असम में ₹10 लाख तक की कृषि आय टैक्स-मुक्त, CM हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को गुवाहाटी में घोषणा की कि राज्य सरकार सालाना ₹10 लाख तक की कृषि आय वाले छोटे किसानों और चाय उत्पादकों को कृषि आयकर से पूरी तरह मुक्त रखेगी, जबकि बड़े कृषि करदाताओं पर 1 अप्रैल 2026 से यह कर फिर से लागू किया जाएगा। यह घोषणा असम के चाय उद्योग और किसान समुदायों के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव है।
मुख्य घोषणाक्रम
मुख्यमंत्री सरमा ने पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि पिछले छह वर्षों से लागू कृषि आयकर छूट को बड़े करदाताओं के लिए समाप्त किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'सालाना ₹10 लाख तक की कृषि आय वाले छोटे चाय उत्पादकों को कृषि आयकर नहीं देना होगा।'
असम बजट 2026-27 में छोटे चाय उत्पादकों के लिए कृषि आयकर छूट की सीमा ₹2.5 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख सालाना करने का प्रस्ताव पहले ही रखा जा चुका था। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार चाय उद्योग को व्यापक रूप से पुनर्जीवित करने की कोशिश में है।
छूट और कर का आधार
मुख्यमंत्री ने बताया कि कृषि आय उत्पादन, खेती के आकार, बाज़ार मूल्य और खर्चों के आधार पर काफी भिन्न हो सकती है — इसीलिए छोटे और बड़े करदाताओं के बीच यह अंतर ज़रूरी है। सरकार की नीति का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छोटे चाय उत्पादक किसी भी प्रकार से प्रभावित न हों।
गौरतलब है कि बड़े कृषि और चाय उत्पादन से जुड़े कारोबारियों से प्राप्त कर राजस्व का उपयोग चाय बागान समुदायों के कल्याण, सामाजिक योजनाओं और विकास कार्यों पर किया जाएगा।
चाय उद्योग पर असर
राज्य बजट में ऑर्थोडॉक्स और विशेष किस्म की चाय पर उत्पादन सब्सिडी ₹10 प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर ₹15 प्रति किलोग्राम करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इसके अलावा माचा जैसी प्रीमियम चाय किस्मों को प्रोत्साहन देने की योजना भी बनाई गई है, जो वैश्विक बाज़ार में असम की पहचान को और मज़बूत कर सकती है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब असम सरकार चाय बागान श्रमिकों और उनसे जुड़े समुदायों के लिए कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार करने में जुटी है। आलोचकों का कहना है कि बड़े चाय उत्पादकों पर कर की वापसी से उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता पर असर पड़ सकता है, हालाँकि सरकार ने इन आशंकाओं को खारिज किया है।
आम जनता और किसानों पर असर
राज्य में हज़ारों छोटे चाय उत्पादक और किसान इस छूट से सीधे लाभान्वित होंगे। सरमा ने ज़ोर देकर कहा कि सरकार का उद्देश्य आम किसानों पर अतिरिक्त बोझ डालना नहीं है — बल्कि बड़े कारोबारियों की भागीदारी से राज्य के राजस्व को बढ़ाना और उसे समुदाय के विकास में लगाना है।
क्या होगा आगे
1 अप्रैल 2026 से बड़े कृषि करदाताओं पर कृषि आयकर की पुनः वसूली शुरू होगी। राज्य सरकार से अपेक्षा है कि वह कर की दरें और पात्रता मानदंड शीघ्र स्पष्ट करे, ताकि उद्योग जगत और किसान समय पर तैयारी कर सकें।