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हनुमानगढ़ विधायक गणेशराज बंसल को 23 साल पुराने लीज फर्जीवाड़े में जमानत, 5 दिन हिरासत के बाद रिहाई

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हनुमानगढ़ विधायक गणेशराज बंसल को 23 साल पुराने लीज फर्जीवाड़े में जमानत, 5 दिन हिरासत के बाद रिहाई

सारांश

हनुमानगढ़ से निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल को 23 साल पुराने जमीन लीज फर्जीवाड़े में जिला एवं सत्र न्यायालय ने जमानत दी। सीजेएम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद यह राहत मिली। बंसल 4 दिन पुलिस रिमांड और 1 दिन न्यायिक हिरासत में रहे।

मुख्य बातें

हनुमानगढ़ से निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल को 26 सितंबर 2026 को जिला एवं सत्र न्यायालय से जमानत मिली।
मामला 2003 में हनुमानगढ़ नगर परिषद द्वारा जारी जमीन लीज पट्टों में कथित फर्जीवाड़े से जुड़ा है।
सीआईडी-सीबी ने बंसल को 20 सितंबर को गिरफ्तार किया था; उन्होंने 4 दिन पुलिस रिमांड और 1 दिन न्यायिक हिरासत में बिताए।
सीजेएम कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की थी और 7 दिन की अतिरिक्त रिमांड भी नामंजूर की थी।
बंसल की पत्नी संतोष बंसल , पूर्व अधिशासी अधिकारी भंवरलाल सोनी और कृष्णा रानी व राजरानी चुघ भी आरोपी हैं।
सरकार को कथित तौर पर इस मामले में कई करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।

हनुमानगढ़ से निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल को 23 साल पुराने जमीन लीज फर्जीवाड़ा मामले में जयपुर के जिला एवं सत्र न्यायालय ने शनिवार, 26 सितंबर 2026 को जमानत प्रदान कर दी। इससे एक दिन पहले सीजेएम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उनकी कानूनी टीम ने उच्च न्यायालय का रुख किया।

मुख्य घटनाक्रम

सीआईडी-सीबी ने 19 सितंबर को बंसल को बीकानेर जिले में हिरासत में लिया और पूछताछ के बाद 20 सितंबर को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया। 21 सितंबर को कोर्ट में पेश होने पर जाँच एजेंसी को 4 दिन की पुलिस रिमांड मिली।

रिमांड समाप्त होने के बाद शुक्रवार को सीआईडी-सीबी ने बंसल को सीजेएम कोर्ट में पेश किया और 7 दिन की अतिरिक्त रिमांड की माँग की। कोर्ट ने यह माँग ठुकराते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया और जमानत याचिका भी खारिज कर दी। इस प्रकार बंसल ने कुल 4 दिन पुलिस रिमांड और 1 दिन न्यायिक हिरासत में बिताए।

आरोप क्या हैं

पुलिस ने 17 सितंबर को बंसल, उनकी पत्नी एवं पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष संतोष बंसल, पूर्व अधिशासी अधिकारी भंवरलाल सोनी और प्लॉट मालिक कृष्णा रानी व राजरानी चुघ के विरुद्ध दो अलग-अलग मामले दर्ज किए थे।

आरोप है कि वर्ष 2003 में हनुमानगढ़ नगर परिषद ने हनुमानगढ़ जंक्शन के सेक्टर-9एल में प्लॉट नंबर 8 और 16 के लीज पट्टे जारी किए थे। जाँच में लीज डीड में दर्ज जानकारी और नगर परिषद के आधिकारिक रिकॉर्ड के बीच विसंगतियाँ पाई गईं। कथित तौर पर सरकारी जमीन को निजी भूमि बताकर पट्टे जारी किए गए, जिससे सरकार को कई करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।

कोर्ट परिसर में माहौल

सुनवाई के दौरान जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में बड़ी संख्या में वकील, समर्थक और आम नागरिक मौजूद रहे, जो मामले की राजनीतिक संवेदनशीलता को रेखांकित करता है। गौरतलब है कि बंसल हनुमानगढ़ से निर्दलीय विधायक हैं और इस मामले ने स्थानीय राजनीति में हलचल मचाई हुई है।

जाँच की स्थिति

मामले की जाँच सीआईडी-सीबी (अपराध अनुसंधान विभाग — अपराध शाखा) कर रही है। जमानत मिलने के बाद भी जाँच जारी रहेगी। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हैं और कई निर्दलीय विधायकों की भूमिका राज्य की राजनीति में निर्णायक मानी जाती है।

आगे की कार्रवाई में सीआईडी-सीबी की जाँच और न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल होने की प्रक्रिया जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली जवाबदेही तभी तय होगी जब जाँच एजेंसी ठोस आरोप पत्र दाखिल करे और अदालत में मामला तार्किक अंजाम तक पहुँचे।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गणेशराज बंसल को किस मामले में गिरफ्तार किया गया था?
बंसल को वर्ष 2003 में हनुमानगढ़ नगर परिषद द्वारा जारी जमीन लीज पट्टों में कथित फर्जीवाड़े के मामले में गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि सरकारी जमीन को निजी बताकर पट्टे जारी किए गए, जिससे सरकार को कई करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
बंसल को जमानत कैसे मिली?
सीजेएम कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद बंसल की कानूनी टीम ने जिला एवं सत्र न्यायालय में याचिका दाखिल की। शनिवार 26 सितंबर 2026 को सुनवाई के बाद जिला एवं सत्र न्यायालय ने जमानत मंजूर कर ली।
इस मामले में और कौन-कौन आरोपी हैं?
पुलिस ने बंसल के अलावा उनकी पत्नी एवं पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष संतोष बंसल, पूर्व अधिशासी अधिकारी भंवरलाल सोनी और प्लॉट मालिक कृष्णा रानी व राजरानी चुघ के खिलाफ 17 सितंबर को दो अलग-अलग मामले दर्ज किए थे।
सीआईडी-सीबी की अतिरिक्त रिमांड माँग क्यों खारिज हुई?
सीजेएम कोर्ट ने 4 दिन की रिमांड समाप्त होने के बाद सीआईडी-सीबी की 7 दिन की अतिरिक्त पुलिस रिमांड माँग अस्वीकार कर दी और बंसल को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। कोर्ट ने इस स्तर पर और रिमांड देना उचित नहीं समझा।
क्या जमानत मिलने के बाद जाँच बंद हो जाएगी?
नहीं, जमानत मिलने से जाँच पर कोई असर नहीं पड़ता। सीआईडी-सीबी की जाँच जारी रहेगी और आगे आरोप पत्र दाखिल होने पर न्यायालय में मुकदमे की प्रक्रिया चलेगी।
राष्ट्र प्रेस
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