16 जुलाई 2026
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साइबराबाद ₹1,000 करोड़ जमीन घोटाला: नकली सरकारी दस्तावेज़ बनाने वाले दो और आरोपी गिरफ्तार

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साइबराबाद ₹1,000 करोड़ जमीन घोटाला: नकली सरकारी दस्तावेज़ बनाने वाले दो और आरोपी गिरफ्तार

सारांश

हैदराबाद के गंडीपेट में ₹1,500 करोड़ की सरकारी ज़मीन बेचने की साजिश में साइबराबाद पुलिस ने दो और आरोपियों को दबोचा। मुख्य आरोपी राधाकृष्ण पूर्व सचिवालय कर्मचारी था जिसने नकली सरकारी दस्तावेज़ों के बल पर करोड़ों की ठगी की। पूर्व YSRCP विधायक समेत पाँच आरोपी अभी फरार हैं।

मुख्य बातें

साइबराबाद पुलिस ने 31 मई 2026 को वेलाडी राधाकृष्ण (आरोपी नं.
9) और ड्राइवर ग्यारा प्रवीण कुमार (आरोपी नं.
10) को गिरफ्तार किया।
मामला गंडीपेट की लगभग ₹1,500 करोड़ मूल्य की 10 एकड़ सरकारी पोरामबोके ज़मीन की अवैध बिक्री से जुड़ा है।
आरोपियों से 5 लैपटॉप, 12 चेकबुक, 13 मुहरें, 7 बैंक पासबुक, 10 एटीएम कार्ड और 31 ज़मीनी दस्तावेज़ ज़ब्त।
साजिश में कुल लगभग ₹12 करोड़ का वित्तीय लेन-देन हुआ।
पूर्व YSRCP विधायक बोल्ला ब्रह्मा नायडू सहित 5 आरोपी अभी भी फरार।
मामला 23 मई 2026 को नरसिंगी पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ था।

साइबराबाद पुलिस ने 31 मई 2026 को गंडीपेट की लगभग ₹1,500 करोड़ मूल्य की 10 एकड़ सरकारी ज़मीन को नकली दस्तावेज़ों के ज़रिये अवैध रूप से बेचने की साजिश में दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपी वेलाडी राधाकृष्ण और उनके ड्राइवर ग्यारा प्रवीण कुमार को क्रमशः आरोपी संख्या 9 और 10 बताया गया है। इस मामले में अब तक कुल 10 आरोपी चिह्नित किए जा चुके हैं।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस ने 29 मई को तीन लोगों की गिरफ्तारी के साथ इस ₹1,000 करोड़ के जमीन घोटाले का भंडाफोड़ करने का दावा किया था। यह मामला 23 मई को रंगरेड्डी जिले के गंडीपेट मंडल के तहसीलदार श्रीनिवास रेड्डी की शिकायत पर नरसिंगी पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। आरोप है कि सरकारी पोरामबोके ज़मीन पर नकली सरकारी आदेश (GO), झूठी CCLA कार्रवाई, नकली NOC और अन्य फर्जी दस्तावेज़ तैयार कर अवैध बिक्री की कोशिश की गई।

मुख्य आरोपी की पृष्ठभूमि

पुलिस उपायुक्त सीएच श्रीनिवास के अनुसार, वेलाडी राधाकृष्ण 2006 से 2009 तक आंध्र प्रदेश सचिवालय के सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग में आउटसोर्सिंग कर्मचारी के रूप में कार्यरत था। नौकरी छोड़ने के बाद उसने सरकारी कार्यालयों की प्रक्रियाओं की जानकारी का दुरुपयोग करते हुए सरकारी नौकरियाँ, भूमि नियमितीकरण आदेश, पट्टादार पासबुक और अन्य सरकारी अनुमतियाँ दिलाने का झाँसा देकर लोगों को ठगना शुरू किया। 2013 में उसने सचिवालय में डिप्टी कलेक्टर और वकील बनकर बेरोज़गार युवाओं से ₹30 लाख की ठगी की। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में उसके विरुद्ध धोखाधड़ी, जालसाजी और विश्वासघात के कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।

साजिश का तरीका

पुलिस जाँच में सामने आया कि राधाकृष्ण ने अपने ड्राइवर ग्यारा प्रवीण के माध्यम से कोव्वुरु सुनील से संपर्क स्थापित किया। इसके बाद उसने गंडीपेट गाँव के सर्वे नंबर 18 की सरकारी पोरामबोके ज़मीन पर दावा करने वाले निम्मला राजेश, निम्मला वेणुगोपाल, निम्मला रामास्वामी और गरेला मंगा से संबंध बनाए। यह जानते हुए भी कि ज़मीन सरकारी है और उस पर कोई कानूनी स्वामित्व नहीं है, राधाकृष्ण ने आंध्र प्रदेश के वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के पूर्व विधायक बोल्ला ब्रह्मा नायडू और उनके भाई रमेश को नियमितीकरण और सरकारी मंजूरी दिलाने का झूठा आश्वासन दिया।

