

मुख्य बातें

कराची के जिन्ना पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सेंटर (जेपीएमसी) में एक गर्भवती महिला ने अस्पताल के शौचालय में नवजात को जन्म दिया।
रिपोर्टों के अनुसार, प्रसव पीड़ा के बावजूद महिला को समय पर जाँच और देखभाल नहीं मिली; उसे 'चलने-फिरने' के लिए कहा गया।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद पाकिस्तान की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर व्यापक आक्रोश फैला।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि अस्पताल प्रबंधन, जवाबदेही और स्पष्ट प्रक्रियाएँ कार्यभार की अधिकता जितनी ही ज़रूरी हैं।
ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर है, जहाँ टर्शियरी-केयर सुविधाओं तक पहुँच बेहद सीमित है।

कराची के प्रतिष्ठित जिन्ना पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सेंटर (जेपीएमसी) में एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के बावजूद समुचित देखभाल न मिलने के कारण अस्पताल के शौचालय में ही नवजात को जन्म देना पड़ा25 अगस्त को सामने आई इस घटना ने पाकिस्तान की चरमराती सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुआ और प्रसव के दौरान महिला के साथ बरते गए व्यवहार को लेकर व्यापक आक्रोश फैल गया।

घटना का विवरण

रिपोर्टों के अनुसार, प्रसव पीड़ा से कराह रही महिला को अस्पताल कर्मचारियों ने 'चलने-फिरने' के लिए कह दिया। समय पर न तो उसकी जाँच की गई और न ही उसे प्रसव कक्ष में स्थानांतरित किया गया। नतीजतन, महिला ने अस्पताल के वॉशरूम में ही बच्चे को जन्म दिया। जाँच में इस मामले को संभालने में कई गंभीर कमियाँ पाई गईं — जिनमें बुनियादी प्रसव देखभाल प्रोटोकॉल का पालन न करना प्रमुख है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रसव पीड़ा तेज़ी से बढ़ती है और ऐसे में माँ तथा नवजात दोनों की सुरक्षा के लिए तत्काल चिकित्सा सहायता, नियमित निगरानी और समय पर जाँच अनिवार्य है। विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि कार्यभार की अधिकता को मरीज़ों की बुनियादी देखभाल में विफलता का एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, अस्पताल प्रबंधन, स्पष्ट प्रक्रियाएँ, उचित निगरानी और जवाबदेही उतनी ही ज़रूरी हैं जितनी संसाधनों की उपलब्धता।

पाकिस्तान की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की बड़ी चुनौतियाँ

यह घटना पाकिस्तान के सरकारी अस्पतालों की एक पुरानी और गहरी समस्या को फिर से उजागर करती है। बड़े सरकारी अस्पतालों में मरीज़ों की अत्यधिक भीड़, स्टाफ की कमी और संसाधनों का अभाव मिलकर एक ऐसी स्थिति बनाते हैं जहाँ मरीज़ों को समय पर इलाज मिलना कठिन हो जाता है। बड़ी संख्या में मरीज़ सरकारी सेवाओं पर निर्भर हैं क्योंकि वे निजी अस्पतालों का खर्च वहन नहीं कर सकते।

यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट और सार्वजनिक सेवाओं पर बढ़ते दबाव से जूझ रहा है। डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ अत्यधिक कार्यभार में काम कर रहे हैं, जो देखभाल की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।

ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में और गहरा संकट

गौरतलब है कि ये चुनौतियाँ बड़े शहरों से बाहर और भी गंभीर हो जाती हैं। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षित चिकित्सक, नैदानिक सुविधाएँ और विशेषज्ञ सेवाएँ आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। गर्भावस्था से जुड़े जटिल मामलों में मरीज़ों को टर्शियरी-केयर अस्पतालों तक पहुँचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है — और अक्सर वे तब पहुँचते हैं जब स्थिति बिगड़ चुकी होती है।

आगे क्या होगा

इस घटना के बाद जेपीएमसी प्रशासन पर जवाबदेही तय करने का दबाव बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद नागरिक समाज और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान सरकार से सार्वजनिक अस्पतालों में प्रसव देखभाल प्रोटोकॉल की तत्काल समीक्षा की माँग की है। यह घटना पाकिस्तान में स्वास्थ्य सुधार की बहस को नई धार देने वाली साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक प्रणालीगत विफलता की स्वीकारोक्ति है। पाकिस्तान में सार्वजनिक स्वास्थ्य बजट वर्षों से GDP के 1% से भी कम रहा है — और इसका सबसे क्रूर असर उन महिलाओं पर पड़ता है जो प्रसव के सबसे संवेदनशील क्षणों में सरकारी व्यवस्था पर निर्भर हैं। भीड़ और स्टाफ की कमी असली समस्याएँ हैं, लेकिन जवाबदेही के बिना ये कारण बहाने बन जाते हैं। असली सवाल यह है कि क्या यह घटना किसी सुधार की शुरुआत करेगी, या सोशल मीडिया पर हंगामे के बाद फिर वही चुप्पी छा जाएगी।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कराची के जेपीएमसी अस्पताल में क्या हुआ?
कराची के जिन्ना पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सेंटर में एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के दौरान समय पर देखभाल नहीं मिली और उसे 'चलने-फिरने' के लिए कहा गया, जिसके बाद उसने अस्पताल के शौचालय में ही बच्चे को जन्म दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
इस घटना से पाकिस्तान की स्वास्थ्य व्यवस्था पर क्या सवाल उठे हैं?
इस घटना ने पाकिस्तान के सरकारी अस्पतालों में मरीज़ों की अत्यधिक भीड़, स्टाफ की कमी, संसाधनों के अभाव और जवाबदेही की कमी को उजागर किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बुनियादी प्रसव देखभाल प्रोटोकॉल का पालन न करना एक गंभीर प्रणालीगत विफलता है।
प्रसव के दौरान अस्पताल में क्या देखभाल मिलनी चाहिए थी?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, प्रसव पीड़ा तेज़ी से बढ़ती है और माँ तथा नवजात की सुरक्षा के लिए तत्काल जाँच, नियमित निगरानी और समय पर चिकित्सा सहायता अनिवार्य होती है। इस मामले में इनमें से किसी भी बुनियादी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
पाकिस्तान के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा की स्थिति कैसी है?
बड़े शहरों से बाहर स्थिति और भी गंभीर है — छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में प्रशिक्षित डॉक्टर, नैदानिक सुविधाएँ और विशेषज्ञ सेवाएँ आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। जटिल गर्भावस्था के मामलों में मरीज़ों को टर्शियरी-केयर अस्पतालों तक पहुँचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, और अक्सर वे तब पहुँचते हैं जब स्थिति बिगड़ चुकी होती है।
इस घटना के बाद क्या कार्रवाई की माँग की जा रही है?
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद नागरिक समाज और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने जेपीएमसी प्रशासन से जवाबदेही और पाकिस्तान सरकार से सार्वजनिक अस्पतालों में प्रसव देखभाल प्रोटोकॉल की तत्काल समीक्षा की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
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