आई-पैक रेड विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के खिलाफ ईडी की याचिका पर 22 मई को सुनवाई तय की

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आई-पैक रेड विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के खिलाफ ईडी की याचिका पर 22 मई को सुनवाई तय की

सारांश

आई-पैक रेड विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने 22 मई को अगली सुनवाई तय की है। ईडी ने ममता बनर्जी पर जांच में हस्तक्षेप का आरोप लगाया है और CBI जांच व FIR की माँग की है। यह मामला चुनावी रणनीति डेटा, मनी लॉन्ड्रिंग और केंद्र-राज्य टकराव का जटिल संगम है।

मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट ने 13 मई 2026 को ईडी की याचिका पर अगली सुनवाई 22 मई के लिए तय की।
ईडी का आरोप है कि ममता बनर्जी ने 8 जनवरी को आई-पैक कार्यालय में चल रही तलाशी में हस्तक्षेप किया।
ईडी ने ममता बनर्जी, तत्कालीन पुलिस महानिदेशक और कोलकाता पुलिस कमिश्नर के खिलाफ FIR और CBI जांच की माँग की।
ममता बनर्जी ने हलफनामे में आरोप खारिज करते हुए कहा कि वह TMC का गोपनीय चुनावी डेटा वापस लेने गई थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने 15 जनवरी को ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज पश्चिम बंगाल पुलिस की FIR पर रोक लगाई थी और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया था।

सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार, 13 मई 2026 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर अगली सुनवाई 22 मई तक के लिए स्थगित कर दी। इस याचिका में ईडी ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कोलकाता स्थित आई-पैक कार्यालय में चल रही तलाशी कार्रवाई में हस्तक्षेप किया था। यह मामला कथित कोयला तस्करी और करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी जांच का हिस्सा है।

मुख्य घटनाक्रम

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने मामले की सुनवाई आगे बढ़ाई। ईडी की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अगले हफ्ते जल्द सुनवाई की मांग की थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने 22 मई की तारीख तय की। उल्लेखनीय है कि इससे पहले अदालत ने संकेत दिया था कि मामला जुलाई तक सूचीबद्ध हो सकता है।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के अधिकारी ने अदालत को बताया कि विपक्षी पक्ष की प्रारंभिक दलीलें पूरी हो चुकी हैं और अब ईडी अपना पक्ष रखने के लिए तैयार है।

ईडी के आरोप और मांगें

ईडी का आरोप है कि 8 जनवरी को आई-पैक कार्यालय और उसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर तलाशी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वहाँ पहुँचीं और जांच में दखल दिया। एजेंसी का यह भी आरोप है कि तलाशी के दौरान उसके अधिकारियों को रोका गया और कथित तौर पर डराया-धमकाया गया।

ईडी ने सर्वोच्च न्यायालय से ममता बनर्जी, तत्कालीन पुलिस महानिदेशक और कोलकाता पुलिस कमिश्नर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश माँगे हैं। साथ ही मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की भी मांग की गई है।

ममता बनर्जी का जवाब

अपने जवाबी हलफनामे में ममता बनर्जी ने जांच में रुकावट डालने के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि वह वहाँ केवल तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़ा गोपनीय और निजी डेटा वापस लेने गई थीं।

हलफनामे में दावा किया गया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की रणनीति से जुड़ा संवेदनशील राजनीतिक डेटा तलाशी के दौरान देखा जा रहा है। हलफनामे में यह भी कहा गया कि ईडी अधिकारियों ने कुछ डिवाइस और दस्तावेज वापस लेने की अनुमति दी थी और उसके बाद तलाशी शांतिपूर्वक जारी रही।

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियाँ

पिछली सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि यदि कोई मौजूदा मुख्यमंत्री चल रही जांच में हस्तक्षेप करता है, तो इससे लोकतंत्र खतरे में पड़ सकता है। अदालत के अनुसार,

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी परतें कहीं गहरी हैं — चुनावी रणनीति डेटा की सुरक्षा, जांच एजेंसियों की स्वायत्तता और एक निर्वाचित मुख्यमंत्री की जवाबदेही एक साथ कठघरे में हैं। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी कि 'मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए जांच में दखल लोकतंत्र को खतरे में डालता है' — असाधारण रूप से तीखी है और इसे केवल कानूनी नहीं, बल्कि संवैधानिक चेतावनी के रूप में पढ़ा जाना चाहिए। ईडी की CBI जांच और FIR की दोहरी माँग दर्शाती है कि एजेंसी इसे सामान्य प्रशासनिक टकराव नहीं, बल्कि जांच-बाधा का गंभीर मामला मान रही है। 22 मई की सुनवाई में ईडी के तर्क तय करेंगे कि यह विवाद राजनीतिक बयानबाजी बनकर रहेगा या अदालत ठोस कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ेगी।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आई-पैक रेड विवाद क्या है?
यह मामला 8 जनवरी 2026 को ईडी द्वारा कोलकाता स्थित आई-पैक कार्यालय में की गई तलाशी से जुड़ा है, जो कथित कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच का हिस्सा थी। ईडी का आरोप है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पुलिस अधिकारियों ने इस तलाशी में हस्तक्षेप किया।
ईडी ने सुप्रीम कोर्ट से क्या माँगा है?
ईडी ने ममता बनर्जी, तत्कालीन पुलिस महानिदेशक और कोलकाता पुलिस कमिश्नर के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश माँगे हैं। इसके साथ ही मामले की जांच CBI को सौंपने की भी मांग की गई है।
ममता बनर्जी ने आरोपों पर क्या कहा है?
ममता बनर्जी ने अपने हलफनामे में जांच में हस्तक्षेप के सभी आरोप खारिज किए हैं। उन्होंने कहा कि वह 2026 विधानसभा चुनाव से जुड़ा TMC का गोपनीय राजनीतिक डेटा वापस लेने गई थीं और तलाशी बाद में शांतिपूर्वक जारी रही।
सुप्रीम कोर्ट ने अब तक क्या आदेश दिए हैं?
15 जनवरी के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ पश्चिम बंगाल पुलिस की FIR पर रोक लगाई और CCTV फुटेज व डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। पिछली सुनवाई में अदालत ने मौखिक रूप से कहा था कि मुख्यमंत्री द्वारा जांच में हस्तक्षेप लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
अगली सुनवाई में क्या होने की संभावना है?
22 मई की सुनवाई में ईडी अपनी दलीलें पेश करेगी, क्योंकि विपक्षी पक्ष की प्रारंभिक दलीलें पूरी हो चुकी हैं। अदालत के निर्देश और ईडी के तर्क यह तय करेंगे कि FIR और CBI जांच की माँग पर आगे क्या कदम उठाया जाए।
राष्ट्र प्रेस
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