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पेंटागन का बड़ा फैसला: 30+ आयु के सभी सैनिकों की अनिवार्य टेस्टोस्टेरोन जांच, युद्धक क्षमता बढ़ाने की रणनीति

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पेंटागन का बड़ा फैसला: 30+ आयु के सभी सैनिकों की अनिवार्य टेस्टोस्टेरोन जांच, युद्धक क्षमता बढ़ाने की रणनीति

सारांश

अमेरिकी पेंटागन ने 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी सैनिकों के लिए टेस्टोस्टेरोन जांच अनिवार्य कर दी है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के ज्ञापन से तत्काल लागू यह नीति 'ऑपरेटर सिंड्रोम' से निपटने और युद्धक तैयारी को अधिकतम बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

मुख्य बातें

पेंटागन ने 16 जुलाई 2026 को 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी सक्रिय ड्यूटी और रिजर्व सैन्यकर्मियों के लिए टेस्टोस्टेरोन की कमी की अनिवार्य स्क्रीनिंग का आदेश दिया।
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन से यह नीति तत्काल प्रभाव से लागू हुई।
30 वर्ष से कम आयु के सैनिक अपनी इच्छा से यह जांच करा सकेंगे।
कार्मिक एवं तैयारी मामलों के अवर सचिव को 15 अगस्त तक विभागीय नीति में संशोधन करना होगा।
नीति के तहत बाहरी विशेषज्ञों की एडवाइजरी काउंसिल और डेटा एनालिटिक्स व पहनने योग्य तकनीकों का व्यापक उपयोग प्रस्तावित है।
यह कदम हेगसेथ के मई के वॉरफाइटर परफॉर्मेंस ऑप्टिमाइजेशन–टोटल फोर्स फिटनेस ज्ञापन की अगली कड़ी है।

अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने 16 जुलाई 2026 को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी सक्रिय ड्यूटी और रिजर्व सैन्यकर्मियों के लिए टेस्टोस्टेरोन की कमी की अनिवार्य स्क्रीनिंग लागू कर दी है। यह कदम ट्रंप प्रशासन की व्यापक सैन्य तैयारी रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य युद्धक्षेत्र में अमेरिकी सेना की प्रभावशीलता को अधिकतम स्तर पर लाना है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन के अनुसार यह नीति तत्काल प्रभाव से लागू मानी जाएगी।

क्या है 'ऑपरेटर सिंड्रोम' और क्यों उठाया गया यह कदम

पेंटागन ने जिस स्थिति को 'ऑपरेटर सिंड्रोम' नाम दिया है, वह सैनिकों में टेस्टोस्टेरोन के निम्न स्तर से जुड़ी कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं का समूह है। इनमें लगातार थकान, मांसपेशियों की ताकत और सहनशक्ति में गिरावट, नींद से जुड़ी बाधाएं, याददाश्त और एकाग्रता में कमी तथा तनाव, चिंता या अवसाद जैसे मानसिक स्वास्थ्य लक्षण शामिल हैं। इसके अलावा रिकवरी में सामान्य से अधिक समय लगना भी इस सिंड्रोम का संकेत माना जाता है। पेंटागन का तर्क है कि इन समस्याओं का समय रहते पता लगाकर लक्षित उपचार से सैनिकों की युद्धक तैयारी में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है।

नई स्क्रीनिंग नीति का ब्यौरा

पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता सीन पार्नेल ने बताया कि 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी सैन्यकर्मियों की नियमित पीरियोडिक हेल्थ असेसमेंट (PHA) के दौरान टेस्टोस्टेरोन स्तर की जांच अब अनिवार्य होगी। वहीं, 30 वर्ष से कम आयु के सैन्यकर्मी अपनी इच्छा से इसी मूल्यांकन के दौरान यह जांच करा सकेंगे। पार्नेल के अनुसार, यह बेहतर स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल विभाग के वॉरफाइटर परफॉर्मेंस ऑप्टिमाइजेशन–टोटल फोर्स फिटनेस प्रोग्राम को और सुदृढ़ करता है।

क्रियान्वयन की समय-सीमा और जिम्मेदारियां

आदेश के अनुसार, कार्मिक एवं तैयारी मामलों के अवर सचिव को 15 अगस्त तक विभागीय नीति में संशोधन कर इस अनिवार्य जांच को मौजूदा स्वास्थ्य मूल्यांकन दिशानिर्देशों में शामिल करना होगा। सभी सैन्य विभागों और डिफेंस हेल्थ एजेंसी (DHA) को भी अपनी अधीनस्थ नीतियों में बदलाव करने, आंतरिक प्रक्रियाओं को नई व्यवस्था के अनुरूप ढालने और चिकित्सा तथा सैन्य कर्मियों को प्रशिक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य मामलों के सहायक सचिव पूरी सैन्य स्वास्थ्य प्रणाली में परीक्षण की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे और क्लिनिकल गाइडेंस जारी करेंगे।

