लीबिया से 171 सोमाली प्रवासी स्वदेश लौटे, IOM की चार्टर उड़ान से सुरक्षित वापसी
सारांश
मुख्य बातें
अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) द्वारा संचालित एक विशेष चार्टर उड़ान के ज़रिए लीबिया में फंसे 171 सोमाली प्रवासी सोमवार, 15 सितंबर 2026 को सुरक्षित रूप से अपने देश सोमालिया लौट आए। लौटने वालों में तीन नाबालिग बच्चे भी शामिल थे, जो लीबिया में मानव तस्करों के हाथों शोषण और अमानवीय परिस्थितियों का शिकार हो चुके थे।
कैसे हुई वापसी
IOM के अनुसार, यह चार्टर उड़ान यूरोपीय संघ (EU) के सहयोग से संचालित 'माइग्रेंट प्रोटेक्शन, रिटर्न एंड रीइंटीग्रेशन इन सब-सहारा अफ्रीका' कार्यक्रम के तहत आयोजित की गई। उड़ान सबसे पहले उत्तरी सोमालिया के शहर हरगेइसा में उतरी, जहाँ 42 प्रवासियों ने विमान छोड़ा। शेष यात्री राजधानी मोगादिशु पहुँचे, जहाँ सरकारी अधिकारियों और परिजनों ने उनका स्वागत किया।
लीबिया में क्या झेला प्रवासियों ने
IOM के मुताबिक, ये प्रवासी बेहतर भविष्य की तलाश में कई देशों से होते हुए लीबिया पहुँचे थे। वहाँ उन्हें मानव तस्करों के हाथों शोषण, दुर्व्यवहार और अत्यंत कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। लौटने वाले कई प्रवासी अपने परिवारों से लंबे समय से बिछड़े हुए थे और उनके पास भोजन, आश्रय तथा स्वास्थ्य सेवाओं जैसी बुनियादी ज़रूरतें भी उपलब्ध नहीं थीं।
IOM प्रमुख की प्रतिक्रिया
IOM सोमालिया के प्रमुख मैनुएल मार्केस परेरा ने कहा कि प्रवासन कभी भी किसी व्यक्ति की सुरक्षा, सम्मान और भविष्य के लिए खतरा नहीं बनना चाहिए। उन्होंने बताया कि स्वैच्छिक वापसी और पुनर्वास कार्यक्रम के माध्यम से सोमाली प्रवासियों को अपने देश में सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन दोबारा शुरू करने का अवसर मिल रहा है। वापस आए प्रवासियों को तत्काल मानवीय सहायता और सुरक्षा समर्थन भी प्रदान किया गया है।
अब तक कितने लौटे, आगे की योजना
IOM के अनुसार, अगस्त 2022 से अब तक EU, IOM और सोमाली सरकार की साझेदारी के तहत लगभग 2,000 सोमाली प्रवासियों की लीबिया से स्वैच्छिक वापसी कराई जा चुकी है। वर्ष 2026 के अंत तक और भी चार्टर उड़ानों की योजना बनाई गई है।
लीबिया में अभी भी संकट बरकरार
IOM की डिस्प्लेसमेंट ट्रैकिंग मैट्रिक्स रिपोर्ट के अनुसार, अभी भी सैकड़ों सोमाली प्रवासी लीबिया में अत्यंत कठिन परिस्थितियों में फंसे हुए हैं। असुरक्षा, भोजन की कमी, आश्रय और चिकित्सा सुविधाओं के अभाव के कारण हज़ारों लोगों को मानवीय सहायता की ज़रूरत है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब उत्तरी अफ्रीका में अनियमित प्रवासन के मार्ग पर मानव तस्करी की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं।