पाकिस्तान में बच्चों को एचआईवी संक्रमण: कराची में सैकड़ों परिवारों का प्रदर्शन, सरकारी अस्पतालों पर गंभीर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के कराची में सैकड़ों परिवारों ने सड़कों पर उतरकर सरकारी स्वास्थ्य तंत्र के खिलाफ आक्रोश जताया, जब यह सामने आया कि सरकारी क्लीनिकों में कथित तौर पर असुरक्षित चिकित्सा प्रक्रियाओं — विशेषकर संक्रमित सिरिंजों के पुनः उपयोग — के कारण बड़ी संख्या में मासूम बच्चे एचआईवी से संक्रमित हुए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अब तक करीब नौ बच्चों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों बच्चे इस जानलेवा वायरस की चपेट में आ चुके हैं।
मुख्य घटनाक्रम
प्रदर्शनकारी परिवारों ने इन मौतों और संक्रमणों को 'रोकी जा सकने वाली मानवजनित स्वास्थ्य त्रासदी' करार दिया। संक्रमण फैलने के संभावित कारणों में इस्तेमाल की गई सिरिंजों का दोबारा उपयोग, दूषित दवा की शीशियाँ और असुरक्षित रक्त चढ़ाने की प्रक्रियाएँ बताई गई हैं। विशेष रूप से चिंताजनक यह तथ्य है कि रिपोर्टों के अनुसार, संक्रमित बच्चों में से 90 प्रतिशत से अधिक की माताएँ एचआईवी नेगेटिव पाई गई हैं — जो स्पष्ट रूप से इशारा करता है कि संक्रमण का स्रोत घर नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सुविधाएँ हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूएनएड्स (UNAIDS) पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि पाकिस्तान एशिया में सबसे तेज़ी से बढ़ते एचआईवी संक्रमण वाले देशों में शामिल है। WHO के आँकड़ों के अनुसार, पिछले दो दशकों में पाकिस्तान में एचआईवी संक्रमण में लगभग 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
पंजाब से सिंध तक — संक्रमण का भौगोलिक विस्तार
यह संकट केवल कराची तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, पंजाब के तौंसा क्षेत्र में नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच 331 बच्चे एचआईवी संक्रमित पाए गए थे। जाँच में खुलासा हुआ कि एक स्थानीय अस्पताल में बच्चों पर इस्तेमाल की गई सिरिंजों को दोबारा प्रयोग में लाया गया था।
इसके अलावा कोट मोमिन, मीरपुरखास, नवाबशाह, हैदराबाद, मुल्तान और डेरा गाजी खान जैसे क्षेत्रों में भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जो संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था की व्यापक और गंभीर विफलता को दर्शाते हैं।
न्यायिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
सिंध हाई कोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए सिंध के स्वास्थ्य सचिव और प्रांतीय पुलिस प्रमुख को नोटिस जारी किया है और संक्रमण फैलने तथा संभावित चिकित्सकीय लापरवाही पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफा कमाल के अनुसार पाकिस्तान में 84,000 पंजीकृत एचआईवी मामले हैं, हालाँकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सरकार से एचआईवी संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने की माँग की है। उनका कहना है कि पाकिस्तान का स्वास्थ्य बजट लगातार GDP के एक प्रतिशत से भी कम रहा है, जिसने संक्रमण रोकथाम के उपायों को गंभीर रूप से कमज़ोर किया है। गौरतलब है कि पाकिस्तान में हेपेटाइटिस-सी के मामले भी दुनिया में सबसे अधिक हैं, जिससे करीब एक करोड़ लोग प्रभावित हैं — यह दर्शाता है कि यह समस्या किसी एक वायरस तक सीमित नहीं, बल्कि स्वास्थ्य ढाँचे की बुनियादी खामियों का नतीजा है।
आम जनता पर असर और आगे की राह
जहाँ दुनिया के अधिकांश हिस्सों में एचआईवी संक्रमण उच्च जोखिम वाले समूहों तक सीमित रहा है और मृत्यु दर में कमी आई है, वहीं पाकिस्तान में छोटे बच्चों का बड़ी संख्या में प्रभावित होना इस संकट को एक अलग और भयावह आयाम देता है। प्रदर्शनकारी परिवारों ने स्पष्ट माँग की है कि दोषी चिकित्सा कर्मियों पर कार्रवाई हो, सरकारी अस्पतालों में डिस्पोज़ेबल सिरिंज का अनिवार्य उपयोग सुनिश्चित किया जाए और प्रभावित बच्चों को मुफ्त उपचार मिले। सिंध हाई कोर्ट की सुनवाई और सरकार की प्रतिक्रिया पर अब सबकी नज़रें टिकी हैं।