विशेषज्ञ परामर्श और तकनीकी दृष्टिकोण

नीति में बाहरी विशेषज्ञों की एक एडवाइजरी काउंसिल गठित करने का भी प्रावधान है, जो विभाग के स्वास्थ्य और मानव प्रदर्शन अनुकूलन प्रयासों को दिशा देगी। इसके साथ ही डेटा एनालिटिक्स, पहनने योग्य तकनीकों और संज्ञानात्मक प्रदर्शन के आकलन का व्यापक उपयोग करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि सैनिकों की शारीरिक और मानसिक क्षमता की बेहतर निगरानी हो सके।

पृष्ठभूमि: हेगसेथ के मई ज्ञापन से जुड़ा सिलसिला

गौरतलब है कि यह नया निर्देश रक्षा मंत्री हेगसेथ के मई के उस ज्ञापन पर आधारित है, जिसमें पेंटागन की वॉरफाइटर परफॉर्मेंस ऑप्टिमाइजेशन–टोटल फोर्स फिटनेस पहल की नींव रखी गई थी। उस दस्तावेज़ में कहा गया था कि सेना को सैनिक को एक तैयार क्षमता के रूप में देखना चाहिए और उसे उसी अनुशासित मूल्यांकन, रखरखाव और अनुकूलन के दायरे में रखना चाहिए, जो किसी भी युद्धक संपत्ति के लिए अपेक्षित होता है। यह नीति उसी सोच का विस्तार है और आने वाले महीनों में इसके क्रियान्वयन पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके साथ कुछ सवाल भी उठते हैं। टेस्टोस्टेरोन थेरेपी को युद्धक तैयारी से सीधे जोड़ना वैज्ञानिक दृष्टि से अभी भी बहस का विषय है — चिकित्सा विशेषज्ञों के एक वर्ग का मानना है कि हार्मोन स्तर और युद्धक प्रदर्शन के बीच संबंध उतना सरल नहीं है जितना नीति दर्शाती है। दूसरी बात यह है कि 'ऑपरेटर सिंड्रोम' एक पेंटागन-निर्मित शब्द है, जिसकी नैदानिक परिभाषा और मानक अभी पूरी तरह स्थापित नहीं हैं। आलोचकों का कहना है कि बिना स्वतंत्र चिकित्सा समीक्षा के इस पैमाने पर हार्मोन स्क्रीनिंग और संभावित थेरेपी के दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन जरूरी है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेंटागन की नई टेस्टोस्टेरोन जांच नीति क्या है?
पेंटागन ने 16 जुलाई 2026 को आदेश दिया है कि 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी सक्रिय ड्यूटी और रिजर्व सैन्यकर्मियों की नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान टेस्टोस्टेरोन की कमी की अनिवार्य स्क्रीनिंग की जाएगी। यह नीति रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के ज्ञापन से तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।
'ऑपरेटर सिंड्रोम' क्या होता है?
'ऑपरेटर सिंड्रोम' पेंटागन द्वारा दी गई वह संज्ञा है जो सैनिकों में टेस्टोस्टेरोन के निम्न स्तर से जुड़ी समस्याओं के समूह को दर्शाती है। इसमें लगातार थकान, मांसपेशियों की कमजोरी, नींद की बाधा, याददाश्त में कमी, मानसिक स्वास्थ्य लक्षण और रिकवरी में अधिक समय लगना शामिल हैं।
30 वर्ष से कम आयु के सैनिकों पर यह नीति कैसे लागू होगी?
30 वर्ष से कम आयु के सैन्यकर्मियों के लिए यह जांच अनिवार्य नहीं है। वे अपनी पीरियोडिक हेल्थ असेसमेंट के दौरान स्वेच्छा से यह स्क्रीनिंग करा सकते हैं।
इस नीति को लागू करने की समय-सीमा क्या है?
नीति तत्काल प्रभाव से लागू है। कार्मिक एवं तैयारी मामलों के अवर सचिव को 15 अगस्त तक विभागीय नीति में संशोधन करना होगा। सभी सैन्य विभागों और डिफेंस हेल्थ एजेंसी को भी अपनी प्रक्रियाएं उसी के अनुरूप ढालनी होंगी।
यह नीति किस व्यापक कार्यक्रम का हिस्सा है?
यह नीति रक्षा मंत्री हेगसेथ के मई के उस ज्ञापन पर आधारित है, जिसमें 'वॉरफाइटर परफॉर्मेंस ऑप्टिमाइजेशन–टोटल फोर्स फिटनेस' कार्यक्रम की शुरुआत की गई थी। इसका उद्देश्य डेटा एनालिटिक्स, पहनने योग्य तकनीकों और हार्मोन प्रबंधन के जरिए सैनिकों की समग्र युद्धक क्षमता बढ़ाना है।
राष्ट्र प्रेस
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