रिपोर्ट: पाकिस्तान में एचआईवी प्रकोपों के बावजूद सुधार की कोई उम्मीद नजर नहीं आती
सारांश
मुख्य बातें
इस्लामाबाद, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पिछले एक दशक में पाकिस्तान में एचआईवी के लगभग दस प्रकोपों के बावजूद हालात में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच ताउनसा में 331 बच्चों में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई है।
ये मामले तब सामने आए हैं जब सरकार ने ताउनसा के तहसील मुख्यालय अस्पताल में सुधारात्मक कार्रवाई का दावा किया था, जिसके तहत वहां के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को हटा दिया गया था। इसके बावजूद, ब्रिटिश प्रसारक बीबीसी की एक अंडरकवर रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि अस्पताल में लापरवाही का सिलसिला जारी है। रिपोर्ट में दर्शाया गया है कि बच्चों के लिए एक ही सिरिंज का बार-बार उपयोग किया जा रहा है, कपड़ों के ऊपर से इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं और नर्स बिना दस्ताने के मेडिकल कचरे में हाथ डाल रही हैं। अनेक अभिभावकों ने यह भी बताया कि उनके बच्चों के लिए उपयोग की गई सिरिंज को पुनः इस्तेमाल किया गया था।
पाकिस्तान के प्रमुख समाचार पत्र ‘डॉन’ की रिपोर्ट के अनुसार, आधे से अधिक मामलों में संक्रमण का कारण ‘दूषित सुई’ पाया गया है। पूर्व विशेष सहायक ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि यह समस्या केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में ऐसी लापरवाहियाँ देखने को मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि असुरक्षित स्वास्थ्य सेवाओं, जैसे डिस्पोजेबल सिरिंज का पुनः उपयोग, बिना जांच के रक्त चढ़ाना, असुरक्षित यौन संबंध और अस्वच्छ उपकरणों के उपयोग के कारण रक्त जनित बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऐसी घटनाओं के बाद आमतौर पर कुछ समय के लिए आक्रोश उत्पन्न होता है, जांच की जाती है और सरकार कुछ कदम उठाती है, लेकिन जल्द ही मामला ठंडा पड़ जाता है और फिर किसी नए प्रकोप के साथ समस्या पुनः उजागर हो जाती है।
पाकिस्तान में इससे पहले भी कई बड़े एचआईवी प्रकोप सामने आ चुके हैं। 2019 में लरकाना में 1,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें से 90 प्रतिशत बच्चे थे। इसके अतिरिक्त, 2023 में जैकबाबाद और शिकारपुर, 2024 में ताउनसा, मीरपुरखास और डेरा गाजी खान में एचआईवी संक्रमण के मामले बढ़े हैं। हैदराबाद, शहीद बेनजीरआबाद, नौशहरो फिरोज और कराची में भी ऐसे मामले सामने आए हैं।
कराची की स्वतंत्र पत्रकार जोफीन टी. इब्राहिम ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इन गंभीर लापरवाहियों के बावजूद न तो पर्याप्त जन आक्रोश दिखाई दे रहा है और न ही जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जन जागरूकता की कमी एक बड़ी समस्या है, क्योंकि गरीब और कम जानकारी वाले मरीज यह समझ ही नहीं पाते कि एक सामान्य इंजेक्शन भी उन्हें या उनके बच्चों को जीवनभर की गंभीर बीमारी दे सकता है।