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पाकिस्तान में 331 बच्चे एचआईवी संक्रमित: एक सिरिंज से टीके लगाने की लापरवाही बेनकाब

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पाकिस्तान में 331 बच्चे एचआईवी संक्रमित: एक सिरिंज से टीके लगाने की लापरवाही बेनकाब

सारांश

पाकिस्तान के भक्कर में सरकारी अस्पताल की लापरवाही से 331 बच्चे एचआईवी संक्रमित हुए। एक ही सिरिंज से कई बच्चों को टीके लगाए गए। यह पाकिस्तान में दूसरी बड़ी ऐसी घटना है — 2019 में सिंध में भी यही हुआ था। स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी जवाबदेही पर गंभीर सवाल।

मुख्य बातें

331 बच्चे पाकिस्तान के भक्कर (पंजाब प्रांत) में एचआईवी संक्रमित पाए गए।
संक्रमण का कारण सरकारी अस्पताल में एक ही सिरिंज से कई बच्चों को टीके लगाना रहा।
2019 में सिंध के रत्तोडेरो में भी इसी तरह की घटना हो चुकी है — यह पाकिस्तान में दूसरी ऐसी बड़ी त्रासदी है।
'खालसा वॉक्स' की रिपोर्ट के अनुसार पहले भी चेतावनी के संकेत मिले थे, लेकिन प्रशासन ने अनदेखी की।
संक्रमित बच्चों को आजीवन एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) की आवश्यकता होगी।
यह घटना पाकिस्तान की स्वास्थ्य नीति, निगरानी तंत्र और जवाबदेही की गंभीर विफलता को उजागर करती है।

इस्लामाबाद, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के भक्कर शहर में एक सरकारी अस्पताल की घोर लापरवाही ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है — यहाँ 331 मासूम बच्चों को एचआईवी (HIV) से संक्रमित पाया गया है। जाँच में सामने आया कि इन बच्चों को एक ही सिरिंज से टीके लगाए गए, जो न केवल चिकित्सा मानकों का उल्लंघन है बल्कि पाकिस्तान की बुनियादी स्वास्थ्य व्यवस्था की दयनीय स्थिति को भी उजागर करता है।

क्या हुआ भक्कर के अस्पताल में?

'खालसा वॉक्स' की रिपोर्ट के अनुसार, भक्कर के इस सरकारी अस्पताल में टीकाकरण अभियान के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों ने एक ही सिरिंज से कई-कई बच्चों को इंजेक्शन लगाए। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि एक सिरिंज से दस तक बच्चों को टीके लगाए गए, जिससे एचआईवी वायरस एक बच्चे से दूसरे में फैलता चला गया।

यह घटना न तो अचानक हुई और न ही अनजाने में — रिपोर्ट में बताया गया है कि पहले भी चेतावनी के संकेत मिल चुके थे, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यह लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का दुखद परिणाम है।

व्यवस्थागत विफलता की परतें

रिपोर्ट में कहा गया है — "इसे सिर्फ एक सामान्य मेडिकल गलती मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। यह एक ऐसी व्यवस्था की सच्चाई दिखाता है जो कमजोर है और जहाँ बुनियादी स्वास्थ्य नियमों का पालन भी नहीं हो रहा।"

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या सिर्फ एक अस्पताल या कुछ कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। यह पाकिस्तान की सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति, निगरानी तंत्र और जवाबदेही की पूर्ण अनुपस्थिति को उजागर करती है। बिना मजबूत निगरानी और समय पर सुधार के ऐसी घटनाएँ दोबारा होने का खतरा बना रहता है।

पाकिस्तान की प्राथमिकताओं पर सवाल

रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की गई है — "किसी देश की ताकत सिर्फ बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि वह अपने नागरिकों की बुनियादी सुरक्षा कितनी अच्छी तरह सुनिश्चित करता है।" जो देश अपने बच्चों को सुरक्षित टीका तक नहीं दे सकता, उसकी प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगता है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान में यह कोई पहली ऐसी घटना नहीं है। इससे पहले 2019 में रत्तोडेरो (सिंध) में भी इसी तरह की लापरवाही से सैकड़ों बच्चे एचआईवी पॉजिटिव पाए गए थे। उस मामले में भी एक ही सिरिंज के पुनः उपयोग को जिम्मेदार ठहराया गया था। यानी यह पाकिस्तान में दोहराई जाने वाली त्रासदी बन चुकी है।

