हैदराबाद भूमि घोटाला: YSRCP के पूर्व विधायक बोला ब्रह्मा नायडू कांचीपुरम से गिरफ्तार, ₹1,000 करोड़ की सरकारी जमीन हड़पने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
साइबराबाद पुलिस ने 5 जून 2026 को वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के पूर्व विधायक बोला ब्रह्मा नायडू को तमिलनाडु के कांचीपुरम से गिरफ्तार किया। उन पर हैदराबाद के गांडीपेट क्षेत्र में करीब ₹1,000 करोड़ मूल्य की सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे की साजिश रचने का आरोप है। तेलंगाना उच्च न्यायालय द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद यह गिरफ्तारी संभव हुई।
मामले की पृष्ठभूमि
इस प्रकरण की शुरुआत 23 मई को हुई, जब गांडीपेट के तहसीलदार एन. श्रीनिवास रेड्डी ने नरसिंगी पुलिस थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि गांडीपेट सर्वे नंबर-18 में स्थित 10 एकड़ सरकारी भूमि पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए अवैध कब्जा किया गया। इसके बाद नरसिंगी पुलिस और साइबराबाद पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने संयुक्त जांच शुरू की।
मुख्य आरोपी और साजिश का खुलासा
जांच में सामने आया कि बोला ब्रह्मा नायडू, बोला रमेश, राधाकृष्ण और निम्मल परिवार के कुछ सदस्यों ने मिलकर सरकारी जमीन हड़पने की कथित साजिश रची। इसके लिए फर्जी सरकारी आदेश, नकली राजस्व रिकॉर्ड और जाली दस्तावेज तैयार किए गए। पुलिस अब तक निम्मल परिवार के सदस्यों, राधाकृष्ण और उनके ड्राइवर प्रभीन कुमार को गिरफ्तार कर चुकी है।
वित्तीय लेन-देन का जाल
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस कथित साजिश में करीब ₹12 करोड़ का वित्तीय लेन-देन हुआ। बताया जा रहा है कि ₹4 करोड़ निम्मल परिवार को, ₹4 करोड़ राधाकृष्ण को और शेष ₹4 करोड़ अन्य संबंधित व्यक्तियों को दिए गए। आरोप है कि इन राशियों का उपयोग फर्जी दस्तावेजों और नकली सरकारी अनुमतियों के माध्यम से भूमि पर अवैध अधिकार स्थापित करने के लिए किया गया।
न्यायालय का रुख और गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार, मामले की गंभीरता और उपलब्ध प्रथम दृष्टया साक्ष्यों को देखते हुए तेलंगाना उच्च न्यायालय ने ब्रह्मा नायडू की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके बाद साइबराबाद पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर उन्हें कांचीपुरम, तमिलनाडु से दबोचा। फिलहाल वे पुलिस हिरासत में हैं और कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा।
आगे की जांच
पुलिस अब मामले से जुड़े वित्तीय लेन-देन, फर्जी दस्तावेजों की तैयारी, सरकारी अधिकारियों के नाम और हस्ताक्षरों के कथित दुरुपयोग तथा अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है। यह मामला तेलंगाना में भूमि अतिक्रमण के उन बड़े मामलों में शुमार हो गया है जिनमें राजनीतिक हस्तियों के नाम सामने आए हैं।