पाकिस्तान में एचआईवी मामलों में तेज़ उछाल: दूषित सीरिंज और स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता बनी वजह
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान में एचआईवी संक्रमण के मामलों में चिंताजनक तेज़ी देखी जा रही है, और विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की बुनियादी खामियाँ हैं। पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन के संपादकीय और एक विस्तृत रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि लरकाना, मुल्तान, कराची और टांडा जैसे इलाकों में अस्पतालों और क्लीनिकों से जुड़े एचआईवी के मामले सामने आए हैं, जिनमें सिर्फ एक साल की उम्र के बच्चे भी शामिल हैं।
मुख्य घटनाक्रम
पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2025 से अब तक 189 लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं। अप्रैल 2026 के पहले 20 दिनों में ही 11 नए मामले सामने आए। संक्रमित लोगों में पुरुषों की संख्या महिलाओं से अधिक है, और ट्रांसजेंडर समुदाय में भी मामले दर्ज किए गए हैं। सबसे गंभीर चिंता बच्चों में एचआईवी के मामले सामने आना है, जो उपचार के लिए क्लीनिक गए थे।
स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता के कारण
रिपोर्ट के अनुसार, इस संकट के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला, देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में संक्रमण रोकने की बुनियादी प्रणाली का ध्वस्त हो जाना। दूसरा, इंजेक्शन सीरिंज का बार-बार उपयोग — जबकि 2021 में पूरे पाकिस्तान में सामान्य डिस्पोजेबल सीरिंज पर प्रतिबंध लगाया जा चुका था। विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों कारणों ने मिलकर एक 'मानव-निर्मित महामारी' जैसी स्थिति उत्पन्न कर दी है।
यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही पोलियो उन्मूलन और डेंगू जैसी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से जूझ रहा है। गौरतलब है कि संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल की अनदेखी केवल एचआईवी तक सीमित नहीं है — यह एक व्यापक प्रणालीगत लापरवाही का संकेत है।
नकली सीरिंज और नियामक विफलता
पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि नकली या गलत तरीके से लेबल की गई 'ऑटो-डिसेबल' सीरिंज भी सप्लाई चेन में घुस रही हैं। इसके बाद ड्रग रेगुलेटरी अथॉरिटी और प्रांतीय स्वास्थ्य विभागों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। डेटा की अनुपलब्धता और पारदर्शिता की कमी को भी इस संकट को और गहरा करने वाला कारक बताया गया है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) के एचआईवी सेंटर के डॉक्टरों ने चिंता जताई है कि मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और बच्चों में एचआईवी के मामले विशेष रूप से चिंताजनक हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बीमारी को छिपाना और टेस्ट न कराना स्थिति को और खतरनाक बना रहा है।
एड्स कंट्रोल प्रोग्राम के मैनेजर जुबैर अब्दुल्ला ने कहा कि PIMS एचआईवी सेंटर में मरीजों की बढ़ती संख्या का एक कारण यह भी है कि अब अधिक लोग स्वेच्छा से टेस्ट कराने आगे आ रहे हैं। उन्होंने जागरूकता बढ़ाने और टेस्टिंग को प्रोत्साहित करने पर ज़ोर दिया।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञों के अनुसार, गंदे इंजेक्शन और असुरक्षित चिकित्सा प्रथाएँ — एचआईवी फैलाव के ये दोनों प्रमुख कारण — पूरी तरह रोके जा सकते हैं, बशर्ते सख्त निगरानी और क्रियान्वयन हो। जब तक पाकिस्तान अपनी स्वास्थ्य आपूर्ति श्रृंखला को पारदर्शी नहीं बनाता और प्रांतीय स्तर पर जवाबदेही तय नहीं करता, तब तक यह संकट और गहरा होने का खतरा बना रहेगा।