अंतरराष्ट्रीय छवि और आंतरिक विरोधाभास

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई पर कथित तौर पर खालिस्तानी आतंकवादियों, अपराधियों और नशा तस्करों को समर्थन देने के आरोप लगते रहे हैं, जिससे देश की वैश्विक साख पहले से ही धूमिल है। ऐसे में यह स्वास्थ्य घोटाला पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि को और गहरा झटका देता है।

तुलनात्मक दृष्टिकोण से देखें तो भारत, बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों ने भी अपनी स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना किया है, लेकिन टीकाकरण में डिस्पोजेबल सिरिंज के अनिवार्य उपयोग को लेकर कड़े प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं। पाकिस्तान में इन बुनियादी मानकों की अनदेखी यह दर्शाती है कि स्वास्थ्य बजट और प्रशिक्षण दोनों में भारी कमी है।

आगे क्या?

331 संक्रमित बच्चों का भविष्य अब एक बड़ी मानवीय चुनौती है। इन बच्चों को आजीवन एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) की जरूरत होगी, जिसका बोझ उनके परिवारों और सरकारी स्वास्थ्य तंत्र पर पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों और WHO से पाकिस्तान को तत्काल हस्तक्षेप और तकनीकी सहायता की दरकार होगी। यदि पाकिस्तान सरकार ने जल्द ही ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो ऐसी त्रासदियाँ आगे भी दोहराई जाती रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक दोहराई जाने वाली त्रासदी है — 2019 में सिंध के रत्तोडेरो में भी यही हुआ था, और तब भी सिरिंज पुनः उपयोग ही कारण था। विरोधाभास यह है कि पाकिस्तान परमाणु शक्ति होने का दावा करता है, लेकिन अपने बच्चों को डिस्पोजेबल सिरिंज तक नहीं दे सकता। मुख्यधारा की कवरेज इसे एक 'मेडिकल हादसा' बताकर छोड़ देती है, जबकि असली सवाल यह है कि स्वास्थ्य बजट कहाँ जाता है और जवाबदेही का तंत्र क्यों ध्वस्त है। यह घटना पाकिस्तान की राज्य प्राथमिकताओं — सैन्य खर्च बनाम नागरिक स्वास्थ्य — के बीच की खाई को बेरहमी से उजागर करती है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान के भक्कर में 331 बच्चे एचआईवी से कैसे संक्रमित हुए?
भक्कर के एक सरकारी अस्पताल में टीकाकरण अभियान के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों ने एक ही सिरिंज से कई बच्चों को इंजेक्शन लगाए, जिससे एचआईवी वायरस एक से दूसरे बच्चे में फैल गया। यह बुनियादी चिकित्सा प्रोटोकॉल का गंभीर उल्लंघन है।
क्या पाकिस्तान में पहले भी ऐसी घटना हुई है?
हाँ, 2019 में पाकिस्तान के सिंध प्रांत के रत्तोडेरो में भी इसी तरह सिरिंज के पुनः उपयोग से सैकड़ों बच्चे एचआईवी पॉजिटिव पाए गए थे। यह पाकिस्तान में दूसरी बड़ी ऐसी त्रासदी है, जो व्यवस्थागत सुधार की कमी को दर्शाती है।
इन 331 एचआईवी संक्रमित बच्चों का इलाज कैसे होगा?
इन बच्चों को आजीवन एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) की आवश्यकता होगी। पाकिस्तान सरकार और WHO जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों को तत्काल चिकित्सा और वित्तीय सहायता प्रदान करनी होगी।
इस घटना के लिए कौन जिम्मेदार है?
खालसा वॉक्स की रिपोर्ट के अनुसार यह केवल कुछ स्वास्थ्यकर्मियों की गलती नहीं, बल्कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता है। निगरानी तंत्र की कमजोरी और जवाबदेही का अभाव इसके मुख्य कारण हैं।
पाकिस्तान की स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति कैसी है?
पाकिस्तान की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर संसाधन संकट, प्रशिक्षित कर्मियों की कमी और कमजोर निगरानी से जूझ रही है। देश का बड़ा हिस्सा रक्षा बजट पर खर्च होता है जबकि स्वास्थ्य सेवाएँ उपेक्षित रहती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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