एक वकील की सहायता से राधाकृष्ण ने नकली सरकारी आदेश, फर्जी CCLA कार्रवाई, नकली NOC और अन्य सरकारी दस्तावेज़ तैयार किए। जाँच में यह भी पता चला कि कोव्वुरु सुनील, करनम राजेश, ग्यारा प्रवीण और प्रभुदास ने धन लेन-देन, दस्तावेज़ों के परिवहन और सूचना आदान-प्रदान में राधाकृष्ण की सहायता की। इस पूरी साजिश में ब्रह्मा नायडू, रमेश और अन्य संबंधित पक्षों के बीच लगभग ₹12 करोड़ का वित्तीय लेन-देन हुआ।

बरामदगी और फरार आरोपी

पुलिस ने राधाकृष्ण और प्रवीण कुमार के पास से 5 लैपटॉप, 12 चेकबुक, 13 मुहरें (स्टैम्प), 7 बैंक पासबुक, 10 एटीएम कार्ड और विभिन्न ज़मीनों से संबंधित 31 दस्तावेज़ ज़ब्त किए हैं। पूर्व विधायक बोल्ला ब्रह्मा नायडू सहित पाँच अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं।

आगे की जाँच

डीसीपी सीएच श्रीनिवास ने बताया कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी, संपूर्ण वित्तीय लेन-देन का खुलासा करने और साजिश में शामिल सभी व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के लिए जाँच जारी है। यह मामला राज्य में सरकारी ज़मीनों की सुरक्षा और राजस्व रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी वह इतने बड़े पैमाने पर सक्रिय रहा। एक निर्वाचित प्रतिनिधि का कथित रूप से इस साजिश से जुड़ाव यह भी दर्शाता है कि भूमि अतिक्रमण के मामलों में राजनीतिक संरक्षण की जाँच उतनी ही ज़रूरी है जितनी आपराधिक। जब तक डिजिटल भूमि रिकॉर्ड को वास्तविक समय में सत्यापन-योग्य नहीं बनाया जाता, ऐसे घोटाले दोहराते रहेंगे।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साइबराबाद ₹1,000 करोड़ जमीन घोटाला क्या है?
यह गंडीपेट, रंगरेड्डी जिले में लगभग ₹1,500 करोड़ मूल्य की 10 एकड़ सरकारी पोरामबोके ज़मीन को नकली सरकारी आदेशों और फर्जी दस्तावेज़ों के ज़रिये अवैध रूप से बेचने की साजिश है। मामला 23 मई 2026 को दर्ज हुआ और अब तक 10 आरोपी चिह्नित किए जा चुके हैं।
वेलाडी राधाकृष्ण कौन है और उसे क्यों गिरफ्तार किया गया?
वेलाडी राधाकृष्ण 2006-2009 के बीच आंध्र प्रदेश सचिवालय में आउटसोर्सिंग कर्मचारी था। नौकरी छोड़ने के बाद उसने सरकारी प्रक्रियाओं की जानकारी का दुरुपयोग कर नकली दस्तावेज़ बनाए, सरकारी नौकरियों का झाँसा देकर ठगी की और अंततः गंडीपेट की सरकारी ज़मीन की अवैध बिक्री की साजिश में शामिल हो गया।
इस मामले में कौन-सा पूर्व विधायक आरोपी है?
आंध्र प्रदेश से वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के पूर्व विधायक बोल्ला ब्रह्मा नायडू इस मामले के आरोपियों में शामिल हैं और अभी फरार हैं। उनके भाई रमेश का नाम भी ज़मीन खरीदने की कोशिश में जुड़ा बताया गया है।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से क्या बरामद किया?
पुलिस ने राधाकृष्ण और प्रवीण कुमार से 5 लैपटॉप, 12 चेकबुक, 13 मुहरें, 7 बैंक पासबुक, 10 एटीएम कार्ड और विभिन्न ज़मीनों से संबंधित 31 दस्तावेज़ ज़ब्त किए हैं।
इस घोटाले की जाँच आगे कहाँ तक पहुँची है?
अब तक 10 आरोपी चिह्नित हो चुके हैं, जिनमें से 5 गिरफ्तार और 5 फरार हैं। डीसीपी सीएच श्रीनिवास के अनुसार फरार आरोपियों की गिरफ्तारी, पूरे वित्तीय लेन-देन की पड़ताल और सभी संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए जाँच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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